Ikkis Movie Review In Hindi: सुपरस्टार धर्मेंद्र आखिरी बार (Dharmendra Last Film) सिल्वर स्क्रीन पर नजर आने वाले हैं. दरअसल, उनकी आखिरी फिल्म इक्कीस 1 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है, जो पहले 25 दिसंबर 2025 को रिलीज होने वाली थी. फिल्म में वह भारतीय सेना अधिकारी एम. एल. क्षेत्रपाल की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं. जबकि लीड रोल में अमिताभ बच्चन के नाती अगस्तय नंदा नजर आ रहे हैं. इसके अलावा अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया भी फिल्म में मौजूद हैं. वहीं जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर, राहुल देव, विवान शाह और एकावली खन्ना अहम किरदार में नजर आ रहे हैं.
इक्कीस की कहानी
इक्कीस की कहानी शुरू होती है एम. एल. क्षेत्रपाल (धर्मेन्द्र) से, जो एक भारतीय सेना अधिकारी हैं. वे पाकिस्तान जाकर अपने कॉलेज की एलुमनी मीट में शामिल होना चाहते हैं और साथ ही अपने पुरखों का घर भी देखना चाहते हैं. पाकिस्तान में उनकी मेहमाननवाज़ी के लिए तैयार हैं निसार (जयदीप अहलावत), जो ख़ुद एक पाकिस्तानी सेना अधिकारी हैं. पाकिस्तान पहुंचने पर निसार, एम. एल. क्षेत्रपाल को अपने घर ठहराते हैं और उन्हें उनके पुरखों का घर दिखाने ले जाते हैं. इस यात्रा में निसार की बेटी भी साथ होती है.
इसी दौरान यह बात सामने आती है कि 1971 की जंग में एम. एल. क्षेत्रपाल का बेटा अरुण क्षेत्रपाल (अगस्त्य नंदा) पाकिस्तान में ही लड़ते हुए शहीद हो गया था. अब एक पिता की इच्छा है कि वह उस जगह को भी देखे जहां उसका बेटा शहीद हुआ. निसार भी एक पिता होने के नाते इस इच्छा को पूरा करना चाहता है. फिल्म की शुरुआत से अंत तक निसार एक गहरे अंतर्द्वंद्व से जूझता रहता है. शुरुआती दृश्यों में ही संकेत मिल जाता है कि वह एम. एल. क्षेत्रपाल को कुछ बताना चाहता है. लेकिन क्या? यह जानने के लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी.
इक्कीस की खामियां-
1. यह एक भावनात्मक फ़िल्म है और आज के एक्शन व लार्जर दैन लाइफ़ सिनेमा के दौर में दर्शकों को इससे कुछ अलग तरह की उम्मीदें हो सकती हैं.
2. पटकथा और स्क्रिप्ट में थोड़ी और स्पष्टता की ज़रूरत थी. कि यह फिल्म एक वीर सैनिक की कहानी है या दो देशों के बीच की वह सच्चाई दिखाती है कि मरने वाला सैनिक अंततः किसी न किसी का बेटा ही होता है.
3. एक शहीद की कुर्बानी निस्संदेह बहुत बड़ी होती है, लेकिन उसे परदे पर उतारने के लिए मज़बूत लेखन और प्रभावी प्रस्तुति का बेहतर तालमेल चाहिए था, जो कुछ जगहों पर चूकता हुआ नजर आता है.
इक्कीस की खूबियां
1. दिग्गज अभिनेता धर्मेन्द्र के निधन के बाद यह उनकी पहली फ़िल्म है. दर्शक अपने चहेते कलाकार को एक बार फिर परदे पर जीवंत किरदार निभाते देख पाएंगे, और यह उनके लिए भावुक कर देने वाला अनुभव होगा.
2. पाकिस्तान को मात देने और भारतीय सेना की बहादुरी की कहानियां दर्शकों को हमेशा पसंद आती हैं और गर्व का एहसास कराती हैं. यहां भी भारतीय सेना और उसके सैनिकों के जज़्बे को प्रभावी ढंग से दिखाया गया है.
3. आज के लार्जर दैन लाइफ़ और पाकिस्तान-बैशिंग के दौर में निर्देशक श्रीराम राघवन और निर्माता मैडॉक फ़िल्म्स का इंसानियत की कहानी कहने का साहस क़ाबिल-ए-तारीफ है.
4. अगस्त्य नंदा का अभिनय संयमित और परिपक्व है. वे एक सधे हुए कलाकार की छवि पेश करते हैं. कई बार उनकी शक्ल-सूरत अपने मामा अभिषेक बच्चन की याद दिलाती है. वहीं, अक्षय कुमार की भांजी सिमर भाटिया ने भी ठीक-ठाक काम किया है. उनका रोल भले ही सीमित हो, लेकिन वे अपने किरदार के साथ न्याय करती हैं.
5. जयदीप अहलावत एक बार फिर साबित करते हैं कि वे क्यों एक बेहतरीन अभिनेता माने जाते हैं. उनके हाव-भाव, उतार-चढ़ाव और संवाद अदायगी बिना किसी ओवर-द-टॉप अंदाज़ के सीधे दिल में उतरती है. आमतौर पर पाकिस्तान का नाम आते ही दर्शकों का नज़रिया नफ़रत की ओर चला जाता है, लेकिन यह कहानी, निर्देशन और जयदीप का अभिनय मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं कि उनके किरदार से नफरत नहीं होती. यही इस फ़िल्म की सबसे बड़ी जीत है.
6. कुल मिलाकर श्रीराम राघवन ने निर्देशन में संजीदगी और संतुलन बनाए रखा है. फ़िल्म का संगीत भी माहौल के अनुरूप और प्रभावी है.
कलाकार: धर्मेन्द्र, अगस्त्य नंदा, सिमत भाटिया, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर, राहुल देव, विवान शाह और एकावली खन्ना.
रेटिंग: स्टार 3
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