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51 साल से हर बारिश में आशिकों की जुबान पर चढ़ जाता है ये गाना, लता मंगेशकर की आवाज और शर्मिला टैगोर की अदाओं ने बनाया सदाबहार

रिलीज के 51 साल बाद भी जैसे ही सावन की फुहारें पड़ती हैं, यह गाना फिर से लोगों के दिलों में गूंजने लगता है. यह एक रोमांटिक गीत नहीं है, बल्कि इसमें प्रेम, विरह और मिलन की अधूरी चाहत का बेहद खूबसूरत संगम देखने को मिलता है.

51 साल से हर बारिश में आशिकों की जुबान पर चढ़ जाता है ये गाना, लता मंगेशकर की आवाज और शर्मिला टैगोर की अदाओं ने बनाया सदाबहार
लता मंगेशकर का सदाबहार सावन गीत! क्या आपने सुना है?
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सावन का महीना आते ही बॉलीवुड के कई पुराने गानें लोगों की जुबान पर लौट आते हैं. लेकिन एक ऐसा गाना भी है, जो हर बार बारिश की पहली फुहार के साथ दिल में हलचल मचा देता है. इसकी धुन सुनते ही हरियाली, झूमते पेड़, बारिश की बूंदें और प्यार की मीठी तड़प एक साथ याद आ जाती है. इस गाने में न सिर्फ रोमांस है, बल्कि विरह की ऐसी मासूम कसक भी है, जिसने इसे पीढ़ियों तक पसंदीदा बनाए रखा है. इस गाने को भारत की स्वर कोकिला ने अपनी आवाज दी थी और पर्दे पर एक मशहूर एक्ट्रेस की नटखट अदाओं ने इसे अमर बना दिया. यह गाना है 'अब के सजन सावन में'.

सीधी दिल में उतरी लता मंगेशकर की आवाज 

साल 1975 में रिलीज हुई 'चुपके चुपके' सिर्फ अपनी शानदार कॉमेडी के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सदाबहार म्यूजिक के लिए भी याद की जाती है. फिल्म का गाना 'अब के सजन सावन में' आज भी सावन के सबसे पसंदीदा बॉलीवुड गीतों में गिना जाता है. इसे लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज से सजाया था. गीत के बोल आनंद बक्शी ने लिखे, जबकि इसका संगीत महान संगीतकार एस. डी. बर्मन ने तैयार किया. इस खूबसूरत गाने को धर्मेंद्र और शर्मिला टैगोर पर फिल्माया गया था. खासकर शर्मिला टैगोर की मासूम मुस्कान, चुलबुली अदाएं और बारिश के बीच उनकी स्क्रीन प्रेजेंस ने इस गाने को एक अलग ही पहचान दिलाई. यही वजह है कि पांच दशक बाद भी यह गीत हर सावन में लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बन जाता है.

फिल्म फ्लॉप नहीं, लेकिन गाना बन गया पहचान

ऋषिकेश मुखर्जी की डायरेक्शन में बनी 'चुपके चुपके' हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन सिचुएशनल कॉमेडी फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म में धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, अमिताभ बच्चन, जया भादुड़ी, ओम प्रकाश और उषा किरण जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे. इसकी कहानी उपेंद्र गांगुली के उपन्यास 'छद्मभेष' पर आधारित थी. फिल्म में प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी (धर्मेंद्र) अपनी पत्नी सुलेखा (शर्मिला टैगोर) को सबक सिखाने के लिए ड्राइवर का भेष धारण कर लेते हैं. इसके बाद पैदा होने वाली मजेदार गलतफहमियां दर्शकों को अंत तक हंसाती रहती हैं.

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