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सुभाष घई का ‘M’ मैजिक! 4 हीरोइनें, 7 फिल्में और हर बार ब्लॉकबस्टर

बॉलीवुड के मशहूर फिल्मकार सुभाष घई को यूं ही ‘शोमैन’ नहीं कहा जाता. उनकी फिल्मों में भव्यता, दमदार संगीत, भावनाएं और ग्लैमर का ऐसा मेल होता था कि दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आते थे.

सुभाष घई का ‘M’ मैजिक! 4 हीरोइनें, 7 फिल्में और हर बार ब्लॉकबस्टर
बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर हैं सुभाष घई, जानें क्या है उनका M मैजिक

बॉलीवुड के मशहूर फिल्मकार सुभाष घई को यूं ही ‘शोमैन' नहीं कहा जाता. उनकी फिल्मों में भव्यता, दमदार संगीत, भावनाएं और ग्लैमर का ऐसा मेल होता था कि दर्शक सिनेमाघरों तक खिंचे चले आते थे. लेकिन उनकी सफलता के पीछे एक दिलचस्प संयोग भी रहा- ‘M' अक्षर वाली हीरोइनों का लकी कनेक्शन. 24 जनवरी 1945 को नागपुर में जन्मे सुभाष घई (Subhash Ghai) का बचपन दिल्ली में बीता. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पुणे के एफटीआईआई से फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग ली. शुरुआत उन्होंने एक अभिनेता के रूप में की थी और ‘आराधना' जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए, लेकिन एक्टिंग में खास पहचान नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने निर्देशन का रास्ता चुना, जिसने उनकी किस्मत बदल दी.

कालीचरण पहली हिट फिल्म 

डायरेक्टर के तौर पर उनकी पहली बड़ी सफलता ‘कालीचरण' (1976) रही. इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं- ‘कर्ज', ‘हीरो', ‘विधाता', ‘राम-लखन', ‘सौदागर', ‘खलनायक', ‘परदेस' और ‘ताल'. इन फिल्मों ने उन्हें राज कपूर के बाद बॉलीवुड का दूसरा शोमैन बना दिया. सुभाष घई की फिल्मों में नई हीरोइनों को लॉन्च करने का खास ट्रेंड भी रहा. दिलचस्प बात यह है कि जिन अभिनेत्रियों को उन्होंने बड़े स्तर पर पेश किया, उनके नाम ‘M' अक्षर से शुरू होते थे. 

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'M' नाम की हीरोइनें रहीं लकी 

‘हीरो' में मीनाक्षी शेषाद्री, ‘राम-लखन' में माधुरी दीक्षित, ‘सौदागर' से मनीषा कोइराला और ‘परदेस' से महिमा चौधरी- ये चारों एक्ट्रेस बाद में बड़ी स्टार बनीं. संयोग यह भी रहा कि इन फिल्मों को जबरदस्त सफलता मिली, जिससे यह ‘M' फैक्टर घई के लिए लकी माना जाने लगा.

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सिर्फ निर्देशन ही नहीं, सुभाष घई ने प्रोडक्शन और फिल्म शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया. उन्होंने फिल्म ‘ताल' के दौरान इंश्योरेंस जैसी आधुनिक व्यवस्था को बढ़ावा दिया. साथ ही उन्होंने व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल फिल्म स्कूल की स्थापना की, जहां से कई कलाकार और फिल्मकार निकले.

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