राजनीति सिर्फ चुनाव, भाषण और सत्ता हासिल करने की लड़ाई तक सीमित नहीं होती. कई बार असली खेल बंद दरवाजों के पीछे चलता है. यहां लिए गए फैसले पूरे देश की दिशा बदल सकते हैं. कहीं एक नेता की छवि बनाने की कोशिश होती है तो कहीं सत्ता के लिए अपने ही लोग एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो जाते हैं. जी5 (Zee 5) पर द विजार्ड ऑफ द क्रेमलिन के स्ट्रीम होने के साथ, आइए ऐसी पांच फिल्मों और सीरीज पर नजर डालते हैं जो राजनीति की दुनिया को अलग-अलग नजरियों से दिखाती हैं.
द विजार्ड ऑफ द क्रेमलिन [Zee 5]
किसी नेता की इमेज बनाने में कहानियों और मीडिया की कितनी बड़ी भूमिका हो सकती है, द विजार्ड ऑफ द क्रेमलिन इसी सवाल को सामने रखती है. फिल्म में पॉल डैनो ने वादिम बारानोव का किरदार निभाया है जो टेलीविजन की दुनिया से निकलकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का करीबी राजनीतिक रणनीतिकार बन जाता है. जूड लॉ ने पुतिन की भूमिका निभाई है. जैसे-जैसे पुतिन का प्रभाव बढ़ता है, बारानोव भी लोगों के सामने उनकी छवि गढ़ने में अहम भूमिका निभाने लगता है. ओलिवियर असायस के निर्देशन में बनी यह फिल्म जूलियानो दा एम्पोली के उपन्यास पर आधारित है. यह दिखाती है कि राजनीति में सिर्फ फैसले लेना ही नहीं, बल्कि लोगों को उन फैसलों के बारे में क्या सोचने देना है, यह भी उतना ही अहम होता है.
द आइड्स ऑफ मार्च [Zee 5]
चुनाव जीतने की चाह इंसान को किस हद तक बदल सकती है? द आइड्स ऑफ मार्च इसी पहलू को दिलचस्प अंदाज में सामने लाती है. रयान गॉसलिंग ने स्टीफन मेयर्स का किरदार निभाया है, जो राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने की कोशिश कर रहे गवर्नर माइक मॉरिस के चुनावी अभियान से जुड़ा है. जॉर्ज क्लूनी ने मॉरिस की भूमिका निभाई है लेकिन जैसे-जैसे चुनाव करीब आता है. एक विवाद और पर्दे के पीछे चलने वाली राजनीतिक चालें स्टीफन के भरोसे को हिला देती हैं. फिलिप सीमोर हॉफमैन, पॉल जियामाटी, मारिसा टोमेई और इवान रेचल वुड भी फिल्म का हिस्सा हैं. यह कहानी दिखाती है कि जीत की दौड़ में आदर्शों और निजी महत्वाकांक्षा के बीच की रेखा कितनी आसानी से मिट सकती है.
द डेथ ऑफ स्टालिन [YouTube]
सत्ता में बैठे किसी ताकतवर नेता की मौत के बाद क्या होता है? द डेथ ऑफ स्टालिन इसका जवाब व्यंग्य और डार्क कॉमेडी के जरिए देती है. 1953 में सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन की मौत के बाद उनके करीबी सहयोगियों के बीच अगला नेता बनने और अपना प्रभाव बनाए रखने की होड़ शुरू हो जाती है. हर कोई अपनी जगह मजबूत करना चाहता है और बदलते हालात के साथ वफादारियां भी बदलती रहती हैं. आर्मांडो इयानुची के निर्देशन में बनी इस फिल्म में स्टीव बुसेमी ने निकिता ख्रुश्चेव और साइमन रसेल बील ने लाव्रेंती बेरिया की भूमिका निभाई है. फिल्म इतिहास की एक गंभीर घटना को हास्य के जरिए पेश करती है लेकिन इसके पीछे सत्ता की भूख और राजनीतिक जोड़-तोड़ की सच्चाई साफ नजर आती है.
द डिप्लोमैट [Netflix]
अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच सही फैसला लेना आसान नहीं होता, खासकर तब जब आपकी निजी जिंदगी भी उलझी हुई हो. द डिप्लोमैट में केरी रसेल ने केट वायलर का किरदार निभाया है, जो संकट के समय ब्रिटेन में अमेरिका की राजदूत बनकर आती हैं. सरकारों के बीच तनाव संभालने और नई जिम्मेदारियों के साथ तालमेल बैठाने के दौरान केट को अपने पति हैल वायलर के साथ रिश्ते की चुनौतियों से भी जूझना पड़ता है. रूफस सीवेल ने हैल की भूमिका निभाई है. यह सीरीज राजनीतिक बातचीत के साथ रिश्तों की पेचीदगियों को भी जगह देती है और दिखाती है कि बड़े फैसलों का दबाव उन्हें लेने वाले लोगों की निजी जिंदगी तक पहुंच जाता है.
द ब्रिंक ऑफ वॉर [Apple TV]
1986 में हुई रेक्याविक समिट की पृष्ठभूमि पर बनी द ब्रिंक ऑफ वॉर शीत युद्ध के एक अहम दौर को सामने लाती है. फिल्म में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की भूमिका जेफ डेनियल्स और सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव की भूमिका जेरेड हैरिस ने निभाई है. दोनों नेता परमाणु हथियारों में कटौती को लेकर बातचीत करते हैं, जहां हर फैसला दो महाशक्तियों के रिश्तों को प्रभावित कर सकता है. जे. के. सिमंस अमेरिकी विदेश मंत्री जॉर्ज शुल्ट्ज के किरदार में नजर आते हैं. फिल्म दिखाती है कि जब दांव पर पूरी दुनिया का भविष्य हो, तो बातचीत में एक कदम आगे बढ़ना और एक कदम पीछे हटना कितना मुश्किल हो सकता है.
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