इंडस्ट्री में बहुत से एक्टर्स पीआर और दिखावे की वजह से सुर्खियों में रहते हैं और सफल होते हैं. वहीं कुछ कलाकार ऐसे भी हैं, जो बिना ज्यादा प्रचार के अपनी प्रतिभा और अपने काम के प्रति समर्पण के दम पर धीरे धीरे अपनी पहचान बनाते हैं. इन्हीं में से एक हैं कृति खरबंदा. वर्षों से कृति ने हिंदी, तेलुगु और कन्नड़ सिनेमा में सफलतापूर्वक काम करते हुए अलग-अलग इंडस्ट्री, जॉनर और दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई है. हालांकि अपनी मजबूत फिल्मोग्राफी के बावजूद वह अपने पीढ़ी की टॉप एक्ट्रेसेस में नहीं गिनी जातीं, जिसकी वे हकदार हैं. यही वजह है कि 'राणा नायडू 2' में उनकी परफॉर्मेंस सीरीज की रिलीज के एक साल बाद भी चर्चा का केंद्र बनी हुई है.
आलिया ओबेरॉय के किरदार में की गई पसंद
आलिया ओबेरॉय के किरदार में कृति ने भारत की सबसे चर्चित स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी में कदम रखा और अपने साथ एक ताजगी भरी ऊर्जा लेकर आईं. यह किरदार उन भूमिकाओं से काफी अलग था, जिनसे दर्शक अब तक उन्हें जोड़ते आए थे. हालांकि महत्वाकांक्षा, भावनात्मक जटिलताओं, संवेदनशीलता और मजबूती से पिरोए गए इस किरदार को निभाना उनके लिए बेहद मुश्किल था, लेकिन इसे उन्होंने एक चुनौती की तरह लिया और कर दिखाया.
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सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने दमदार व्यक्तित्वों और प्रभावशाली परफॉर्मेंस से भरी कहानी में भी अपनी अलग मौजूदगी बनाए रखी. जहां शो में हाई-स्टेक ड्रामा और बड़े किरदारों का दबदबा था, वहीं कृति की परफॉर्मेंस कभी भी दबती हुई महसूस नहीं हुई. उन्होंने संयम और आत्मविश्वास के साथ अपने किरदार को निभाया.
'राणा नायडू 2' ने कृति की उस खासियत को भी सामने लाया, जो शुरुआत से उनकी पहचान रही है, और वह थी खुद को हर परिस्थिति और किरदार के अनुसार ढाल लेने की क्षमता. बहुत कम कलाकार ऐसे होते हैं जो इतनी सहजता से भाषाओं, जॉनर और फॉर्मेट्स के बीच बदलाव कर पाते हैं. रोमांटिक एंटरटेनर्स और कॉमेडी फिल्मों से लेकर थ्रिलर्स और अब एक रॉ और ग्रिटी स्ट्रीमिंग ड्रामा तक, कृति ने लगातार खुद को नए रूप में पेश किया है.
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कृति इंडस्ट्री की सबसे अंडररेटेड परफॉर्मर्स में से एक मानी जाती हैं. उन्होंने कभी किसी एक इमेज या तय फॉर्मूले पर निर्भर रहने की कोशिश नहीं की. इसके बजाय, उन्होंने चुपचाप एक विविधतापूर्ण फिल्मोग्राफी तैयार की, जहां हर किरदार खुद उनके काम की गवाही देता है.
हालांकि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव ने दर्शकों को पारंपरिक लेबल्स से आगे बढ़कर कलाकारों को नए नजरिए से देखने का अवसर दिया है. इसी के साथ 'राणा नायडू 2' ने एक बार फिर कृति की रेंज और स्क्रीन प्रेजेंस की याद दिलाई.वह जोखिम लेने से नहीं डरतीं, चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं करती हैं.
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