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हिंदी फिल्म में उर्दू गाना, 61 साल पहले आया और आज तक नहीं हुआ पुराना, बीवी की तारीफ में पढ़े थे कसीदे, उसी रात आ गया था भूचाल

हम जिस फिल्म की बात कर रहे है वह साल 1965 में आई थी. इस फिल्म की कहानी में इतने गजब के ट्विस्ट हैं देखने वाले का दिमाग की चकरा जाए. फिल्म के गाने भी खासे पसंद किए गए थे खासतौर पर वो गाना जिसके बारे में हम बताने जा रहे हैं.

हिंदी फिल्म में उर्दू गाना, 61 साल पहले आया और आज तक नहीं हुआ पुराना, बीवी की तारीफ में पढ़े थे कसीदे, उसी रात आ गया था भूचाल
बलराज साहनी और अचला सचदेव पर फिल्माया गया था ये गाना
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नई दिल्ली:

शादी पार्टी में जब भी कपल डांस की बात होती है तो ये गाना जरूर बजता है. इसके अलावा अगर यूं भी पत्नी की तारीफ करने का मूड बने तो दिमाग में झट से यही गाना आता है. आज 2026 तक म्यूजिक लवर्स के जुबान पर चढ़ा रहने वाला ये गाना 61 साल पुराना है. इस गाने के बारे में एक और कमाल की बात ये है कि ये उर्दू में बना था. जी हां सुनकर आपको लगेगा कि अरे ये एक पॉपुलर हिंदी गाना है लेकिन उर्दू भाषा में लिखा गाना है. 

ये गाना जिसमें पति अपनी पत्नी के गुणगान करने के लिए पूरा काफिया पढ़ देता है वो है 'ए मेरी जोहरा जबीं'. ये गाना आपने कई बार सुना होगा और इसके कई कवर वर्जन भी सुने होंगे. ये गाना साल 1965 में आई फिल्म वक्त में था. इस गाने में लाला अमरनाथ यानी कि बलराज साहनी अपनी पत्नी लक्ष्मी यानी अचला सचदेव की तारीफ में ये गाना गाते हैं. वहीं अगर असली गायक की बात करूं तो इसे मन्ना डे ने अपनी खूबसूरत आवाज से यूं सजाया कि अमर कर दिया. इस गाने के बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. वक्त फिल्म के इस गाने को दिल वाले दुल्हनिया में अमरीश पुरी ने भी फरीदा जलाल के लिए गाया था.

वक्त की कहानी

लाला केदारनाथ ( बलराज साहनी ) के तीन बेटे हैं. तीनों का जन्मदिन एक ही दिन पड़ता है. इसी जन्मदिन के जश्न पर एक मशहूर ज्योतिषी उनसे मिलने आता है और लाला केदारनाथ को सलाह देता है कि वे अपनी हैसियत पर गर्व न करें और भविष्य को लेकर बहुत ज्यादा खुश न हों, क्योंकि वक्त का कोई भरोसा नहीं होता. लाला केदारनाथ इस भविष्यवाणी को अनसुना कर देते हैं. उसी रात, जब वे अपनी पत्नी लक्ष्मी ( अचला सचदेव ) को भविष्य की अपनी प्लानिंग के बारे में बता रहे होते हैं, तभी अचानक भूकंप आता है और पूरा शहर तबाह हो जाता है. जब लाला केदारनाथ को होश आता है, तो उनका घर पूरी तरह बर्बाद हो चुका होता है और उनका परिवार बिछड़ चुका होता है.

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सबसे बड़ा बेटा राजू अनाथालय में पहुंच जाता है, जबकि मंझला बेटा रवि सड़क पर एक अमीर दंपति को मिलता है जो उसे अपने घर ले जाकर अपने बेटे की तरह पालते हैं. सबसे छोटा बेटा विजय, जो अभी बच्चा है, अपनी मां के साथ है. परिवार के बाकी सदस्यों का पता न चलने पर लक्ष्मी और विजय गरीबी में जीवन बिताते हैं. फिर किस तरह तीनों बेटे अलग अलग राह पर निकलते हैं और किस तरह साथ आते हैं ये इस कहानी को बेहद दिलचस्प बना देते हैं. 

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