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54 साल पुराना वो गाना जिसमें हिप्पियों के चंगुल में फंसी बहन को बचाने गया था भाई, किशोर कुमार के गीत के बिना अधूरा है रक्षा बंधन

1971 का ये गाना आज भी भाई-बहन के रिश्ते की पहचान है. लेकिन इसकी सबसे दिलचस्प बात शायद कम लोग जानते हैं, जहां एक ही किरदार के लिए लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज चुनी गई थी.

54 साल पुराना वो गाना जिसमें हिप्पियों के चंगुल में फंसी बहन को बचाने गया था भाई, किशोर कुमार के गीत के बिना अधूरा है रक्षा बंधन
'हरे रामा हरे कृष्णा' में जीनत अमान और देव आनंद लीड रोल में थे.
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रक्षाबंधन आते ही भाई-बहन के रिश्ते की याद दिलाने वाले गाने फिर से सुनाई देने लगते हैं. आजकल सोशल मीडिया का जमाना है, ऐसे में पुराने गाने भी नए अंदाज में वायरल होकर लोगों का ध्यान खींच लेते हैं. बॉलीवुड में कई गानें ऐसे हैं, जो दशकों बाद भी अपनी मिठास और भावनाओं से दिल जीतते हैं. लेकिन 1971 की एक फिल्म का एक ऐसा गाना है, जो लगभग भाई-बहन के प्यार का एंथम बन चुका है. यह गाना जितना हिट है, उससे भी ज्यादा दिलचस्प है इसके पीछे छिपा एक किस्सा. पर्दे पर देव आनंद और जीनत अमान ने भाई-बहन का रिश्ता निभाया था. खास बात ये कि एक ही किरदार के लिए दो दिग्गज सिंगर्स की आवाज इस्तेमाल हुई थी. आखिर क्या था इस गाने का पूरा किस्सा?

'फूलों का तारों का सबका कहना है' 

यह गाना साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का है. फिल्म में देव आनंद और जीनत अमान ने अहम किरदार निभाए थे. इसी फिल्म का मशहूर गाना 'फूलों का तारों का सबका कहना है' आज भी भाई-बहन के रिश्ते पर फिल्माए गए सबसे यादगार गानों में गिना जाता है. गाने में भाई-बहन के बीच बचपन से लेकर बड़े होने तक के रिश्ते को भावनात्मक अंदाज में दिखाया गया है. गाने के बोल भाई और बहन के बीच मौजूद प्यार, अपनेपन और भावनाओं को बखूबी सामने लाते हैं. इस गाने की खासियत सिर्फ इसके बोल या म्यूजिक नहीं था, बल्कि इसकी आवाज भी थी. दरअस फिल्म में इस गाने में किरदार को दो बार ये गाना गाना था इसलिए ये तरकीब निकाली गई और एक ही किरदार की आवाज के लिए दो दिग्गज गायकों का इस्तेमाल किया गया.

लता मंगेशकर और किशोर कुमार ने दी एक ही किरदार को आवाज

'फूलों का तारों का' के बचपन वाले वर्जन में लड़के के किरदार की आवाज लता मंगेशकर ने दी थी. वहीं फिल्म में जब किरदार बड़ा होता है, तो उसकी आवाज किशोर कुमार की सुनाई देती है. यानी एक ही किरदार की जिंदगी के अलग-अलग दौर को दिखाने के लिए दो अलग आवाजों का इस्तेमाल किया गया.  गाने का म्यूजिक आरडी बर्मन ने दिया था, जबकि इसके बोल मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे. दोनों की शानदार जोड़ी ने गीत को ऐसी गहराई दी, जिसकी वजह से यह दशकों बाद भी लोगों की जुबान पर है. रक्षाबंधन के मौके पर जब भाई-बहन के रिश्ते से जुड़े पुराने गीत दोबारा सुनाई देते हैं, तो 'फूलों का तारों का' आज भी सबसे पहले याद आने वाले गानों में शामिल रहता है. देव आनंद और जीनत अमान पर फिल्माया गया यह गीत सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट रिश्ते की पहचान बन चुका है.

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