हर कहानी आसान जवाब देने के लिए नहीं होती. कुछ कहानियाँ हमें असहज करने, उन बातों पर सवाल उठाने के लिए होती हैं जिन्हें हम सहज रूप से स्वीकार कर लेते हैं और उन सच्चाइयों का सामना करने के लिए होती हैं, जिनसे हम अक्सर नजरें चुराना चाहते हैं. नवजोत गुलाटी के निर्देशन में और दिनेश विजान व अमर कौशिक द्वारा निर्मित, मैडॉक फिल्म्स की प्रस्तुति - 'पूजा मेरी जान' 2 अक्टूबर 2026 को हिंदी Zee 5 पर प्रीमियर होगी. यह गहन ड्रामा पूजा की कहानी को आगे बढ़ाता है, जहाँ परेशान करने वाली घटनाओं की एक सीरीज उसे अस्वीकृति, जुनून, सहमति और आखिरकार जो हुआ उसकी सच्चाई से जुड़े सवालों का सामना करने के लिए मजबूर करती है.
पूजा मेरी जान किस बारे में है?
कहानी के केंद्र में पूजा है, एक युवा महिला, जो अपने करीबी दोस्त के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा देती है. इसके बाद घटनाओं की एक ऐसी श्रृंखला शुरू होती है, जो धीरे-धीरे कई परेशान करने वाले सवाल खड़े करती है. कहानी आगे बढ़ने के साथ यह सवाल सामने आता है कि आखिर वास्तव में क्या हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और क्या पूजा इन परिस्थितियों की शिकार है या फिर उसके आसपास हो रही घटनाओं से उसका कोई गहरा संबंध है. हुमा कुरैशी ने सना नाम की वकील की भूमिका निभाई है, जो इस मामले से गहराई से जुड़ जाती है. वह पूजा से जुड़ी परिस्थितियों को समझने और अलग- अलग बयानों के पीछे छिपी सच्चाई का पता लगाने की कोशिश करती है. जैसे-जैसे सच्चाई सामने आने में देर होती है, ‘पूजा मेरी जान' दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि मासूमियत कहाँ खत्म होती है और जिम्मेदारी कहाँ से शुरू होती है. कहानी धीरे-धीरे अस्वीकृति, जुनून और समाज के फैसले से जुड़े कई गंभीर और जटिल पहलुओं को सामने लाती है.
पूजा मेरी जान क्यों खास है:
- अलग-अलग नजरियों के जरिए रहस्य को धीरे-धीरे उजागर करती है
- मृणाल ठाकुर और हुमा कुरैशी को दमदार भूमिकाओं में एक साथ पेश करती है
- यह दिखाती है कि लोगों की धारणा कितनी जल्दी सच को एक अलग रूप दे सकती है
- जुनून, व्यक्तिगत सीमाओं और समाज के फैसले जैसे विषयों की गहराई से पड़ताल करती है
- एक ऐसी कहानी जो ऐसे सवाल उठाती है जिनका कोई आसान जवाब नहीं है
अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने कहा: "शुरुआत से ही मैं इस भूमिका की ओर आकर्षित हुई, क्योंकि मुझे लगा कि यह मुझे एक अभिनेत्री के रूप में अपनी प्रतिभा के कई पहलुओं को तलाशने और कुछ अलग करने का मौका देगी. पूजा एक बहुत ही गहराई वाला किरदार है और फिल्म के साथ-साथ उसकी कहानी ने मुझे इसलिए आकर्षित किया, क्योंकि उसके आसपास होने वाली घटनाएँ बेहद जटिल हैं. इस भूमिका में मुझे कई तरह की भावनाओं को निभाना था और साथ ही उन जवाबों को जानबूझकर छिपाकर रखना था, जिन्हें दर्शकों को खुद तलाशना है. कहानी आपको बार-बार यह सोचने पर मजबूर करती है कि आप जो देख रहे हैं, उस पर कितना भरोसा करें, आप किस बात को सच मानें और हमारी सोच किस तरह किसी व्यक्ति या परिस्थिति के बारे में हमारे फैसले को जल्दी प्रभावित कर सकती है. यह मेरे लिए एक गहरा और चुनौतीपूर्ण अनुभव था, लेकिन साथ ही बेहद संतोषजनक भी रहा. मैं दर्शकों के साथ फिल्म की कहानी साझा करने, पूजा के सफर को समझने और रिश्तों, अस्वीकृति, सहमति, सोच और आखिरकार समाज के तौर पर हमारे द्वारा किए जाने वाले फैसलों से जुड़े सवालों पर विचार करने को लेकर उत्साहित हूँ."
अभिनेत्री हुमा कुरैशी ने कहा: "पूजा मेरी जान को दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि यह कहानी की मुख्य घटना को सिर्फ एक नजरिए से नहीं देखती. सना कहानी में कानूनी नजरिया लेकर आती है. वह यह समझने की कोशिश करती है कि आखिर क्या हुआ और पूजा से जुड़ी अलग-अलग बातों के बीच की सच्चाई को सामने लाने की कोशिश करती है. फिल्म यह दिखाती है कि हमारी सोच किस तरह लोगों और घटनाओं को समझने के हमारे नजरिए को प्रभावित कर सकती है और यह भी कि अपनी धारणाओं को सच्चाई से अलग करना कितना मुश्किल हो सकता है. ऐसी कहानी का हिस्सा बनना मेरे लिए एक खास अनुभव था, जो भावनात्मक रूप से जोड़ती है और साथ ही सहमति, जिम्मेदारी, न्याय और समाज के फैसले से जुड़े कई असहज सवाल भी सामने रखती है."
अभिनेता विक्रम सिंह चौहान ने कहा: "पूजा मेरी जान ऐसी कहानी है, जो लंबे समय तक आपके साथ रहती है, क्योंकि यह आपको सोचने पर मजबूर करती है कि हम किसी परिस्थिति या उसमें शामिल लोगों को वास्तव में कितना जानते हैं. मुझे इस फिल्म की ओर सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली बात यह थी कि यह रिश्तों, अस्वीकृति और सीमाओं के टूटने पर पैदा होने वाली भावनाओं को जिस तरह से सामने लाती है. कहानी लगातार आपका नजरिया बदलती है और आपको यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या सच है और क्या हमारी सोच से प्रभावित है. ऐसी फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण अनुभव था, जो दर्शकों को आसानी से जवाब नहीं देती, बल्कि उन्हें गहराई से सोचने, अपनी धारणाओं पर सवाल उठाने और सामने आने वाली घटनाओं को अपने तरीके से समझने के लिए प्रेरित करती है."
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