कुछ गाने ऐसे होते हैं जो सिर्फ कानों में नहीं गूंजते, बल्कि सीधे दिल के अंदर उतर जाते हैं. समय कितना भी बदल जाए, उनका जादू कभी फीका नहीं पड़ता. करीब 61 साल पहले एक ऐसा ही गाना आया था, जिसमें एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की तारीफ इतने सरल, प्यारे और दिल को छू लेने वाले शब्दों में की वे लाइनें आज भी लोगों की जुबान पर चढ़कर बोलती हैं. हसरत जयपुरी के बोल, शंकर-जयकिशन की मधुर धुन और मोहम्मद रफी की अद्भुत आवाज ने मिलकर ऐसा कमाल किया कि यह गाना आज भी प्यार का इजहार करने वालों की पहली पसंद बना हुआ है.
जब प्यार दिल से निकला
बात 1965 में रिलीज हुई फिल्म आरजू की है. इस फिल्म का मशहूर गाना ‘ऐ फूलों की रानी, बहारों की मलिका' आज भी युवा और बुजुर्ग दोनों की प्लेलिस्ट में जगह बनाए हुए है. फिल्म में राजेंद्र कुमार और साधना की जोड़ी ने अपने रोमांस से दर्शकों का दिल जीत लिया था. फिरोज खान भी इस फिल्म के अहम किरदारों में शामिल थे. गाने की सबसे बड़ी खूबी इसके बोल हैं. हसरत जयपुरी ने प्यार को इतने आसान और भावपूर्ण अंदाज में लिखा कि हर शब्द सीधे दिल तक पहुंच जाता है.
मोहम्मद रफी की आवाज ने जादू बढ़ाया
इस गाने को स्वर दिए थे महान गायक मोहम्मद रफी ने. उनकी आवाज में जो मिठास और गहराई थी, उसने हर लाइन को और भी खास बना दिया. लगता है जैसे गाने का हर शब्द दिल की गहराइयों से निकल रहा हो. यही वजह है कि इतने दशकों बाद भी लोग इसे उतनी ही शिद्दत और प्यार से सुनते हैं.
शंकर-जयकिशन की धुन ने बनाया अमर
गाने का संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने. इसकी धुन इतनी सरल, सुरीली और मनमोहक है कि एक बार सुनने के बाद लंबे समय तक कानों में बसी रहती है. यही कारण है कि 1960 के दशक का यह गाना आज नई पीढ़ी की प्लेलिस्ट में भी अपनी मजबूत जगह बनाए हुए है.
बदल गया जमाना, लेकिन नहीं बदली इसकी दीवानगी
आज रोमांस दिखाने के तरीके बदल गए हैं. हर दिन नए गाने आते हैं, लेकिन कुछ पुराने गाने कभी पुराने नहीं लगते. ये गाना भी उन्हीं में से एक है. आज भी जब कोई अपने प्यार को खास महसूस कराना चाहता है, तो ये गाना सबसे पहले याद आ जाता है.
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