सूरत की एक अदालत ने सोमवार को फिल्म मेकर और एक्टर अनुराग कश्यप के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया. यह वारंट पिछले साल सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ उनकी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े एक मामले में अदालत के सामने पेश न होने के कारण जारी किया गया है. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जे.वी.चौहान ने कश्यप के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 24 दिसंबर के लिए तय की.
यह आदेश तब आया जब अनुराग अदालत के समन जारी किए जाने के बावजूद अदालत में पेश नहीं हुए. मई में अदालत ने वकील कमलेश रावल (जो हिंदुत्व संगठनों बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कानूनी सलाहकार हैं) की एक अर्जी पर कश्यप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192 (अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 352(2) (झूठी अफवाहें फैलाना) के तहत मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था.
न्यायिक कार्यवाही के हिस्से के रूप में अदालत ने कश्यप को समन जारी किया था, लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुए. रावल ने बताया कि सोमवार को भी उनके पेश न होने पर, अदालत ने उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया.
जमानती वारंट में आरोपी व्यक्ति को अदालत द्वारा तय की गई जमानत राशि जमा करके रिहाई पाने का विकल्प मिलता है. रावल ने कहा, "हमने शुरुआत में एक अर्जी दाखिल की थी और वेरिफिकेशन के लिए उनकी (अदालत में) उपस्थिति का अनुरोध किया था, लेकिन वह पेश नहीं हुए. इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्यवाही शुरू की. फिर एक समन जारी किया गया, लेकिन फिर भी वह नहीं आए. अदालत ने निर्देश दिया कि एक सार्वजनिक समन अखबार में प्रकाशित किया जाए. हमने इसे एक प्रमुख अखबार (के मुंबई संस्करण) में छपवाने की व्यवस्था की, लेकिन फिर भी वह पेश नहीं हुए."
अनुराग कश्यप के खिलाफ मामला
याचिकाकर्ता ने 16 अप्रैल, 2025 को अनुराग कश्यप द्वारा की गई टिप्पणी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है. कश्यप ने सोशल मीडिया (X) पर "एक आपत्तिजनक मैसेज पोस्ट किया, जिससे पूरे ब्राह्मण समुदाय की छवि धूमिल हुई." याचिका में कहा गया है कि जब आदित्य नाम के एक व्यक्ति ने कश्यप की पोस्ट पर आपत्ति जताई, तो फिल्म निर्माता ने गुस्से में जवाब देते हुए उसे फटकारा और पूछा, "ब्राह्मण होकर तुमने क्या हासिल कर लिया है?" रावल का दावा है कि ऐसी टिप्पणियां करके कश्यप ने "ब्राह्मण समुदाय को नीचा दिखाने की कोशिश की है, और यह पोस्ट पूरे ब्राह्मण समुदाय का अपमान है."
याचिकाकर्ता का तर्क है कि आरोपी के इस बयान से देश भर में अलग-अलग धार्मिक और जातीय समूहों के बीच दुश्मनी बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. आरोपी एक अभिनेता, निर्देशक और निर्माता हैं, जिनकी फिल्में हर उम्र के लोगों पर असर डालती हैं. याचिकाकर्ता के अनुसार, कश्यप की बाद की सोशल मीडिया पोस्ट से उनकी मानसिकता का पता चलता है. उन्होंने शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने और पूरे ब्राह्मण समुदाय को बदनाम करने की कोशिश की.
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कश्यप का यह ट्वीट 'फुले' नामक हिंदी फिल्म के ट्रेलर रिलीज होने के बाद, 'अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज' और 'विप्र सेना' नामक दो संगठनों द्वारा फिल्म के कुछ हिस्सों पर जताई गई आपत्तियों के जवाब में था. रावल ने दावा किया, "आरोपी के बयानों ने पूरे ब्राह्मण समुदाय को बदनाम किया है और भारत में अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत को बढ़ावा दिया है. उनके इस कदम से भारत की राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने और शांति व सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश की गई है."
अनुराग कश्यप की माफी
अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा होने के कुछ दिनों बाद, कश्यप ने ब्राह्मण समुदाय से माफी मांगी. उन्होंने कहा कि गुस्से में किसी को जवाब देते समय "अपमानजनक भाषा" का इस्तेमाल करके उन्होंने मर्यादा लांघ दी थी. अप्रैल 2025 में इंस्टाग्राम पर जारी एक बयान में फिल्म निर्माता ने कहा, "मैं इस समुदाय से दिल से माफी मांगता हूं. मैं ऐसा कुछ नहीं कहना चाहता था, लेकिन किसी की घटिया टिप्पणी का जवाब देते समय गुस्से में मैंने ऐसा लिख दिया. मैं अपने सभी दोस्तों, अपने परिवार और (ब्राह्मण) समाज से अपनी बातचीत के तरीके और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल के लिए माफी मांगता हूं."
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