गानों को रीक्रिएट करना आज के दौर की फिल्मों में बहुत देखा जाता है. कभी किसी हिट पंजाबी गाने को फिल्म में फिट कर दिया जाता है तो कभी किसी पुराने क्लासिक को नया तड़का लगाकर पेश कर दिया जाता है. आप सोच रहे होंगे कि आज के जमाने का ये एक नया ट्रेंड है. लेकिन ये कोई नया ट्रेंड नहीं बल्कि सालों पुराना जांचा-परखा फॉर्मुला है. इसी फॉर्मुले की वजह से एक गाने को दो बार रीक्रिएट किया गया था.
85 साल पुराना गाना दो बार हुआ रीक्रिएट
आप सोच रहे होंगे कि 85 साल पहले ऐसा कौनसा नगीना बना था जिसे दो बार रीक्रिएट किया गया. ये गाना था साल 1941 में आई फिल्म हिम्मत का और इसके बोल थे 'इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा'. हिम्मत फिल्म में इस गाने को शमशाद बेगम ने आवाज दी थी.
हिम्मत की रिलीज के ठीक दो साल बाद साल 1943 में आई आबरू. सितारा और याकूब के लीड रोल वाली इस फिल्म में ये गाना दोबारा लिया गया. इस बार इसे गाने की जिम्मेदारी संभाली याकूब ने. हालांकि याकूब इस गाने को वो क्लासिक मुकाम नहीं दिला पाए जिसका ये हकदार था. ये हक मिला 29 साल बाद जब 1972 में आई पाकीजा.
राजकुमार और मीना कुमारी की लीड जोड़ी. राजकुमार का अंदाज और मीना कुमारी की खूबसूरत अदाएं इस फिल्म को एवरग्रीन बनाती हैं उस पर चार चांद लगाते हैं फिल्म के एक से बढ़कर एक गाने. चलते चलते यूं ही कोई, मौसम है आशिकाना, चलो दिलदार चलो, थाड़े रहियो और बांके यार और इन्हीं लोगों ने...वही गाना जिसकी इस फिल्म ने किस्मत बदल दी. इस करिश्मे के पीछे सबसे बड़ा हाथ था लता मंगेशकर का. लता जी ने इसे जो अंदाज दिया और फिर जिस अदा से मीना कुमारी ने उसे निभाया वो स्कीन पर जादू कर गया. इस गाने को रिलीज हुए 54 साल हो चुके हैं लेकिन ये आज भी उतना ही नया है और केवल पुरानी फिल्मों के दीवानों के ही नहीं बल्कि नए जमाने के लोगों की भी पसंद बन रहा है.
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