
Sakat Chauth 2026: माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को आने वाला दिन सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी कहलाता है. इस बार यह त्योहार 6 जनवरी को पड़ रहा है. इस दिन खासतौर पर महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और जीवन में आने वाले संकट दूर करने के लिए भगवान गणेश का व्रत करती हैं. माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर सालभर की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. यह संकटों को हरने वाला व्रत माना गया है. लेकिन अक्सर व्रती महिलाओं के मन में इस व्रत को लेकर कई सवाल रहते हैं. इस दिन करना क्या चाहिए, क्या खाना सही है, पानी पी सकते हैं या नहीं और पूजा की सही विधि (How to perform Sakat Chauth puja at home) क्या है. यहां जानिए हर सवाल का जवाब.
सकट चौथ के दिन क्या करना चाहिए?
सकट चौथ के दिन सुबह उठकर साफ-सफाई के बाद स्नान करना शुभ माना जाता है. परंपरा के अनुसार, नहाने के पानी में थोड़े से तिल डाले जाते हैं. इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है कि पूरे दिन मन, वाणी और व्यवहार में संयम रखा जाएगा. दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते रहना, घर में शांति बनाए रखना और किसी से झगड़ा न करना इस व्रत का अहम हिस्सा माना जाता है. शाम के समय गणेश जी की पूजा की तैयारी की जाती है और चंद्रोदय के बाद ही व्रत खोला जाता है. इस दिन सकट चौथ की कथा सुनना या पढ़ना भी बहुत जरूरी माना गया है, क्योंकि बिना कथा के व्रत अधूरा माना जाता है.

सकट चौथ के व्रत में क्या खाना चाहिए
सकट चौथ का व्रत ज्यादातर महिलाएं निर्जला या फलाहार रखती हैं, लेकिन अपनी सेहत के अनुसार, फलाहार करना भी पूरी तरह मान्य है. इस दिन तिल का खास महत्व होता है, इसलिए खाने में तिल से बनी चीजों को शामिल किया जाता है. फल, मूंगफली, तिल के लड्डू, गुड़, शकरकंद या सिंघाड़े का इस्तेमाल किया जा सकता है. ध्यान रखें कि व्रत में नमक, चावल और गेहूं से बनी चीजें नहीं खाई जातीं. रात में चंद्रमा के दर्शन के बाद ही प्रसाद लेकर व्रत खोला जाता है.
सकट चौथ में पानी पी सकते हैं क्या
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कई महिलाएं इस दिन निर्जल व्रत रखती हैं यानी पानी तक नहीं पीतीं और चंद्रमा को देखकर ही पारण करती हैं, लेकिन ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि यह कोई जबरदस्ती नहीं है. अगर आपकी तबीयत कमजोर है, चक्कर आते हैं या कोई मेडिकल समस्या है, तो पानी पीना बिल्कुल गलत नहीं माना जाता. व्रत का असली मतलब शरीर को कष्ट देना नहीं, बल्कि मन को शुद्ध रखना है, इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार नियम अपनाएं और भगवान गणेश का ध्यान करते रहें.
सकट चौथ की पूजा कैसे की जाती है (Sakat Chauth Puja Vidhi)
1. सकट चौथ को शाम के समय एक साफ जगह पर चौकी रखकर भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.
2. गणेश जी को लाल कपड़ा, दूर्वा, फूल और तिल अर्पित करें.
3. तिल के लड्डू, शकरकंद या मोदक का भोग लगाएं.
4. पूजा के बाद 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें और सकट चौथ की कथा सुनें.
5. चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को जल अर्पित करें. चंद्रमा से घर-परिवार की सुख-शांति की कामना करें.
6. इसके बाद ही व्रत खोलें.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.