‘अग लावां मजबूरी नु, आन जान दी पसूरी नु...' गाने की ये लाइन सुनते ही शायद आपको भी इसकी धुन याद आ जाए. दिलचस्प बात यह है कि बहुत से लोग इस गाने को खूब पसंद करते हैं, भले ही उन्हें इसके हर पंजाबी शब्द का मतलब न पता हो. यही ‘पसूरी' की सबसे खास बात है. इसकी आवाज, बीट्स और संगीत ऐसा एहसास पैदा करते हैं कि भाषा पूरी तरह समझ न आने के बावजूद गाना सीधे दिल तक पहुंच जाता है. लेकिन जिस शब्द को सुनकर लोग झूमते हैं, उसका मतलब आखिर है क्या? और अली सेठी को इस गाने का आइडिया कहां से मिला था? इसकी कहानी भी गाने जितनी ही दिलचस्प है.
‘पसूरी' का मतलब क्या है?
‘पसूरी' पंजाबी शब्द है और इसका कोई एकदम सटीक हिंदी मतलब बताना आसान नहीं है. इसके भाव में कशमकश, मजबूरी, बेचैनी, परेशानी और तड़प जैसी कई बातें शामिल हैं. गाने के संदर्भ में इसे ऐसी स्थिति से जोड़कर समझा जा सकता है, जहां इंसान किसी मजबूरी या दूरी की वजह से बेचैन है और अपने दिल की बात कहना चाहता है. इसलिए ‘पसूरी' को सिर्फ ‘मुश्किल' या ‘परेशानी' कहना इसके पूरे भाव को नहीं समझाता.
एक ट्रक पर लिखी लाइन से आया था आइडिया
‘पसूरी' के पीछे की कहानी शायद आपको और भी हैरान करे. अली सेठी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह फैसलाबाद से लाहौर जा रहे थे. रास्ते में उनकी नजर एक ट्रक के पीछे लिखी पंजाबी लाइन पर पड़ी, ‘अग लावां मजबूरी नु'. ये शब्द उन्हें इतने पसंद आए कि उन्होंने इन्हें अपने पास संभाल लिया. आगे चलकर यही लाइन एक गाने के आइडिया की शुरुआत बनी और ‘पसूरी' तैयार हुआ.
‘पसूरी' कोक स्टूडियो पाकिस्तान के सीजन 14 का हिस्सा था. इसे अली सेठी और शाए गिल ने गाया. गाने के बोल अली सेठी और फज़ल अब्बास ने लिखे, जबकि संगीत अली सेठी और ज़ुल्फी ने तैयार किया. गाने के वीडियो में शीमा किरमानी की खास डांस परफॉर्मेंस भी नजर आती है.
शायद यही वजह है कि ‘पसूरी' को पसंद करने के लिए उसके हर शब्द का मतलब समझना जरूरी नहीं पड़ा. पंजाबी बोल, अली सेठी और शाए गिल की आवाज, अलग तरह की बीट्स और गाने में छिपी बेचैनी ने इसे ऐसा एहसास दिया, जिससे लोग भाषा की सीमा के बावजूद जुड़ गए. यही ‘पसूरी' की असली ताकत है, इसके बोल शायद हर किसी को समझ न आएं, लेकिन इसका एहसास जरूर समझ में आता है.
यूट्यूब पर इस गाने को 99 करोड़ से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं. बता दें कि ये गाना सिर्फ पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में इस गाने ने अपना डंका बजाया. यही वजह है कि आज भी ये गाना बजते ही पैर थिरकने लगते हैं.
गाने के लिरिक्स
आग लगा दी मजबूरी को, दुनिया दी दस्तूरी नु
साथ तेरा है बड़ा पूरा कर जरूरी नु, आना सी जो नहीं आया
दिल बाँग-बाँग मेरा टकराया, कागा बोल के दस जावे
पावां ख्यों दी चुरी नु, रावां च बाबा ओ नू लुकावां
कोई मेनु ना रोके, मेरे डोल जुदाइयां दी तेनु खबर किवें होवे
आ जावे दिल तेरा पूरा भी ना होवे!
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