शशि थरूर ने कहा, "मैं करीब 20 साल पहले से यह बात कहता आ रहा हूं कि हमें समझना चाहिए कि दुनिया अब इंटरनेट की तरह जुड़ चुकी है. एक समय था जब शीत युद्ध (कोल्ड वॉर) के दौरान दुनिया दो खेमों में बंटी हुई थी और भारत गुटनिरपेक्ष (नॉन-अलाइनमेंट) नीति पर चलता था. हम न किसी एक पक्ष के साथ थे और न ही दूसरे के साथ, बल्कि अपनी स्वतंत्र सोच के साथ आगे बढ़ रहे थे. फिर शीत युद्ध खत्म हुआ, सोवियत संघ और वारसा पैक्ट का पतन हो गया. इसके बाद दो महाशक्तियों के बीच बंटी दुनिया की जगह एक ध्रुवीय (यूनिपोलर) व्यवस्था ने ले ली, जहां काफी हद तक अमेरिका का प्रभाव दिखाई देता था. मैं उस समय यह देख रहा था कि दुनिया के देशों के बीच रिश्ते इंटरनेट के वर्ल्ड वाइड वेब की तरह हो गए हैं. जैसे किसी नेटवर्क में अलग-अलग लोग अलग-अलग कारणों से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, वैसे ही देशों के बीच भी संबंध विकसित हो रहे हैं. इसी वजह से मैंने कहा था कि आज के दौर में नॉन-अलाइनमेंट की जगह भारत को मल्टी-अलाइनमेंट की ओर बढ़ना चाहिए.