इस शख्स का जन्म इराक के बगदाद में हुआ, जहां इसके पिता इराफी पुलिस फोर्स के एकाउंटेंट जनरल. कुछ समय इराक में बीता, कुछ समय लाहौर में और फिर पहुंचे मुंबई. ये वही शख्स है जिसकी मौत 1975 में हो गई लेकिन 2004 में इसकी बनाई गई धुनों का इस्तेमाल शाहरुख खान की फिल्म में हुआ तो ये संगीत हर किसी की जुबान पर चढ़ गया. यही नहीं, लता मंगेशकर ने 75 साल की उम्र में इसके गाने गाए. हम बात कर रहे हैं संगीतकार मदन मोहन की. जिनकी कम्पोजीशंस का इस्तेमाल शाहरुख खान, प्रीति जिंटा और रानी मुखर्जी की फिल्म में 'वीर जारा' में किया गया था. इसके जनाजे को राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन और राजेंद्र कुमार ने कंधा दिया था.
वीर-जारा में कैसे आया मदन मोहन का म्यूजिक
बात उस समय की है जब यश चोपड़ा अपनी रोमांटिक मूवी 'वीर-जारा' पर काम कर रहे थे. यश चोपड़ा ने बताया था कि उन्होंने अदनाम सामी और उत्तम सिंह के म्यूजिक को ट्राई किया. लेकिन बात नहीं बनी. उसी समय उनके सीईओ संजीव कोहली उनके पास आए. वे मदन मोहन के बेटे थे. संजीव ने बतचाया कि उन्के पिता उनके पिता की सैकड़ों धुने हैं. जिसमें से 20 धुनें फिल्म के एकदम माकूल है. इस तरह आदित्य चोपड़ा ने 11 धुनों को चुना. आखिर में फिल्म के गाने सुपरहिट हुए. मजेदार यह कि लता मंगेशकर ने 75 साल की उम्र में 'तेरे लिए' सॉन्ग गाया.
वीर-जारा का म्यूजिक और बॉक्स ऑफिस परफॉर्मेंस
वीर-जारा में 11 गाने थे जिसमें से दो गाने फिल्म में नहीं थे. इन गानों में ऐसा देश है मेरा, मैं यहां हूं, आया तेरे दर पर, दो पल, ये हम आ गए हैं कहां और तेरे लिए काफी पॉपुलर हुए. फिल्म में शाहरुख, रानी, प्रीति के अलावा अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, दिव्या दत्ता, मनोज बाजपेयी, बमन ईरानी, अनुपम खेर और किरण खेर मुख्य किरदारों में थे.
वीर-जारा का बजट लगभग 23 करोड़ रुपये था लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर 107 करोड़ रुपये कता कलेक्शन किया था. इस तरह फिल्म की कहानी से लेकर यश चोपड़ा का निर्देशन, मदन मोहन के म्यूजिक से लेकर सितारों की एक्टिंग तक, सबने फिल्म को हिट बनाने का काम किया.
मदन मोहन का अमर संगीत
मदन मोहन का संगीत बेशक उनके निधन के 30 साल बाद गूंजा और सुपरहिट हुआ. लेकिन उन्हें अपनी जिंदगी में खूब संघर्ष देखना बड़ा. जिसकी वजह से वे शराब के नशे में डूब गए. इसी वजह से उनका निधन भी हुआ. बताया जाता है कि उनके जनाजे को राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन और राजेंद्र कुमार ने कंधा दिया था. मदन मोहन को 2005 में 'वीर-जारा' के लिए मरणोपरांत आईफा बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर के अवॉर्ड से नवाजा गया था.
मदन मोहन को मेरा साया, वो कौन थी, हंसते जख्म, दस्तक और मौसम जैसी फिल्मों के लिए म्यूजिक के लिए पहचाना जाता है. बेशक उन्होंने गए 50 साल से ज्यादा का अरसा हो गया है. लेकिन वह अपने संगीत की वजह से आज भी यादों में जिंदा है.
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