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हिंदी सिनेमा के नारद मुनी का बेटा बनना चाहता था हीरो, इसी ख्वहिश के चलते फ्लॉप हुआ करियर, विलेन बनकर की वापसी तो चमकी किस्मत, 300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम

आज हम आपको हिंदी सिनेमा के इस मशहूर विलेन, खड़ूस लाला और हीरो-हीरोइन का खून सुखाने वाले एक्टर के बेटे से मिलवाने जा रहे हैं. जिन्होंने खुद भी 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया.

हिंदी सिनेमा के नारद मुनी का बेटा बनना चाहता था हीरो, इसी ख्वहिश के चलते फ्लॉप हुआ करियर, विलेन बनकर की वापसी तो चमकी किस्मत, 300 से ज्यादा फिल्मों में किया काम
जीवन का असली नाम ओंकार नाथ धर था, किरण कुमार उनके सुपुत्र हैं
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नई दिल्ली:

किरण कुमार फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसे नायाब अभिनेता हैं जो किसी भी तरह के किरदार को पर्दे पर शानदार तरीके से निभाते हैं. 20 अक्टूबर 1953 को जन्मे किरण कुमार अभी भी फिल्म इंडस्ट्री में एक्टिव हैं. एक वक्त में किरण कुमार विलेन की छवि के लिए मशहूर थे लेकिन उसके बाद उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में भी काम किया जिसमें उन्होंने संजीदा किरदार निभाया. उनकी एक्टिंग पर्दे पर काफी शानदार नजर आती है. किरण कुमार का जन्म 1953 में मुंबई में हुआ था. किरण कुमार एक हिंदू कश्मीरी पंडित परिवार से आते हैं, उनके परदादा एक रईस थे जिन्होंने कश्मीर की रियासत की संप्रभुता के तहत गिलगित एजेंसी पर वजीर-ए-वजारत (मुख्यमंत्री) के रूप में शासन किया. पिता ओंकारनाथ धर हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता जीवन थे. जीवन ने अपने करियर में 49 फिल्मों में नारद मुनी का करिदार किया था. किरण कुमार ने इंदौर के एक बोर्डिंग स्कूल, डेली कॉलेज में पढ़ाई की. मुंबई के बांद्रा स्थित आरडी नेशनल कॉलेज से स्नातक करने के बाद पुणे स्थित फिल्म और टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) में शामिल हो गए.

किरण कुमार ने 1960 में फिल्म "लव इन शिमला" में एक छोटी भूमिका निभाकर अपने अभिनय करियर की शुरुआत की. हालांकि, मुख्य अभिनेता के रूप में उनकी पहली फिल्म 1974 में "आजाद मोहब्बत" थी. किरण कुमार ने टेलीविजन सीरीज में से एक सिनेविस्टास (सुनील मेहता, प्रेम किशन) के साथ भी शुरुआत की थी. तब से उन्होंने जिंदगी, घुटन, साहिल, मंजिल, गृहस्ती और कथा सागर जैसी सीरीज में भारतीय टेलीविजन उद्योग में एक स्टार के रूप में अपनी पहचान बनाई. उन्होंने हिंदी, भोजपुरी और गुजराती टेलीविजन और फिल्म निर्माण में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है.

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"जंगल में मंगल" जैसी फिल्मों की रिलीज के बाद किरण कुमार के करियर में गिरावट आई और उन्होंने इस मंदी के बाद गुजराती फिल्मों में काम करना चुना. उन्होंने गुजराती फिल्म उद्योग में जल्दी ही प्रसिद्धि हासिल कर ली और उन्हें "गुजराती सिनेमा का बच्चन" कहा जाने लगा. राकेश रोशन अपनी फिल्म "खुदगर्ज" के साथ उन्हें हिंदी सिनेमा में वापस लाए, जिसके बाद उन्होंने "तेजाब" और "खुदा गवाह" जैसी फिल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं निभाईं. नकारात्मक भूमिकाओं में उनके अभिनय ने उन्हें कई पुरस्कार दिलाए.

किरण कुमार मुख्य रूप से सपोर्टिंग रोल्स और विलेन के किरदारों के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया, जैसे सोनम लंदन, राम लखन, जुबां, हीरो नं. 1, इशक और चांदनी. रोमांटिक, कॉमिक और विलेन के रोल्स में उनके अभिनय को दर्शकों और आलोचकों ने सराहा. किरण कुमार की मुख्य फिल्मों में दरार, खुदगर्ज, तेजाब, काला बाजार, आज का अर्जुन, थानेदार, पत्थर के फूल, खून का कर्ज, हिना, बोल राधा बोल, कुदरत, आग ही आग, धड़कन, ये है जलवा, एलओसी कारगिल और बॉबी जासूस सहित अन्य हैं.

किरण कुमार की शादी पूर्व गुजराती अभिनेत्री, स्टाइलिस्ट और सलाहकार सुषमा वर्मा से हुई है. इस दंपति के दो बेटे हैं-अभिनेता शौर्य कुमार और विकास कुमार. उनकी एक बेटी सृष्टि कुमार भी है.

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