जूनियर अमिताभ बच्चन के नाम से पहचाने जाने वाले चाइल्ड एक्टर मास्टर रवि अब 54 साल के हो गए हैं. वहीं बॉलीवुड का सक्सेसफुल छोड़कर उन्होंने कॉरपोरेट की दुनिया में कदम रख लिया है. मास्टर रवि ने चार साल की उम्र में काम करना शुरू किया था. वहीं अपने पूरे करियर में उन्होंने नौ भाषाओं की 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. इतना ही कहा जाता है कि अपने करियर के पीक पर वह रोजाना 3,500 रुपये तक कमाते थे. मास्टर रवि का नाम पूरा नाम रवि वलेचा है.
मास्टर रवि अब कर रहे हैं ये काम
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री में 14 साल बिताने के बाद रवि ने एक्टिंग छोड़कर एक प्रोफेशनल शेफ के तौर पर ट्रेनिंग ली. वहीं बाद में उन्होंने ताज के साथ काम किया और हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के अलग-अलग हिस्सों में हाथ आजमाया. आज वह एक बड़ी कंपनी के एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के हेड हैं. इतना ही नहीं वह उन लोगों के लिए एक फिल्म इंस्टिट्यूट शुरू करने पर भी काम कर रहे हैं, जो बिना ज्यादा पैसे खर्च किए एक्टिंग सीखना चाहते हैं.

बॉलीवुड में कैसे हुई एंट्री
रवि की बॉलीवुड में एंट्री तब हुई जब उनकी फकीरा के सेट पर शशि कपूर से बात हुई. दरअसल, उनके भाई फिल्मों में काम करते थे, जिसके चलते वह भाई के साथ सेट पर आते थे. इतना ही नहीं वह सेट पर शशि कपूर की कुर्सी पर बैठ गए, जिसके बाद उनकी किस्मत पलटी. मास्टर रवि ने कहा, मेरे भाई फकीरा फिल्म में काम कर रहे थे, जिसके चलते मैं सेट पर गया. सेट पर हर डायरेक्टर और एक्टर के लिए कुर्सी होती थी. मैं 4 साल का था और बात करता था. मैं चेयर पर बैठ गया और तभी शूट दे बाद एक आदमी मेरे पास आया और कहा, आप मेरी कुर्सी पर बैठे हैं. मैंने कहा, मैं बैठा हुआ हूं और नहीं उठूंगा.
रवि ने आगे एक्सप्लोर 1 से आगे कहा, फिर उन्होंने पूछा, 'क्या हम यहां कोई समझौता कर सकते हैं?' मैंने कहा, 'ठीक है, हम ऐसा कर सकते हैं। कैसा रहेगा अगर आप कुर्सी पर बैठें और मैं आपकी गोद में बैठूं?' ये आदमी कोई और नहीं, बल्कि शशि कपूर थे. उन्हें मेरा कॉन्फिडेंस पसंद आया. फिर उन्होंने डायरेक्टर से मुझे इस फिल्म में कास्ट करने के लिए कहा." इसके बाद मास्टर रवि ने शबाना आजमी के 4 साल के बेटे का फकीरा में किरदार निभाया, जिससे उनका 14 साल का करियर शुरू हुआ.
जूनियर अमिताभ का मिला टैग
रवि उस दशक के पॉपुलर चाइल्ड एक्टर में शुमार हो गए. उन्होंने तमिल, तेलुगू और हिंदी सिनेमा में काम किया. वहीं कई फिल्मों में उन्होंने यंग अमिताभ बच्चन का रोल भी निभाया. इसके चलते वह जूनियर अमिताभ बच्चन कहे जाने लगे. 1980 में करियर की ऊंचाई पर उन्हें कथित तौर पर 3000 से 3500 रुपए एक दिन के मिलते थे. वहीं आज के समय में यह 75000 से 90000 तक होगा. उनकी पॉपुलैरिटी ही इकलौता कारण नहीं था कि लोग उन्हें कास्ट करना चाहते थे. बल्कि कहा जाता था कि वह एक टेक में सीन ओके कर देते थे.
मास्टर रवि ने कहा, "मैं इकलौता चाइल्ड स्टार था. जैसे कि कहा जाता है कि राजेश खन्ना पहले सुपरस्टार थे, वैसे ही मास्टर रवि पहले चाइल्ड स्टार थे. मैं एक दिन में कम से कम चार शिफ्ट में काम करता था. उस समय चीजें बहुत महंगी थीं. तब फिल्म रोल का इस्तेमाल होता था, इसलिए बहुत सावधानी बरतनी पड़ती थी. मेरा रिकॉर्ड था कि मुझे कभी रीटेक की जरूरत नहीं पड़ती थी. शायद यही वजह थी कि डायरेक्टर, एक्टर और प्रोड्यूसर मुझे पसंद करते थे. उन्हें बस मुझे एक बार सीन समझाना होता था."
