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30 साल पुराना वो गाना, जिसे जावेद अख्तर ने 'चौरंगी' में कोलकाता की सड़क पर कार में बैठकर लिखा, नुसरत फतेह अली खान की दमदार आवाज ने बनाया कल्ट

कव्वाली के 'बादशाह' कहे जाने वाले नुसरत फतेह अली खान ने अपने सुरों से भारतीय म्यूजिक इंडस्ट्री को भी सजाया है. उन्होंने कई सदाबहार गाने गाए हैं जो आज भी म्यूजिक लवर्स के जेहन में बसते हैं. एक गाना 30 साल से कल्ट है.

30 साल पुराना वो गाना, जिसे जावेद अख्तर ने 'चौरंगी' में कोलकाता की सड़क पर कार में बैठकर लिखा, नुसरत फतेह अली खान की दमदार आवाज ने बनाया कल्ट
नुसरत फतेह अली खान का ये गाना आज भी है कल्ट

कव्वाली की दुनिया के बादशाह कहे जाने वाले नुसरत फतेह अली खान ने अपनी आवाज से हिंदुस्तानी संगीत को भी खास पहचान दी. उनके कई गीत आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं, लेकिन ‘आफरीन आफरीन' की बात ही अलग है. करीब तीन दशक पहले आया यह गीत आज भी उतना ही ताजा लगता है. खास बात यह है कि इसके बोल बॉलीवुड के मशहूर गीतकार जावद अख्तर ने लिखे थे, जबकि इसकी धुन नुसरत फतेह अली खान ने तैयार की और आवाज भी दी. 1996 में एल्बम ‘संगम' से आया यह गीत बाद में कई पीढ़ियों की पसंद बन गया. 

कार में बैठे-बैठे आया ‘आफरीन आफरीन' का ख्याल

‘आफरीन आफरीन' की कहानी इसके बोलों जितनी ही दिलचस्प है. जावेद अख्तर और नुसरत फतेह अली खान ने 1996 के एल्बम ‘संगम' के लिए साथ काम किया था. इस एल्बम में दोनों की कई रचनाएं शामिल थीं और ‘आफरीन आफरीन' उनमें सबसे ज्यादा याद की जाने वाली रचना बनी. रिकॉर्ड के मुताबिक गीत के बोल जावेद अख्तर के थे और संगीत नुसरत फतेह अली खान ने दिया था. 

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जावेद अख्तर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें इस गीत का मुखड़ा कोलकाता के चौरंगी इलाके में आया था. वह कार में थे और चौरंगी की तरफ मुड़ते समय अचानक गीत का ख्याल आया. बाद में यही विचार नुसरत साहब तक पहुंचा और दोनों की रचनात्मक साझेदारी से ‘आफरीन आफरीन' तैयार हुआ.

नुसरत के बाद भतीजे राहत ने भी दी नई पहचान

इस गीत की लोकप्रियता यहीं नहीं रुकी. नुसरत फतेह अली खान के भतीजे Rahat Fateh Ali Khan ने 2003 में ‘आफरीन आफरीन' का एक स्टूडियो वर्जन रिकॉर्ड किया, जिसे ‘बेस्ट ऑफ खान 3' में शामिल किया गया था. इसके बाद साल 2016 में ‘आफरीन आफरीन' को एक बार फिर नए अंदाज में पेश किया गया. Momina Mustehsan के साथ राहत फतेह अली खान ने इसे ‘कोक स्टूडियो पाकिस्तान' के सीजन 9 में गाया. पॉप और सूफी अंदाज के इस वर्जन ने नई पीढ़ी को भी गीत से जोड़ दिया. यह प्रस्तुति सीजन की सबसे चर्चित परफॉर्मेंस में शामिल हुई. 

2016 के बाद फिर छाया ‘आफरीन आफरीन' का जादू

‘आफरीन आफरीन' सिर्फ एक लोकप्रिय गीत नहीं रहा, बल्कि समय के साथ एक कल्ट क्लासिक बन गया. इसके मूल वीडियो में लीजा रे और हिमांशु मलिक भी नजर आए थे. 2016 के कोक स्टूडियो वर्जन ने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी. उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक यह पाकिस्तान में 2016 के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले म्यूजिक वीडियो में शामिल रहा और इसके बोल 2017 में गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च किए जाने वाले गीतों के बोलों में शामिल थे. 

यही वजह है कि 30 साल बाद भी जब सूफी संगीत और पुराने यादगार गानों की बात होती है, तो ‘आफरीन आफरीन' का नाम जरूर आता है. जावेद अख्तर के खूबसूरत शब्दों और नुसरत फतेह अली खान की रूहानी आवाज ने इस गीत को ऐसा बना दिया, जिसे हर नई पीढ़ी अपने अंदाज में फिर से खोज लेती है.

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