70 और 80 के दशक में हिंदी सिनेमा का वो दौर था जिसने हर एक मूड के लिए एवरग्रीन गाने दिए. उस दौर के ये गाने वो गोल्डन मेलोडी हैं जो जब आज रेडियो पर बजते हैं शाम सुहानी कर जाते हैं. आज हम आपको उस दौर के एक इसी तरह के गाने से रूबरू करवाने जा रहे हैं. इस गाने के भाव कुछ ऐसे हैं कि आप आज भी सुनें तो रिलेट कर जाएंगे. इस गाने में प्रेमिका अपने प्रेमी से विनती करती है कि वह परदेस जाकर उसे भूल ना जाए. इस तरह इस गाने में बलिदान, विरह, समर्पण और सच्चे प्यार का भाव देखने को मिलता है.
रीना रॉय ने जीतेंद्रे से कहा था 'परदेस जाके परदेसिया...'
हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वह 1983 में आई फिल्म अर्पण में था. 'परदेस जाके परदेसिया' गाने में रीना रॉय अपने हीरो जीतेंद्र को परदेस जाने से पहले अपने दिल हाल सुनाती नजर आ रही हैं. इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया था. आप सोच रहे होंगे कि पर्दे पर कौन था ये तो बता दिया. ये भी बता दिया कि गाया किसने लेकिन दिल को अंदर तक छू जाने वाले ये बोल लिखे किसने? चलिए ये भी बता देते हैं. इस गाने के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे और इसे म्यूजिक से संवारा था लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल की जोड़ी ने. लता जी की कोमल और दर्द भरी आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया है.
आनंद बख्शी ने लिखे कालजयी बोल
परदेस जाके परदेसिया, भूल ना जाना पिया
तन-मन किसी ने तुझे अर्पण किया
परदेस जाके परदेसिया भूल ना जाना पिया
हो परदेस जाके परदेसिया भूल ना जाना पिया
एक तेरी खुशी के कारण
एक तेरी खुशी के कारण
लाख सहे दुख हमने ओ साजन
लाख सहे दुख हमने ओ साजन
हंस के जुदाई का
हंस के जुदाई का जहर पिया
परदेस जाके परदेसिया भूल ना जाना पिया
हो परदेस जाके परदेसिया भूल ना जाना पिया
अर्पण बॉक्स ऑफिस पर थी हिट
अर्पण में रीना रॉय और जीतेंद्र के अलावा राज बब्बर, परवीन बाबी लीड रोल में थे. डायरेक्टर और प्रोड्यूसर जे.ओम प्रकाश की ये फिल्म उस साल की चर्चित फिल्म थी. इंटरनेट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक 70 लाख रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 2 करोड़ रुपये की बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की थी. इस बंपर कमाई के साथ फिल्म को हिट करार दिया गया था.
अर्पण की कहानी
अनिल (जीतेन्द्र) और शोभा (रीना रॉय) एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और शादी करने वाले हैं. शोभा अमीर बिजनेसमैन जे.के. (राज बब्बर) की कंपनी में काम करती है. अनिल बेहतर भविष्य के लिए विदेश चला जाता है. उसकी गैरमौजूदगी में अनिल की बहन विनी प्रेग्नेंट हो जाती है. जे.के. इस हालात का फायदा उठाकर शोभा को ब्लैकमेल करता है और कहता है कि अगर वह उससे शादी कर ले तो वह विनी की शादी राकेश से करा देगा और परिवार की इज्जत बचाएगा.
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शोभा परिवार की खातिर जे.के. से शादी कर लेती है और सच्चाई छुपा लेती है. जब अनिल लौटता है तो वह सोचता है कि शोभा ने पैसे और सुख-सुविधा के लिए शादी की है. दुखी होकर वह सोना (परवीन बाबी) से शादी कर लेता है, लेकिन शोभा को भूल नहीं पाता. बाद में जे.के. को कैंसर हो जाता है. वह सुधर जाता है और शोभा से सच्चा प्यार करने लगता है. शोभा गर्भवती होती है और जे.के. की मृत्यु हो जाती है. अंत में अनिल को सच्चाई पता चलती है.
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फिल्म की एंडिंग बहुत भावुक और दुखद है, जहां शोभा अपना अंतिम बलिदान देती है. अर्पण बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और रीना रॉय की शानदार एक्टिंग और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के म्यूजिक के लिए हमेशा याद की जाती है.
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