कभी नहीं रिलीज हुई ये फिल्म
मास्टर रवि शुरुआती काम में 'चीता मेरा यार' भी शामिल थी, जिसे के. परवेज़ ने डायरेक्ट किया और विनोद खन्ना, अमजद खान और नीतू सिंह लीड रोल में नजर आए थे. हालांकि यह फिल्म कभी बड़े पर्दे पर रिलीज नहीं हुई, लेकिन रवि ने इसकी शूटिंग का एक किस्सा सुनाते हुए 'द हिलेरी टाइम्स' को बताया, "फिल्ममेकर के. परवेज एक फिल्म डायरेक्ट कर रहे थे, जिसमें विनोद खन्ना, अमजद खान और नीतू सिंह थे. मैं भी उस फिल्म का हिस्सा था, जिसमें मैंने एक राजकुमार का रोल किया था. बच्चे का अपहरण हो जाता है और फिर वह भागकर जंगल चला जाता है. बदकिस्मती से फिल्म रिलीज नहीं हुई. फिल्म में एक सीन था जिसमें एक शेरनी अपने बच्चों को दूध पिला रही थी. बच्चा रेंगते हुए वहां पहुंचता है और उसे भी दूध मिल जाता है. यह एक असली सीन था, जिसमें असली शेरनी और उसके बच्चे थे. मैंने सचमुच शेरनी का दूध पिया है."
मास्टर रवि के एक्टिंग छोड़ने की वजह
सफलता के बावजूद रवि ने बताया कि उन्हें अपने बचपन की कीमत चुकानी पड़ी. रवि ने 'एक्सप्लोर 1' से कहा, "मैंने बहुत कुछ खो दिया. जिंदगी में कुछ पाने के लिए कुछ न कुछ त्यागना ही पड़ता है. मैंने नाम, शोहरत और दौलत कमाई. लेकिन मैंने अपना बचपन खो दिया क्योंकि मैं 4 साल की उम्र से लेकर 18 साल की उम्र तक काम कर रहा था. मैं 8 साल की उम्र में ही 24 साल के व्यक्ति की तरह सोचता था. मैंने अपना बचपन और टीनेज को खो दिया."
रवि ने बताया कि मनमोहन देसाई ने 'गिरफ्तार' (1985) के बाद उन्हें लॉन्च करने की योजना बनाई थी, लेकिन फिल्ममेकर की मौत ने उन योजनाओं को बदल दिया. "यह एक सोच-समझकर लिया गया ब्रेक था. मैंने मनमोहन देसाई की कई फिल्मों में काम किया था, जिनमें से आखिरी 'गिरफ्तार' (1985) थी. वे मुझे बहुत पसंद करते थे. इसलिए इस फिल्म के बाद, उन्होंने मुझसे लाइमलाइट से दूर रहने और अपनी पर्सनैलिटी पर काम करने के लिए कहा और कहा कि वे मुझे लीड स्टार के तौर पर लॉन्च करेंगे. बदकिस्मती से इसी दौरान उनका निधन हो गया और उसके बाद मुझे कभी लॉन्च नहीं किया गया."
अब क्या कर रहे हैं मास्टर रवि
एक्टिंग में लौटने के बजाय की बजाय रवि ने अपने नए करियर की शुरुआत की. उन्होंने कलिनरी आर्ट्स (खाना पकाने की कला) की पढ़ाई के लिए IIH मुंबई में एडमिशन लिया. इसके बाद उन्होंने एक प्रोफेशनल शेफ के तौर पर ट्रेनिंग ली और कुछ सालों तक ताज के साथ काम किया. बाद में उनका अनुभव हॉस्पिटैलिटी के दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ा, जिसमें रूम सर्विस और दूसरे ऑपरेशन शामिल थे. आज वह एक बड़ी कंपनी में एडमिनिस्ट्रेशन का काम संभालते हैं. साथ ही वह एक सस्ता फिल्म इंस्टिट्यूट खोलने के बारे में सोच रहे हैं जहां उभरते हुए एक्टर्स को सही ट्रेनिंग मिल सके.
पायलट बनना चाहते थे
मास्टर रवि ने दीक्षा देव को बताया, "मैं हमेशा से पायलट बनना चाहता था. लेकिन उस समय, आपको साइंस की पढ़ाई करनी पड़ती थी और कोर्स बहुत महंगे होते थे, और हमारी अपनी सीमाएं थीं. अब, मैंने हॉबी फ्लाइंग सीखने के लिए बॉम्बे फ्लाइंग क्लब में अप्लाई किया है. किसी भी चीज के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती."
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