दूरदर्शन के दिनों के तो कहने ही क्या. जितने शानदार सीरियल हुआ करते थे उतने ही शानदार उनके टाइटल ट्रैक भी. 90s में एक ऐसा ही सीरियल आया था जिसके शुरू होते ही रविवार के दिन गली-कूचों में सन्नाटा पसर जाता था. ये दुनिया थी इश्क की, अय्यारी की और राजा-महाराजाओं की दुनिया की. ये सीरियल हिंदी के मशहूर उपन्यासकार देवकीनंदन खत्री के 1888 के उपन्यास पर आधारित था. शायद अब आप हमारा इशारा समझ गए होंगे, अगर नहीं तो लीजिए बता देते हैं कि ये सीरियल था चंद्रकांता. ये दूरदर्शन पर 1994 में आया था और इसका क्रेज दर्शकों के सिर चढ़कर बोला था. इसके टाइटल ट्रैक के तो कहने ही क्या.
32 साल फिर भी नहीं भूली वो पुरानी बातें
बेशक इस सीरियल को 32 साल गुजार चुके हैं लेकिन 'चंद्रकांता की कहानी ये माना है पुरानी, ये पुरानी होकर भी बड़ी लगती है सुहानी…नौगढ़-विजयगढ़ में थी तकरार, नौगढ़ का था जो राजकुमार, चंद्रकांता से करता था प्यार' पंक्तियां आज भी जहन में कौंधती हैं. ये पंक्तियां योगेश के लिखे और उषा खन्ना के संगीत में सोनू निगम तथा विनोद राठौड़ की आवाज में ऐसे ढलीं कि पूरा भारत झूम उठा. गाना प्रेम, साजिश, हिम्मत और तिलिस्म की उस दुनिया को बयान करता है, जिसमें विजयगढ़ की राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के राजकुमार वीरेंद्र सिंह की प्रेम कहानी उलझी हुई थी.
देवकीनंदन खत्री के उपन्यास पर आधारित इस फैंटेसी सीरियल को नीरजा गुलेरी ने प्रोड्यूस किया. 1994 से 1996 तक दूरदर्शन पर प्रसारित हुए इस शो में कुल 133 एपिसोड आए. उस दौर में केबल टीवी का जमाना नहीं था. एक ही चैनल पर पूरा देश जुड़ा रहता था. इसलिए जब चंद्रकांता शुरू होता, सड़कें खाली हो जातीं. टीआरपी आसमान छूती और विज्ञापनों का रिकॉर्ड बनता. एक एपिसोड में 27 मिनट से ज्यादा विज्ञापन तक चले, जो उस समय का कीर्तिमान था.
चंद्रकांता सीरियल की स्टारकास्ट
दूरदर्शन के सीरियल की सफलता का बड़ा श्रेय उसके कलाकारों को जाता है. शिखा स्वरूप ने राजकुमारी चंद्रकांता का किरदार निभाया. उनकी खूबसूरती और अंदाज ने दर्शकों का दिल जीता. शहबाज खान कुंवर वीरेंद्र विक्रम सिंह बने. दोनों की जोड़ी उस दौर की सबसे पसंदीदा जोड़ी मानी गई. अखिलेंद्र मिश्र का क्रूर सिंह आज भी याद किया जाता है. इरफान खान ने बद्रीनाथ और सोमनाथ का दोहरा किरदार निभाया.
मुकेश खन्ना जांबाज, पंकज धीर शिवदत्त और कृतिका देसाई कई भूमिकाओं में नजर आईं. 32 साल बीत चुके हैं. टीवी चैनल सैकड़ों हो गए, ओटीटी प्लेटफॉर्म आ गए, लेकिन चंद्रकांता का वह गाना और वह दौर आज भी याद किया जाता है.
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