Tragedy With Tragedy King: भारतीय सिनेमा के 'एक्टिंग के स्कूल' पुकारे जाने वाले दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार से जुड़े कई किस्से मशहूर है, लेकिन शो मैन राज कपूर और ट्रेजेडी किंग दिलीप साहब के बीच के किस्से काफी रोचक हैं. यह किस्सा साल 1949 में रिलीज हुई फिल्म 'अंदाज' के दरम्यिान की है, जब ब्लॉक्टबस्टर फिल्म अंदाज में दो जिगरी दोस्त और एक्टर ने पहली बार स्क्रीन शेयर किया था. यह फिल्म उस समय की सबसे अधिक कमाई करने भारतीय फिल्म बनी थी.
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मुंबई में चैरिटी मैच में हुई ट्रेजेडी किंग से साथ ट्रेजडी
किस्सा साल 1950 का है जब ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार और राज कपूर मुंबई में आयोजित एक चैरिटी मैच के लिए दो अलग-अलग टीमों के लिए फुटबॉल मैच खेल रहे थे और राज कपूर ने मैच में दिलीप कुमार को बड़े ही रोचक ढंग से हरा दिया. राज कपूर के मजाक का जब दिलीप साहब को पता चला तो वो भी अपनी हंसी रोक नहीं पाए. यह किस्सा दोनों कलाकारों की गहरी दोस्ती और मजाकिया अंदाज को दिखाती है.
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शो मैन राज कपूर के बेटे दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर ने आत्मकथा में किया घटना का जिक्र
Photo Credit: Social
ऋषि कपूर ने आत्मकथा में किया है किस्से का जिक्र
शो मैन राज कपूर के बेटे और दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा 'खुल्लम-खुल्लाः ऋषि कपूर अनसेंसर्ड में इस किस्से का जिक्र किया है. 20 अप्रैल, 2020 में दुनिया को अलविदा कह चुके ऋषि कपूर की आत्मकथा में हुए जिक्र के मुताबिक 1950 के दशक में मुंबई में चैरिटी के लिए एक फिल्मी सितारों का फुटबॉल मैच रखा गया था. उनके पिता राज कपूर एक टीम के कप्तान थे और दिलीप कुमार दूसरी टीम के कप्तान थे.
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दिलीप साहब रविंद्रनाथ टैगोर के बहुत बड़े प्रशंसक थे
दिलीप साहब एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार से सम्मानित व्यक्ति के बहुत बड़े प्रशंसक थे. उनके निधन की बात सुनते ही वो गहरे सदमे आ गए और शोक में इतने डूब गए मैदान पर चल रहे फुटबॉल मैच को ही भूल गए. दिलीप साहब अपनी टीम के कप्तान थे और कप्तान के सुस्त होने से पूरी टीम ताश के पत्ते की तरह बिखर गई, जिसका फायदा उठाकर राज कपूर की टीम ने ताबड़तोड़ गोल दागे और चैरिटी मैच को जीत लिया.

चैरिटी मैच जीतने के लिए दिलीप कुमार से झूठ बोला
मैच खत्म होने के बाद जब दिलीप साहब को राज कपूर के मजाक का पता चला, तो उन्होंने सिर पीट लिया. चैरिटी मैच साल 1950 में खेला जा रहा था, जबकि टैगोर का निधन साल 1941 में हो चुका था. राज कपूर ने मैच जीतने के लिए झूठ बोला था. राज कपूर के मजाकिया अंदाज से परिचित होने के बावजूद उनकी बातों में आने के लिए पहले दिलीप साहब अपने ऊपर खीजे और फिर राज कपूर को पकड़ने के लिए मैदान में दौड़ पड़े.
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हीरोइन को अंगूठी पहनाते समय नर्वस हुए दिलीप साहब
फिल्म के एक सीन नमें अंगूठी पहनाने का सीन पर दिलीप साहब बार-बार रीटेक दे रहे थे. यह देख राज कपूर मजाक के मूड में आ गए और फिल्माए जा रहे सीन के बीच पहुंचे और दिलीप से बोले, 'युसुफ , इसे सिर्फ फिल्म की अंगूठी समझकर पहनाओ. अगर असली अंगूठी पहनाने की तमन्ना हो, तो वह बात अलग है.' राज कपूर की ये बात सुनकर दिलीप साहब झेंप गए और फिल्म सेट पर खड़े कैमरामैन से लेकर टेक्निशियन जोर-जोर से हंसने लगे.

एक तस्वीर में तीन लीजेंड देवानंद, राज कपूर और दिलीप कुमार के साथ
Photo Credit: Instagram
फिल्म की हीरोइन के लिए उनके दिल में थी खास जगह
इस किस्से का दिलीप साहब की आत्मकथा 'दिलीप कुमारः द सब्सटेंस एंड दे शैडो के पेज नंबर 122-124 में बाकायदा जिक्र है. यही नहीं, इसका जिक्र वरिष्ठ पत्रकार बीके करणजिया की किताब 'बलंडर बस' में भी जिक्र किया गया है. आत्मकथा के मुताबिक दिलीप कुमार के दिल में फिल्म की हीरोइन के लिए एक खास जगह थी.
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