निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘पुलिस कंपनी' की शूटिंग रोक दी गई. फिल्म ‘पुलिस कंपनी' के मुहूर्त पर ही एफडब्ल्यूआईसीई (FWICE) ने शूटिंग रुकवा दी. गौरतलब है कि पिछले 9 साल से राम गोपाल वर्मा पर अपनी कई फिल्मों के टेक्नीशियंस का पैसा बकाया था. एफडब्ल्यूआईसीई कई साल से उनसे पैसे मांग रहा था और उन्हें वक्त भी दे रहा था, लेकिन राम गोपाल वर्मा बीते सालों में करीब 1 करोड़ 32 लाख रुपये की देनदारी खत्म नहीं कर पाए. इसके चलते एफडब्ल्यूआईसीई के सदस्यों ने फिल्म की शूटिंग रोक दी. हालांकि, अब पूरा पैसा दे दिया गया है. एफडब्ल्यूआईसीई के अध्यक्ष बी.एन. तिवारी ने कहा कि अभी और भी लोग हैं, जो धीरे-धीरे सामने आएंगे. एनडीटीवी से खास बातचीत करते हुए बी.एन. तिवारी ने कहा-
साक्षात्कार
संवाददाता: तिवारी जी, बहुत-बहुत शुक्रिया बात करने के लिए. सबसे पहले यही पूछूंगा कि सुना है कि रामू यानी राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘पुलिस कंपनी' का जो शूट हो रहा था, वो एफडब्ल्यूआईसीई ने रुकवा दिया है. क्या वजह रही?
बी.एन. तिवारी: जी हां, ऐसा रहा कि 9 साल से पैसे बाकी थे दो-तीन फिल्मों के इनके. ‘सरकार', ‘सरकार 3' और दूसरी फिल्में थीं. कुछ ‘गंदी' सी फिल्म बनाए थे, जो रिलीज नहीं हुई थी और एक कोई और फिल्म थी, ‘ऑफिसर'. ‘ऑफिसर' उनकी फिल्म के पैसे थे सबके.
संवाददाता: टेक्नीशियंस के पैसे थे ये?
बी.एन. तिवारी: टेक्नीशियन के पैसे थे सारे. उसमें अभी बहुत सारे कुछ लोग तो आ ही रहे हैं अभी. न्यूज़ पढ़ने के बाद हो सकता है कि आपकी आए तो और बैलेंस वाले भी आ जाएंगे.
संवाददाता: कितना पैसा ड्यू था?
बी.एन. तिवारी: 1 करोड़ 32 लाख रुपये ड्यू थे.
संवाददाता: पिछले तीन साल से?
बी.एन. तिवारी: ना-ना, 9 साल से.बड़ी-बड़ी बातें करते रहे. 19 में इन्होंने एक लेटर दिया था कि हम जो है, आपका ये पेमेंट फुल एंड फाइनल कर देंगे, आप टेंशन ना लें. मगर उसके बाद इन्होंने कोई कांटेक्ट नहीं किया. ऑफिस बंद किया और गुल हो गए. इनको हम लोग ट्रेस आउट करते रहे. फिर गोवा में पकड़े. वहां से इन्होंने फिर प्रॉमिस किया कि मैं कर दूंगा. फिर ये हैदराबाद चले गए, छुप-छुपकर छोटी-मोटी फिल्में करते रहे. मगर पहली बार जो है, ऊंट पहाड़ के नीचे आया.
संवाददाता: लेकिन कई बार वो इन सब चीजों को ऐसे भी बोल देते हैं कि ये एफडब्ल्यूआईसीई की दादागिरी है. उस पर क्या बोलेंगे आप?
बी.एन. तिवारी: नहीं, उन्होंने ये बोला था जब हमने रणवीर सिंह के ऊपर ये नॉन-कॉन्फिडेंस मोशन लाया था की आप आए और अपना भी पक्ष रखें ( डॉन 3 मामले के बात ) तो जब नॉन-कॉन्फिडेंस डायरेक्टिव हमने इशू किया तो इसने उसी दिन रात को पढ़कर के बोला, वो एफडब्ल्यूआईसीई होती कौन है, ये तो गुंडों की पार्टी है, अपना ग्रुप है. इनको एफडब्ल्यूआईसीई को ही बैन कर देना चाहिए.
बी.एन. तिवारी ने आगे कहा - तो हम कहे कि ठीक है भाई, तुमको कहां ढूंढने जाएं? तुम तो रातों के राजा हो, दिन में गायब हो जाते हो. तो इनको हमने दिन में पकड़ लिया. साहब, कुछ लोग बहुत रिक्वेस्ट करने के लिए बड़े-बड़े लोग आए, जिसकी वजह से महीने-डेढ़ महीने टाइम लगा. लास्ट मोमेंट पर टी-सीरीज का फाइनेंस था. मैंने टी-सीरीज से कॉन्टैक्ट किया कि भई, कल आपका शूट है, जिसमें आपका फाइनेंस है और इतने हमारे लोगों के पैसे बाकी हैं. उन्होंने हमसे प्रॉमिस किया कि सुबह मैं जाऊंगा, सेट पर आपसे बात करूंगा. उसके बाद आप स्टेप लीजिए.
उन्होंने वहां से फोन किया कि भई, जो रामू को छोड़कर बाकी सारे लोग तो हैं नहीं … रामू केवल आए हैं और स्टाफ आया है. जिन लोगों से आपकी बात हुई, वो तो कोई अभी तक आए नहीं हैं. तो आएंगे तो हम बात करेंगे.
हम वेट करते रहे. हमने अपने आदमियों को बोल दिया. उसमें क्या है कि मेजर काम जिनका था, फाइट मास्टर था और रामू की पिक्चर में तो फाइट मास्टर ही होते हैं ना, एक्शन होता है. तो माड़िया के लोग थे, जो डमी वाले, जो इफेक्ट देते हैं, जलने-वलने का. कैमरामैन से हमने बात कर लिया था. सबका कोऑपरेशन एकसाथ था हमारे पास.
हमने उनसे कहा अभी आप सेट पर जाइए. आप बाकायदा मुहूर्त पर रहिए. ऐसा ना हो कि आपका रिप्लेसमेंट शुरू हो जाए. तो आप अपनी ड्यूटी पर हैं, मगर हमारी ड्यूटी भी है कि जब तक हम यहां से नहीं बोलते हैं, तब तक कोई कार्रवाई ना हो.
संवाददाता: जब तक पैसे ना मिलें, तब तक…
बी.एन. तिवारी: पैसे हमारे अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएंगे. अकाउंटेंट हमारा बता देगा कि ये पैसा आ गया है फुल एंड फाइनल, नो इंस्टॉलमेंट, नो नथिंग. तब तक खड़े रहो वहीं पर फिर 3 बजे हमारे अकाउंट में पैसा आया और पैसा जैसे पूरा आ गया, हमने कन्फर्म किया, काम शुरू हो गया.
संवाददाता: पूरा पैसा आ गया है?
बी.एन. तिवारी: पूरा-पूरा-पूरा. कुछ हमने डिस्काउंट दे दिया था, क्योंकि पावरफुल लोग आकर के बीच में आ गए थे, जो केवल डिस्काउंट दिला सकते हैं, बाकी कुछ कर नहीं सकते, पेमेंट नहीं दिला पाते. तो हमारी तो जिद थी साहब, हम अपने ऑफिस में बैठे थे. लोगों का कहना था कि आप किसी को भेजो फेडरेशन से. हम कि नहीं, कोई नहीं जाएगा. आप काम नहीं करोगे, कैमरा ऑन नहीं होगा. पेमेंट सब बड़ी इज्जत के साथ आया है, ट्रांसफर होकर.
संवाददाता: चलिए, अच्छी बात है. लोगों के पैसे आ गए बहुत बहुत धन्यवाद .
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