
Sakat Chauth 2026 Daan: सकट चौथ हिंदू धर्म में संतानों के सुख, समृद्धि और मंगल कामनाओं के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है. इसे गणेश भगवान को समर्पित माना जाता है और खासतौर पर माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और कुशलता के लिए ये व्रत रखती हैं. साल 2026 में भी ये व्रत (Sakat Chauth Ka Vrat Kab Hai) शुभ योग में मनाया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत के साथ-साथ कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से बड़ा पुण्य मिलता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं.
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सकट चौथ का महत्व
सकट चौथ को संकटों से मुक्ति दिलाने वाला व्रत माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की उपासना करने से घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतानों के जीवन में आने वाली कठिनाइयां कम होती हैं. कई स्थानों पर इसे तिलकुट चौथ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इस दिन तिल और गुड़ का विशेष महत्व होता है. महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं.
सकट चौथ पर दान क्यों किया जाता है?
धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि व्रत के साथ दान करने से उसका फल कई गुना बढ़ जाता है. माना जाता है कि सकट चौथ पर दान करने से न सिर्फ पुण्य मिलता है, बल्कि जीवन में रुके हुए कार्य भी बनने लगते हैं. जिन लोगों के जीवन में आर्थिक परेशानियां, बाधाएं या संतान संबंधी चिंताएं होती हैं, उन्हें इस दिन श्रद्धा से दान करने की सलाह दी जाती है.
इन वस्तुओं का दान माना जाता है शुभ
सकट चौथ पर तिल, गुड़, मूंगफली, फल, कंबल, घी, कपड़े और मिठाई का दान विशेष फलदायी माना गया है. तिल और गुड़ का दान पापों के शमन का प्रतीक माना जाता है, जबकि कंबल और वस्त्र दान करने से संकट और ठंड से राहत का आशीर्वाद मिलता है. गरीबों, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ बताया गया है. कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं.
व्रत रखते समय इन बातों का रखें ध्यान
व्रत के दौरान नकारात्मक विचारों से दूर रहें और यथासंभव सात्विक भोजन का पालन करें. पूजा के समय गणेश जी को दूर्वा, मोदक और तिल-गुड़ का भोग जरूर चढ़ाएं. शाम को चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलना शुभ माना जाता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.