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एक्टर नहीं अपने किसानों के हीरो थे नाना पाटेकर, अंतिम संस्कार के दौरान किसान एक्टिंग नहीं उनके बड़े दिल को याद करते रहे

नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार बीती रात हुआ. जहां बेटे मल्हार ने मुखाग्नि दी तो वहीं किसानों की नाना साहेब अमर रहे की गूंज सुनाई दी. 

एक्टर नहीं अपने किसानों के हीरो थे नाना पाटेकर, अंतिम संस्कार के दौरान किसान एक्टिंग नहीं उनके बड़े दिल को याद करते रहे
नाना पाटेकर हुए पंचतत्व में विलीन, किसानों ने कहा- नाना साहेब अमर रहें
नई दिल्ली:

दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार देर रात पुणे में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक, फिल्म जगत से जुड़े लोग, राजनीतिक नेता और मंत्री उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद रहे. लेकिन आखिर तक जो नाना के साथ थे वह वो किसान थे, जिनकी मदद के लिए कभी दिवंगत एक्टर ने हाथ बढ़ाया था. वहीं इसके चलते किसान इमोशन होते हुए नजर आए और फार्म हाउस पर नाना साहेब अमर रहे की गूंज सुनाई दी. 

पत्नी और बेटे ने दी मुखाग्नि

नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार विधिवत पूरा हुआ, जिसमें पार्थिव शरीर को देख सभी इमोशनल होते हुए नजर आए तो वहीं उनके करीबियों ने पैर छूकर नाना को अलविदा कहा. वहीं बेटे मल्हार पाटेकर और पत्नी नीलाकांति ने मुखाग्नि दी. इस दौरान बॉलीवुड सेलेब्स और राजनीति से जुड़े लोगों के अलावा नाना को प्यार करने वाले किसानों का भी जमावड़ा देखने को मिला, जो अपने प्यार नाना को आखिरी बाद अलविदा कहने आए थे. 

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नाना साहेब अमर रहे से गूजा फार्म हाउस 

अंतिम संस्कार में सेलेब्स और राजनेता से ज्यादा किसानों की संख्या थी, जिनके लिए नाना किसी भगवान से कम नहीं थे. इसी के चलते फार्म हाउस पर नाना साहेब अमर रहे की गूंज आखिर तक सुनाई दी. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि नाना पाटेकर ने किसानों की मदद के लिए हर बार आगे आए थे. दरअसल, 2015 में महाराष्ट्र में भारी सूखे और किसानों की आत्महत्या के दौरान उन्होंने मराठी एक्टर मकरंद अनासपुरे नाम फाउंडेशन की शुरूआत की थी. कहा जाता है कि नाना 1.5 करोड़ की कार खरीदने वाले थे. लेकिन टीवी पर किसानों की आत्महत्या की खबर से उनका ह्रदय परिवर्तन हुआ और वह किसानों की मदद के लिए आगे आए. फाउंडेशन के अनुसार, उनके जल संरक्षण कामों से 77 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ. इतना ही नहीं नाना खुद भी खेती करते थे और अपनी फसल की कमाई किसानों की मदद के लिए लगाते थे. 

चले गए नाना...

नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर की सुबह कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया था. वह गोवा में थे. वहीं उनकी इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार पुणे में उनके फार्महाउस पर हो. इसके चलते देर रात नाना का पार्थिव शरीर पुणे लाया गया और उन्हें बेटे मल्हार द्वारा अंतिम विदाई दी गई. इस दौरान हजारों की संख्या में किसान मौजूद थे, जो नाना को अलविदा कहने पहुंचे थे. 

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