हिंदी सिनेमा में जब भी पुरानी हिंदी फिल्मों के गानों की बात आती है तो वो सालों बाद भी लोगों को पसंद आते हैं और सालों बाद भी लोगों को जुबानी याद रहते हैं. हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसे गाने हैं जो समय के साथ पुराने नहीं होते हैं, बल्कि सदाबहार बन जाते हैं. वो वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर पीढ़ी उन्हें पढ़ना पसंद करती है. आज हम एक ऐसे ही सदाबहार गाने की बात करेंगे जो है फिल्म 'हिमायल की गोदी में' का गाना 'चांद सी महबूबा हो मेरी'. ये फिल्म साल 1965 में आई थी. इसके गाने को रिलीज हुए 61 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी इस गाने की सादगी और मिठास ने लोगों के दिलों में पहले जैसी जगह ही बनाई हुई है.
कल्याणजी-आनंदजी का संगीत और मुकेश की आवाज
इस गाने के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे, जिसके आसान शब्द सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचे. कल्याणजी आनंदजी का संगीत और मिकेश की आवाज ने मिलकर गाने का एक ऐसा मेल बनाया कि ये गाना हमेशा के लिए यादगार बन गया.
हिमालय की वादियों में फिल्माया
इस गाने की खासियत की इसकी लोकेशन. हिमालय की वादियों में बर्फ से ढ़के पहाड़ और हरियाली ने इस गीत को और भी ज्यादा खास बना दिया. इन खूबसूरत नजारों के बीच मनोज कुमार और माला सिन्हा की बेहतरीन अदाकारी और केमिस्ट्री ने गाने में एक अलग ही जान डाल दी. गाने में दोनों की स्क्रीन प्रेजेंस और सादगी लोगों के दिलों तक पहुंची. आज भी ये गाना टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया पर आता है तो लोग इसे सुनते हैं.
गाना सुनने के लिए यहां क्लिक करें.
गाने के बोल इस तरह हैं-
चाँद सी महबूबा हो मेरी कब ऐसा मैंने सोचा थाहाँ तुम बिलकुल वैसी हो जैसा मैंने सोचा था
ना रस्में हैं ना कसमें हैंना शिकवे हैं ना वादे हैंना रस्में हैं ना कसमें हैंना शिकवे हैं ना वादे हैंइक सूरत भोली भाली हैदो नैना सीधे सादे हैंदो नैना सीधे सादे हैं
रोमांटिक ही नहीं सादगी की मिसाल है गाना
'चांद सी महबूबा हो मेरी' महज एक रोमांटिक गाना नहीं है, बल्कि ये उस समय की सादगी और संगीत की याद भी दिलाता है. बिना किसी आर्टिफिशयल एडिट के गाने के बोल, आवाज और धन ने लोगों के दिलों मे अपनी जगह बना ली. कई सिंगिंग रियलिटी शो में ये गाना सुनने को मिल ही जाता है.
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