विज्ञापन

15वीं शताब्दी के महान संत के दोहे पर बना हिंदी फिल्म का गाना, झकझोर कर रख देगा इसका एक एक शब्द

हम 15वीं शताब्दी के एक ऐसे संत के बारे में बात कर रहे हैं जिन्होंने हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के पाखंड, बाहरी आडंबरों और अंधविश्वासों पर करारा प्रहार किया. उनके दोहे और सीख आज भी स्कूलों में पढ़ाई जाती हैं.

15वीं शताब्दी के महान संत के दोहे पर बना हिंदी फिल्म का गाना, झकझोर कर रख देगा इसका एक एक शब्द
15वीं शताब्दी के संत ने लिखा था शेरदिल फिल्म का गाना
Social Media
नई दिल्ली:

गानों की एक खास बात होती है कि वे कितनी ही जटिल बातों को इस अंदाज में पेश करते हैं कि वे दिल तक पहुंचती हैं सीधी समझ आती हैं. आज हम आपको हिंदी फिल्म के एक ऐसे ही गाने के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे लिखा तो सदियों पहले गया था, सुना और गाया भी कई बार गया लेकिन जब फिल्म में आया में तो कुछ और ही हो गया. हम बात कर रहे हैं साल 2022 में आई फिल्म शेरदिल के एक गाने की. इस गाने के बोल किसी और ने नहीं बल्कि संत कबीर ने लिखे थे. उनकी रचना को जब फिल्म में पेश किया गया तो इसका जादू एक अलग ही दुनिया में ले गया. 

संत कबीर के दोहे पर बना गाना

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं वह संत कबीर के अमर संदेश 'मोको कहां ढूंढे रे बंदे' पर बना था. “मोको कहां ढूंढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास रे…” ये शब्द सुनते ही दिल के किसी कोने में एक शांति सी छा जाती है. ये सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि संत कबीर का वो विजन था जो सदियों से इंसानियत को याद दिलाता आ रहा है कि परमात्मा बाहर नहीं, भीतर बसता है.

ये गाना ‘शेरदिल: द पिलीभीत सागा' (2022) फिल्म में आया था. श्रीजित मुखर्जी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी, नीरज काबी और सायनी गुप्ता लीड रोल में थे. फिल्म एक गांव के सरपंच की कहानी है, जो बाघ के हमले के मुआवजे के लिए खुद को बाघ के सामने खड़ा करने का फैसला करता है. इस बैकड्रॉप में ये गाना नेचर, लाइफ, सैक्रिफाइस और अपनी खुद की खोज का गहरा संदेश लेकर आता है.

इस गाने को सौम्या मुर्शिदाबादी ने अपनी आवाज से और इंटेंस बना दिया. उनकी गहरी, भाव से भरी आवाज ने कबीर के पद को आत्मा से भर दिया. इस गाने के बोल में कोई छेड़छाड़ नहीं लेकिन नए जमाने में कुछ इस तरह पेश किया गया कि बिल्कुल ताजा हवा के झोंके जैसा महसूस हुआ.

15वीं शताब्दी के हैं संत कबीर

गीत के बोल संत कबीर ने लिखे जो कि 15वीं शताब्दी के महान संत हैं. उन्होंने हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के पाखंड, बाहरी आडंबरों और अंधविश्वासों पर करारा प्रहार किया. कबीर कहते थे कि ईश्वर किसी मंदिर, मस्जिद, तीर्थ या मूर्ति में नहीं, बल्कि हर इंसान के हृदय में और उसके विश्वास में बसता है.

यह भी पढ़ें: 380 फिल्मों में बना विलेन, जब हीरोइन के साथ फरमाय रोमांस तो धर्मेंद्र-जितेंद्र फेल, 55 साल पुराना गाना आज भी हिट, मोहम्मद रफी की आवाज ने बनाया खास

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Sant Kabir Das, Sant Kabir, Hindi Songs, Pankaj Tripathi, Entertainment
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com