Iconic Qawaali: 80-90 के दशक में गीतकारों के कलम से निकले गीत कर्ण प्रिय ही नहीं, दिलों की गहराईयों तक उतर जाते हैं, लेकिन उस दौर के एक्टर के हाथों से कागज पर उतरी रचना, जो एक कालजयी गीत बन गया. बात हो रही है चरित्र अभिनेता कादर खान की, जो संवाद लेखन और एक्टिंग के लिए जाने जाते है, जिन्होंने अनौपचारिक रूप से मशहूर कव्वाली 'पर्दा है पर्दा' को अपने शब्द दिए थे, जिसकी गिनती एक कल्ट गानों में होती है.
ये भी पढ़ें-शाहरुख, सलमान, आमिर नहीं, बल्कि इस अभिनेता ने अपने से छोटी हीरोइंस के साथ पर्दे पर सबसे अधिक किया रोमांस!
आइकॉनिक गाने की जिम्मेदारी गीतकार आनंद बख्शी को दी गई थी
साल 1977 में रिलीज हुई मशहूर निर्माता-निर्देशक मनमोहन देसाई की फिल्म अमर अकबर एंथोनी का ये मशहूर और आइकॉनिक गाने को लिखने की जिम्मेदारी पहले गीतकार आनंद बख्शी को दी गई थी, लेकिन गीतकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए, जिसके बाद यह जिम्मेदारी दिग्गज संवाद लेखक और बहुमुखी प्रतिभा के धनी कादर खान को दी गई. विश्वास नहीं होगा आइकॉनिक कव्वाली का मुखड़ा उन्होंने कुछ घंटों में तैयार कर दिया था.

दिवंगत एक्टर कादर खान
Photo Credit: Social Media
फिल्म सेट के कोने में बैठकर तैयार किया कव्वाली का मुखड़ा
जानकर आश्चर्य होगा कि कादर खान ने 'पर्दा है पर्दा' गाने का मुखड़ा, 'पर्दा है पर्दा, परदे के पीछे पर्दानशीं है...पर्दानशीं को बे-पर्दा न कर दूं तो अकबर मेरा नाम नहीं है' फिल्म के सेट पर एक कोने में ही बैठकर तैयार कर दिया था. इस सेचुएशनल गाने के लिए खालिस उर्दू और कव्वाली मिजाज वाले शब्द चाहिए थे और कादर भाई ने चंद मिनटों में यह मसला सुलझा दिया, जो फिल्म के सेचुएशन पर बिल्कुल सटीक बन पड़ा था.
ये भी पढ़ें-आग लगा रही 'टॉक्सिक' का पहला गाना ‘तबाही', 'आग में घी' का काम कर रही विशाल मिश्रा की आवाज
फिल्म अमर अकबर एंथोनी में ऋषि कपूर फिल्माया गया था गाना
फिल्म इंडस्ट्री में आने से पहले मुंबई के एक कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रहे कादर खान की उर्दू साहित्य,शायरी और ड्रामा पर अच्छी पकड़ थी. आनंद बख्शी के हाथ खड़े करने के बाद मनमोहन देसाई परेशान होकर कादर खान के पास पहुंचे और कादर खान को कव्वाली लिखने की जिम्मेदारी दी, जिसे कादर खान ने एक मंझे हुए शायर की तरह निपटा दिया. यह गाना फिल्म में ऋषि कपूर फिल्माया गया था.
ये भी पढ़ें-जब 'टैगोर' के नाम पर फुटबॉल मैच हार गए दिलीप कुमार, बड़ा दिलचस्प है दो जिगरी दोस्तों का यह किस्सा!
डायरेक्टर और संगीतकर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को बहुत पसंद आया गाना
सिचुएशन के अनुसार गाना तैयार कराने के लिए मशहूर डायरेक्टर मनमोहन देसाई ने जब कादर खान से अपनी परेशानी बताई, तो कादर खान ने कहा, 'बस इतनी सी बात? आप मुझे थोड़ा वक्त दीजिए' और थोड़े से वक्त में ही कादर खान ने आईकॉनिक गाने का मुखड़ा तैयार कर दिया. कादर खान का लिखा मुखड़ा डायरेक्टर और फिल्म के संगीतकर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को बहुत पसंद आ गया. कह सकते हैं वो सभी खुशी से उछल पड़े थे.
लेकिन आईकॉनिक गाने का आधिकारिक क्रेडिट आनंद बख्शी को मिला
आईकॉनिक कव्वाली का मुखड़ा फाइनल होने के बाद बाकी का गाना भी कादर खान द्वारा तैयार किया गया, लेकिन उसका क्रेडिट कादर खान के हक में नहीं आया. फिल्म जब रिलीज हुई तो आईकॉनिक कव्वाली का आधिकारिक क्रेडिट आनंद बख्शी को ही मिला, लेकिन इंडस्ट्री में सब जानते थे कि सुपरहिट कव्वाली का रचनाकार कौन था. खुद संगीतकार प्यारेलाल ने आकाशवाड़ी के रेडियो इंटरव्यूज में इसकी अनौपचारिक पुष्टि कर चुके हैं.
ये भी पढ़ें-Ikka Release: 1300 करोड़ी रहमान डकैत पर भारी पड़ेगा ढाई किलो का हाथ, सनी देओल की 'इक्का' की आ गई तारीख
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं