70s के गानों के तो कहने ही क्या. हिंदी सिनेमा में हर मौके के लिए गाने हैं, चाहे वो रामलीला हो, दशहरा या फिर दिवाली. इस तरह हर त्योहार को खास बनाने के लिए दिल छू लेने वाले गाने मौजूद हैं जो सुनने में तो अच्छे लगते ही हैं, इनका फिल्मांकन भी कमाल का होता है. ऐसा ही एक गाना 1974 की फिल्म 'रेशम की डोरी' का है जो मनोरंजन के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपरा की झलक भी दिखाता है. गाने के बोल हैं 'बोलो सियावर रामचंद्र की जय'. मन्ना डे की आवाज में सजे इस गीत में भगवान राम की कथा को संगीतमय अंदाज में पेश किया गया है. राम जन्म से रावण वध तक की घटनाओं का वर्णन करने वाला यह हिंदी गाना आज भी पुराने हिंदी फिल्मी संगीत और रामकथा के प्रेमियों के लिए खास है. यही नहीं, दशहरा का इसमें कमाल का फिल्मांकन है.
5 मिनट 22 सेकंड में रामकथा
'बोलो सियावर रामचंद्र की जय' में रामायण की घटनाओं को गीत के माध्यम से सुनाने और रामलीला के जरिये दिखाने का प्रयास किया गया है. भगवान राम के जन्म, उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, माता सीता से विवाह, वनवास और लंका में रावण के साथ युद्ध जैसी घटनाएं रामकथा की प्रमुख कड़ियां हैं. इस गाने को मन्ना डे ने गाया और शंकर जयकिशन का म्यूजिक था. मन्ना डे हिंदी सिनेमा के उन गायकों में शामिल रहे, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को लोकप्रिय फिल्मी संगीत में भी प्रभावशाली ढंग से पेश किया. उनकी आवाज में गंभीरता, सुरों पर नियंत्रण और शब्दों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने की खास क्षमता थी. इस गाने के बोल नीरज ने लिखे हैं, जिनके लिरिक्स हमेशा से हटकर और दिल छूने वाले रहे हैं. आप खुद ही नजर डालें.
बोलो सियावर रामचंद्र की जय
है जग में जिसका नाम अमर है उस रघुबर के गुण गाता हूं
इंसानों में भगवान था जो उस राम की कथा सुनाता हूं
इंसानों में भगवान था जो उस राम की कथा सुनाता हूं
दशरथ के घर में जन्म लिया
तोड़ा शिव धनुष स्वयंवर में
राज तिलक का दिन आया बनवास मिला अपने घर में
तब पंचवटी में एक रोज सोने का एक हिरण आया
जब राम चले उसके पीछे रावण सीता को हर लाया
जब राम चले उसके पीछे रावण सीता को हर लाया
सीता सत्य जपत राम सत्य का नाम
भीतर बाहर सब जगह बसे हैं सीता राम
बोलो सियावर रामचंद्र की जय
सीता दर्शन पाने के लिए मंदिर मंदिर के मन में भटके
सबको भटकने वाला वही सीता के बिना वन वन भटके
राजा को बनाया बनवासी देखो ये ईश्वर की माया
जिसको छल ना सका कोई भी सोने के हिरण ने भरमाया
जिसको छल न सका कोई भी सोने के हिरण ने भरमाया
रघुवर का जब दुख बढ़ा चले वीर हनुमान
जा पहुचे लंका पूरी करते प्रभु का ध्यान
बोल बजरंग बली की जय
फूलो की एक वाटिका में वानर ने देखा सीता को
जाकर प्रभु का संदेश दिया जग जननी कुंज पुनिता को
तब मेघनाथ ने जा पकड़ा और पूंछ में आग लगा डाली
उस अग्नि से बजरंगी ने सब लंका रख बना डाली
उस अग्नि से बजरंगी ने सब लंका रख बाना डाली
राम नाम है पुण्य का रावण पाप का नाम
दोनों के संग्राम का अब देखो परिणाम
बोलो सियावर रामचंद्र की जय
जब तीर चले सच्चाई के आखिर तो बुराई हार गई
और राम की सेना नाव बिना पल भर में सागर पर गई
दस शीश थे जिसके सर पे और मौत रही जिसके घर बन दासी
एक तीर से मार गया कोई सीधा सच्चा बनवासी
एक तीर से मार गया कोई सीधा सच्चा बनवासी
धर्मेंद्र की फिल्म 'रेशम की डोरी'
'बोलो सियावर रामचंद्र की जय' गाने में धर्मेंद्र और सायरा बानो प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए थे. उस दौर में हिंदी सिनेमा में पारिवारिक रिश्तों, भावनाओं और सामाजिक मूल्यों पर आधारित कहानियों का खास स्थान था. 'रेशम की डोरी' भी इसी परंपरा की फिल्म थी. फिल्म 21 अगस्त 1974 को रिलीज हुई थी. इसका निर्देशन आत्मा राम ने किया था. ये फिल्म भाई-बहन के रिश्ते को लेकर बना गई कहानी थी, जो खूब पसंद की गई थी. आज भी इसके गाने खूब पसंद किए जाते हैं.
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