प्रयागराज में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर संगम तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. सुबह से ही अलग–अलग घाटों पर लोगों का रेला दिखाई दे रहा है. इसी बीच एक अनोखा दृश्य सभी का ध्यान आकर्षित कर रहा है- मौनी बाबा उर्फ मौनी महाराज, जो दंडवत परिक्रमा करते हुए संगम तट की ओर बढ़ रहे हैं.
दंडवत परिक्रमा कर पहुंचे स्नान के लिए
मौनी महाराज अपनी कठिन साधना और तपस्या के लिए जाने जाते हैं. मकर संक्रांति के अवसर पर उन्होंने लगातार दंडवत परिक्रमा करते हुए संगम तट तक पहुँचने का संकल्प लिया. उनके शरीर को सीधा ज़मीन पर टिकाकर आगे बढ़ने की यह साधना श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. उनकी इस परिक्रमा को देखने के लिए भक्तों की बड़ी संख्या उनके पीछे-पीछे चल रही है. श्रद्धालु इसे एक अद्भुत और विरल आध्यात्मिक दृश्य के रूप में देख रहे हैं.
5 करोड़ 51 लाख माला का संकल्प
मौनी महाराज अपने शिविर में 5,51,00,000 (पांच करोड़ इक्यावन लाख) माला की परिधि से एक विशेष शिवलिंग की स्थापना कर रहे हैं. यह संकल्प भी उनकी कठिन तपस्या और दृढ़ निष्ठा को दर्शाता है. वे बताते हैं कि यह संकल्प उन्होंने समाज और मानवता की भलाई, और भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति के उद्देश्य से लिया है.
महाराज का संकल्प और साधना
जब उनसे उनके संकल्प के बारे में पूछा गया तो उन्होंने संकेतों में बताया कि उनकी यह यात्रा और तपस्या भगवान शंकर की कृपा से संभव हो रही है. उनका कहना था कि उनका उद्देश्य धरती और मानवता के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है.
श्रद्धालुओं की भारी भीड़
मौनी महाराज की दंडवत यात्रा को देखने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालु लगातार उमड़ रहे हैं. संगम तट पर उनकी परिक्रमा का दृश्य मकर संक्रांति की पवित्रता और इस मेले की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा देता है. यह नजारा न सिर्फ भक्तों को मंत्रमुग्ध कर रहा है, बल्कि संगम के आस्था-पूर्ण वातावरण में एक अनूठी अध्यात्मिक अनुभूति भी जोड़ रहा है.