फिल्मों में गानों की एक खास अहमियत होती है. ये गाने यादों से जुड़ते हैं और हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं. ऐसा ही एक गाना है या यूं कहें गजल है जो करीब 44 साल पहले आई थी लेकिन आज भी पसंद की जाती है. ये गजल जावेद अख्तर ने लिखी थी और हिस्सा बनी साल 1982 में आई 'साथ साथ' फिल्म का. इस गजल को फारुख शेख और दीप्ति नवल पर फिल्माया गया. गाने के बोल, इसका वीडियो, म्यूजिक सभी एक से बढ़कर एक हैं लेकिन इससे एक कदम आगे है इसे लिखे जाने की कहानी जो जावेद अख्तर ने खुद बताई थी.
शराब के नशे में लिख दी जादू से भरी ये रोमांटिक गजल
हम जिस गजल की बात कर रहे हैं वो है 'तुमको देखा तो ये खयाल आया'. बताइए आपकी भी फेवरेट है या नहीं. जावेद अख्तर ने बताया कि ये गजल उन्होंने फुल नशे में लिखी थी. जावेद अख्तर ने FICCI कोलकाता के एक प्रोग्राम में बात करते हुए किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा, 'सिलसिला' के बाद से यश चोपड़ा का एक असिस्टेंट डायरेक्टर आया और उनसे अपनी फिल्म के लिए एक गाना लिखने की रिक्वेस्ट की. उसका बजट ज्यादा नहीं था लेकिन मैं उसका गाना लिखने के लिए राजी हो गया.
उन्होंने आगे कहा, उन दिनों मैं बहुत शराब पीता था. वह बेचारा असिस्टेंट डायरेक्टर रो आता और मुझसे गाने के बारे में पूछता. हम रोज रात 2 बजे तक बैठकर बातें करते, शराब पीते और गाना रोज टल जाता. एक दिन जब उसने मुझसे गाने के बारे में पूछा. तब तक रात के करीब 2 बज गए थे. मैं 8 या 9 पेग पी चुका था. मैंने कागज और पेन मांगा और 9 मिनट में गाना तैयार कर उसे दे दिया. इसके बाद जगजीत सिंह ने वह गाना गाया और उसे अमर कर दिया.
जावेद अख्तर ने बताया कि उन्होंने गाना 9 मिनट में इसलिए लिखा था क्योंकि असिस्टेंट डायरेक्टर को अपनी आखिरी ट्रेन पकड़नी थी. वह बार बार घड़ी देख रहाथा. मैंने जल्दी जल्दी गाना लिखा और उसके हवाले कर दिया.
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