हिंदी फिल्मों में शादी-ब्याह के मौकों के लिए हमने कई तरह के गाने सुने हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसा गाना सुनाएंगे जिसकी खास धूम पंजाबी शादियों में रही है. ये बात केवल पुराने दौर की नहीं बल्कि आज भी पंजाबी टप्पे के तौर पर इस गाने को खूब गाया जाता है. 90 के दशक का यह मजेदार और एनर्जी से भरा गाना लंबे समय से पंजाबी शादियों और पार्टियों की शान बना हुआ है. ये गाना है “नी मैं सास कुटनी”. ये गाना साल 1993 की फिल्म 'घर आया मेरा परदेसी' का है. इस गाने में भाग्यश्री अपनी सास को छेड़ते हुए नाच रही हैं और गाना गा रही हैं. YouTube पर यह गाना लाखों बार देखा जा चुका है और लोग इसे सुन अपनी पुरानी यादों में भी खो जाते हैं.
क्या है 'नी मैं सास कुटनी'
यह एक हल्का-फुल्का, मजेदार डांस नंबर है जिसमें बहू अपनी सास की शिकायत करती हुई नजर आती है. गाने के बोल कुछ इस तरह हैं – “नी मैं सास कुटनी, कुटनी कोई ना रोके”. गाने में भाग्यश्री का क्यूट और इनोसेंट अंदाज बहुत पसंद किया गया. यह असल में से हीरा ग्रुप (इंग्लैंड) के पंजाबी गाने “नी मैं सास कुटनी” का हिंदी वर्जन है. इस गाने के बोल देव कोहली ने लिखे हैं. गाना सुनते ही लोग झूमने लगते हैं और आज भी शादियों में इसकी धूम है.
सिंगर की बात करें तो इस गाने को अनुराधा पौडवाल ने गाया है. 90 के दशक में अनुराधा पौडवाल की मधुर आवाज बहुत पॉपुलर थी. उन्होंने इस गाने को इतने मजेदार अंदाज में गाया कि यह फिल्म के दूसरे गानों से ज्यादा याद रह गया. इस गाने का संगीत विजय सिंह ने दिया है. दिलचस्प बात यह है कि विजय सिंह, भाग्यश्री के पिता थे. उन्होंने फिल्म के पूरे म्यूजिक को कंपोज किया था. उनके संगीत में पंजाबी फ्लेवर और बॉलीवुड की मिठास दोनों का मिक्स था.
यह गाना पूरी तरह भाग्यश्री पर फिल्माया गया था. “मैंने प्यार किया” के सुपरहिट होने के बाद भाग्यश्री ने कुछ चुनिंदा फिल्में कीं. इस गाने में उनका डांस और एक्सप्रेशन बेहद क्यूट और नैचुरल लगते हैं. कई दर्शक कहते हैं कि इस गाने की वजह से ही वे पूरी फिल्म देखने बैठ गए.
घर आया मेरा परदेसी फिल्म के बारे में
1993 में रिलीज हुई घर आया मेरा परदेसी एक हिंदी ड्रामा-रोमांटिक फिल्म है. डायरेक्टर और प्रोड्यूसर दोनों रवींद्र पीपत थे. फिल्म के लीड एक्टर्स में अविनाश वधावन (बिरजू), वर्षा उसगांवकर (राधा), भाग्यश्री, गुलशन ग्रोवर, दलिप तहिल, विक्रम गोखले के नाम शामिल हैं. फिल्म की कहानी बिरजू और राधा के प्रेम की है. राधा के पिता चाहते हैं कि वह विक्रम से शादी करे, लेकिन बेटी की इच्छा जानकर वह बिरजू से शादी के लिए तैयार हो जाते हैं, बशर्ते बिरजू कुछ कठिन शर्तें पूरी करे. कहानी में प्यार, संघर्ष और परिवार के रिश्तों का मिक्स है.
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