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बटवारा 1947 में सनी देओल को मिले कितने करोड़? फीस के मामले में बाजी मार गया ये सितारा, कैमियो से कमाए करोड़ों

सनी देओल के लीड रोल वाली और राजकुमार संतोषी के डायरेक्शन में बनी बटवारा 1947, 14 अगस्त को रिलीज होने वाली है. फिल्म आने से पहले जानिए इसके लिए किसे मिले कितने करोड़.

बटवारा 1947 में सनी देओल को मिले कितने करोड़? फीस के मामले में बाजी मार गया ये सितारा, कैमियो से कमाए करोड़ों
बटवारा 1947 के लिए किसे मिली कितनी फीस?
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नई दिल्ली:

सनी देओल और प्रीति जिंटा के लीड रोल वाली फिल्म 'बटवारा 1947' इसी हफ्ते यानी कि 14 अगस्त को रिलीज होने जा रही है. इस फिल्म को लेकर फैन्स खासे एक्साइटेड हैं क्योंकि साल 2003 में 'द हीरो: लव स्टोरी ऑफ स्पाई' के बाद अब सनी देओल और प्रीति जिंटा साथ आ रहे हैं. इसके अलावा प्रीति लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं. इस वजह से ये फिल्म और खास बन जाती है. भारत-पाकिस्तान बटवारे के बैकड्रॉप में सजी इस फिल्म में सनी देओल और प्रीति जिंटा के अलावा करण देओल, शबाना आजमी, अली फजल, कनिका कपूर भी नजर आने वाले हैं. आइए नजर डालते हैं कि इस फिल्म के लिए किसे कितने पैसे मिले.

जैसा कि आप पहले से ही अंदाजा लगा सकते हैं कि सनी देओल फिल्म में लीड रोल में हैं तो उन्हें इसके लिए सबसे ज्यादा फीस मिली है. रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म बंटवारा 1947 का बजट 150 करोड़ है और इसमें अगर सनी देओल की फीस की बात करें तो वह 60 करोड़ बताई जा रही है.

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Photo Credit: Sunny Deol/X

सनी देओल के बाद बात करें प्रीति जिंटा की तो उन्हें इस फिल्म के लिए 10 करोड़ रुपये मिले हैं. दोनों ही सितारे 23 साल पहले 'द हीरो: लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई' जैसी हिट फिल्म दे चुके हैं. इन दोनों के अलावा फिल्म में शबाना आजमी बहुत ही अहम किरदार निभाती नजर आएंगी हालांकि उनकी फीस को लेकर कोई जानकारी इंटरनेट पर मौजूद नहीं है. इसके अलावा मेकर्स की तरफ से भी कोई कनफर्मेशन नहीं है. 

बात करें फिल्म में कैमियो करने वाले अली फजल की तो वे इस फिल्म में एक कैमियो करते नजर आएंगे. इस कैमियो रोल के लिए उन्हें 7 करोड़ रुपये में साइन किया गया था. सनी देओल के बेटे करण देओल और एक्ट्रेस कनिका कपूर की फीस को लेकर भी अभी कोई जानकारी नहीं मिली है. 

किस पर बनी है बटवारा 1947?

राजकुमार संतोषी के डायरेक्शन में बन रही बटवारा 1947 प्रसिद्ध नाटककार असगर वजाहत के नाटक 'जिसने लाहौर नी वेख्या ओ जम्या ही नई' पर आधारित है. फिल्म की कहानी में बटवारे के बाद लाहौर के बैकड्रॉप पर बनी है. ये आम लोगों की जिंदगी पर इसके असर को पर्दे पर उतारती है.

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फिल्म में एक मुसलमान परिवार की कहानी दिखाई गई है जो बटवारे के बाद लाहौर में एक हिंदू परिवार की हवेली में रहने के लिए आता है. वहां उन्हें पता लगता है कि उस घर की बुजुर्ग मालकिन बटवारे के बाद देश छोड़कर नहीं गई और अपने घर में ही है. इसके बाद कहानी आगे बढ़ती है और दिखाया जाता है कि कैसे उस महिला पर विवाद होता है और सनी देओल उसके सपोर्ट में आते हैं.

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