जब लोग स्क्रीन पर गुत्थी की अजीबोगरीब अदाएं, डॉ.मशहूर गुलाटी का मजेदार अंदाज और रिंकू देवी जैसे किरदारों को देखते हैं, तो उनके लिए हंसी रोक पाना मुश्किल हो जाता है. सुनील ग्रोवर ने अपने हर किरदार में ऐसी जान डाली कि वह दर्शकों की यादों का हिस्सा बन गई. आज जब वह स्टेज पर आते हैं तो लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है लेकिन इस हंसी के पीछे एक लंबा संघर्ष छिपा है. एक ऐसा दौर भी था जब उन्हें एक शो में काम करने के बाद रिप्लेस कर दिया गया था और वह खुद पर शक करने लगे थे. उन्होंने आगे चलकर अपनी मेहनत से कॉमेडी की दुनिया में खास पहचान बनाई.
सुनील ग्रोवर का जन्म 3 अगस्त 1977 को हरियाणा के सिरसा जिले के मंडी डबवाली में हुआ था. बचपन से ही उन्हें एक्टिंग, मिमिक्री और लोगों को हंसाने में रुचि थी. स्कूल के दिनों में ही उनके अंदर के कलाकार को पहचान मिलने लगी थी. एक नाटक प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर चीफ गेस्ट ने उनकी तारीफ की और कहा कि उनका हुनर बाकी बच्चों से अलग है.
जसपाल भट्टी ने दिया पहला मौका
सुनील ने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से थिएटर में मास्टर डिग्री हासिल की. कॉलेज के समय ही मशहूर कॉमेडियन और व्यंग्य कलाकार जसपाल भट्टी की नजर उन पर पड़ी. जसपाल भट्टी ने उनके टैलेंट को पहचाना और उन्हें काम करने का मौका दिया. साल 1995 में सुनील ने जसपाल भट्टी के शो 'फुल टेंशन' से टीवी की दुनिया में कदम रखा.

शुरुआती दिनों में 500 रुपये में किया काम
अभिनेता बनने का सपना लेकर सुनील मुंबई पहुंचे लेकिन यहां का सफर आसान नहीं था. शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे काम मिले और कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा. उन्होंने बताया कि मुंबई में शुरुआती दिनों में उनकी कमाई करीब 500 रुपए महीने तक थी. वह अपनी सेविंग्स और परिवार से मिली मदद के सहारे अपने सपनों को पूरा करने में लगे रहे.
तीन दिन की शूटिंग के बाद बिना बताए निकाला
संघर्ष के दिनों का एक किस्सा सुनील ने खुद साझा किया था. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि एक शो के लिए तीन दिन शूटिंग करने के बाद उन्हें अचानक रिप्लेस कर दिया गया. सबसे ज्यादा दुख इस बात का था कि उन्हें इसकी जानकारी भी सीधे नहीं दी गई. इस घटना के बाद वह काफी परेशान हो गए थे और कुछ समय के लिए उन्हें लगा कि शायद वह इस काम के लिए सही नहीं हैं लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से कोशिश शुरू की.

रेडियो में भी किया काम और फिल्मों में भी जारी रहा संघर्ष
सुनील ने धीरे-धीरे टीवी, रेडियो और फिल्मों में काम करना शुरू किया. वह रेडियो पर 'हंसी के फुवारे' जैसे कार्यक्रमों से भी जुड़े, जहां उनकी आवाज को लोगों ने काफी पसंद किया. फिल्मों में उनकी शुरुआत साल 1998 में अजय देवगन की फिल्म 'प्यार तो होना ही था' से हुई. इसके बाद वह 'द लीजेंड ऑफ भगत सिंह', 'मैं हूं ना', 'गजनी', 'गब्बर इज बैक', 'बागी', 'भारत', 'गुडबाय' और 'जवान' जैसी फिल्मों में नजर आए.
हालांकि फिल्मों में उन्हें ज्यादातर सहायक भूमिकाएं मिलीं लेकिन उन्होंने हर किरदार को अपनी एक्टिंग से खास बना दिया. 'गजनी' में संपत, 'भारत' में विलायती खान और 'जवान' में ईरानी जैसे किरदारों को दर्शकों ने पसंद किया.
कपिल शर्मा के साथ ने दी शौहरत
साल 2013 में आई 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' ने सुनील ग्रोवर की जिंदगी बदल दी. इसमें निभाया गया गुत्थी का किरदार इतना लोकप्रिय हुआ कि लोग उन्हें उनके असली नाम से ज्यादा इस किरदार से पहचानने लगे. इसके बाद उन्होंने 'द कपिल शर्मा शो' में डॉ. मशहूर गुलाटी और रिंकू देवी जैसे किरदार निभाए, जो आज भी लोगों को याद हैं.

Photo Credit: Sunil grover
साल 2017 में कपिल शर्मा और सुनील ग्रोवर के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद सुनील ने शो छोड़ दिया. इस घटना के बाद दोनों लंबे समय तक साथ नजर नहीं आए. उन्होंने बाद में बताया कि शुरुआत में इस पूरे मामले की खबरों से वह परेशान हो गए थे, लेकिन समय के साथ उन्होंने इसे पीछे छोड़ दिया. साल 2024 में दोनों ने 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' के जरिए फिर साथ काम किया.
कॉमेडी ही नहीं सीरियस किरदारों में भी अव्वल हैं सुनील ग्रोवर
कॉमेडी के अलावा सुनील ने गंभीर भूमिकाओं में भी अपनी पहचान बनाई. 'तांडव', 'सनफ्लावर' और 'यूनाइटेड कच्चे' जैसी वेब सीरीज में उन्होंने अलग तरह के किरदार निभाए. उनकी एक्टिंग को दर्शकों ने खूब सराहा. सुनील ग्रोवर को उनके काम के लिए कई अवॉर्ड्स मिले हैं. साल 2018 में उन्हें आईटीए अवॉर्ड में स्पेशल मेंशन कॉमिक आइकॉन सम्मान दिया गया. साल 2022 में उन्हें हार्ट अटैक आया और उनकी बायपास सर्जरी हुई लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और दोबारा काम पर लौटे.
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