राजपाल यादव का 9 करोड़ का चेक बाउंस मामला चर्चा में है, जिसके लिए एक्टर को 13 दिन तिहाड़ जेल में बिताने पड़े. हालांकि 17 फरवरी को कुछ रकम जमा करने के बाद एक्टर को जमानत मिल गई और 18 फरवरी को वह रिहा हो गए. इसके बाद वह अपनी भतीजी की शादी में अपने पैतृक गांव गए. लेकिन अब वह अपने काम पर लौट आए हैं, जिसके चलते राजपाल यादव ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी, जिसमें उन्होंने बताया कि बिना अग्रीमेंट के पेपर देखे उन्होंने साइन कर दिया था.
राजपाल यादव ने कही ये बात
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजपाल यादव ने कहा, मैंने अग्रीमेंट पढ़े नहीं ये मुझसे गलती हुई. मैं जुबान पर विश्वास करता गया.
राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं इस बात का खंडन करने आया हूं कि वो झूठ फैला रहा है उसकी मंशा पैसे लेने की नहीं थी बल्कि जेल भेजवाने की थी. ये आरोप राजपाल के वकील ने उद्योगपति माधव गोपाल अग्रवाल पर लगाया है, जिन्होंने राजपाल को 5 करोड़ का लोन दिया था.
क्या है राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला
2010 में राजपाल यादव ने डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म 'अता-पता लापता' का निर्माण करने के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग पांच करोड़ रुपए का लोन लिया था. हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई, जिसके चलते लोन चुकाने में देरी हुई और एक्टर द्वारा दिए गए चेक बाउंस हो गए. इसके बाद नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर को कई अवसर भी दिए, लेकिन बार-बार भुगतान न करने के कारण अदालत ने उन्हें नोटिस जारी किया और 4 फरवरी को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था. वहीं एक्टर ने कानून का पालन किया. जबकि अपनी भतीजी की शामिल होने के लिए उन्होंने जमानत याचिका दी. इसके बाद 13 दिन बाद उन्हें कुछ रकम अदा करने के बाद जेल से रिहा कर दिया गया. वहीं अब 18 फरवरी को सुनवाई होनी है.
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