लता मंगेशकर ने भारतीय भाषाओं में 25000 से 30000 गाने गए हैं. उनके ढेरों गाने हिट और सुपरहिट रहे, जो आज भी यादगार है. लता को बॉलीवुड की सबसे बड़ी और आइकॉनिक सिंगर कहें तो गलत नहीं होगा. फैंस को उनके गाए अलग-अलग गाने पसंद हैं. कोई सादगी से भरा गीत है तो कोई प्यार का अहसास भर देता है तो कोई आखों में आंसू भर देता है. लता जी का गाया कोई न कोई गाना आपका भी फेवरेट होगा. लेकिन क्या आप जातने हैं कि लता मंगेशकर का कौन सा गाना उनका फेवरेट था. आइए जानते हैं कि लता जी के वो कौन से गाने थे जो उन्हें सबसे अधिक पसंद थे.
1. हर कोई 'ऐ दिल-ए-नादान' को इतना पसंद करता है कि हम रजिया सुल्तान फिल्म के इस दूसरे बेहतरीन गाने को नजरअंदाज कर देते हैं. ये गाना लता जी का फेवरेट था. उन्होंने एक बार कहा था, "डायरेक्टर कमाल अमरोही ने पूरी स्थिति को विस्तार से समझाया था. खय्याम साहब एक खास मूड चाहते थे. उन्हें अच्छी तरह पता था कि क्या करना है."
2. हर कोई लता जी के सोलो गाने 'क्या जानूं साजन' की तारीफ करता है. मन्ना डे के साथ गाए गए इस लोक-संगीत शैली वाले गाने की चर्चा कम होती है, लेकिन गाना लता जी को बेहद पसंद था. "'चुनरी संभाल' को गाना 'क्या जानूं साजन' और 'आजा पिया तोहे प्यार दूं' (बहारों के सपने) की तुलना में कहीं ज्यादा मुश्किल था. मुखड़े की हर लाइन के बाद 'हा-आह' कहना पंचम का आइडिया था. इसने गाने में एक नया आयाम जोड़ दिया.
3. बरसे घन सारी रात....संगीतकार वनराज भाटिया के लिए लता जी का गाया एकमात्र गाना बेहद शांत गीत है. रघुवीर सहाय की कविता में बहुत ज्यादा कामुकता है. लता जी ने कहा था, "मुझे याद है कि यह बहुत मुश्किल गाना था. जिस तरह से इसकी धुन आगे बढ़ती थी, उसने मुझे मेरे भाई हृदयनाथ मंगेशकर के कंपोजिशन की याद दिला दी. इसके अलावा, इसके जटिल बोल बिना तुकबंदी वाले और फ्री फ्लो वाले थे. यह मेरे सिंगिग के सबसे बड़े चैलेंज में से एक था."
4. बासु भट्टाचार्य की डायरेक्ट की हुई यह फिल्म, जो अब लगभग भुला दी गई है, मुख्य रूप से अमृता प्रीतम की विरोध और दर्द से भरी कविता के लिए याद की जाती है. इसमें एक समाज से बहिष्कृत महिला सोचती है कि वह अपने बच्चे की परवरिश सम्मान के साथ कैसे करे. लताजी ने कहा था, "अगर मैं गलत नहीं हूं, तो यह गाना श्यामजी-घनश्यामजी ने कंपोज किया था. इसके बोल बहुत प्रभावशाली थे. यह एक पीड़ित मां की व्यथा को दर्शाता है जो अपने बच्चे के बेहतर जीवन के लिए ईश्वर से प्रार्थना कर रही है. मुझे हमेशा ऐसे बोल गाने में अच्छा लगता था जो गाए जा रहे शब्दों से कहीं अधिक गहरे अर्थ व्यक्त करते थे."
5. एक मां अपने मृत बच्चे के लिए लोरी गाती है. लताजी ने अपने भाई की रचना को अत्यंत हृदय-विदारक भावुकता के साथ गाया है. वह याद करती हैं, ‘यह गाना गाना आसान नहीं था. इसके बोल एक शोक-संतप्त मां के बारे में थे. इसकी धुन में उतार-चढ़ाव बहुत अधिक थे. मुझे अपने भाई के गाने गाने में हमेशा डर लगता था. रिकॉर्डिंग के समय वहां मौजूद हर व्यक्ति रो रहा था.'
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