Army Day Parade 2026: दुनिया ने पहली बार देखी भारत की Bhairav Battalion | Indian Army | Jaipur

  • 9:42
  • प्रकाशित: जनवरी 15, 2026

 

जयपुर की जगतपुरा स्थित महल रोड इस समय इतिहास रचती दिखी। भारतीय सेना ने अपने 78वें स्थापना दिवस के अवसर पर यहाँ पहली बार सेना परेड सैन्य छावनी से बाहर निकालकर सीधे जनता के बीच आयोजित की। रंग, परंपरा, संस्कृति और आधुनिक सैन्य शक्ति का यह अनोखा संगम गुलाबी नगरी के लिए यादगार बन गया।

 

राजस्थान की धरोहर से शुरू हुआ परेड का दिलकश नज़ारा

परेड की शुरुआत राजस्थान की लोक परंपराओं की सांस्कृतिक झांकी से हुई।

 

भरतपुर की फूलों की होली — जहाँ रंगों से नहीं, भावों से खेला जाता है — का खूबसूरत दृश्य लोगों का मन मोह गया।

इसके बाद प्रस्तुत हुआ मनमोहक मयूर नृत्य, जिसमें नर्तकों ने चाल, सौंदर्य और प्रकृति का अद्भुत तालमेल दिखाया।

इसके ठीक पीछे आया रंगीन व ऊर्जावान गैर नृत्य, जो ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वेशभूषा में राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करता दिखा।

पहली बार सेना की ‘अग्रसर मिक्स स्काउट बटालियन’ की दमदार भागीदारी

सेना दिवस परेड में पहली बार शामिल हुई अग्रसर मिक्स स्काउट बटालियन ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

 

इसका नेतृत्व 5 लद्दाख स्काउट्स के लेफ्टिनेंट ब्रिजेश कर रहे थे।

हिमालय की गोद में पले इन जवानों की बहादुरी और कठिन परिस्थितियों में जीवटता का प्रदर्शन अद्भुत रहा।

इसमें शामिल थे—

 

डोगरा स्काउट्स – “ज्वाला माता की जय” के उद्घोष के साथ

लद्दाख स्काउट्स – जिन्हें लद्दाख की आत्मा कहा जाता है

गढ़वाल और कुमाऊँ स्काउट्स – देवभूमि उत्तराखंड के साहसी प्रहरी

सिक्किम और अरुणाचल स्काउट्स – पूर्वोत्तर के बहादुर “राइनो”

स्थानीय भाषा, संस्कृति और भूगोल की गहरी समझ इन स्काउट्स को और भी सक्षम बनाती है।

 

मराठा लाइट इन्फैंट्री व सिख रेजिमेंटल सेंटर का शानदार मार्च‑पास्ट

इसके बाद मराठा लाइट इन्फैंट्री और सिख रेजिमेंटल सेंटर के जवानों ने एकदम तालमेल के साथ आकर्षक मार्च‑पास्ट किया।

 

नेतृत्व सुबेदार मेजर कुलवंत सिंह (सिख रेजिमेंटल सेंटर) कर रहे थे

सहायक थे सुबेदार राजू भजंतरी (मराठा लाइट इन्फैंट्री)

दो महान सैन्य परंपराओं का यह संगम जयपुर की सड़कों पर विशेष आकर्षण रहा।

 

सबसे पुरानी रेजिमेंट – मद्रास रेजिमेंट के वीरों की दहाड़

मद्रास रेजिमेंट के जांबाज़ जवानों ने “हम न रुकेंगे, न मुड़ेंगे, न झुकेंगे” के संदेश के साथ आत्मनिर्भर और सक्षम भारत के निर्माण का संकल्प दोहराया।

उनकी उपस्थिति ने परेड को और भी भव्य रूप दिया।

 

लॉजिस्टिक्स के महारथी और हाई‑टेक रोबोटिक्स भी बने आकर्षण

दुर्गम इलाकों में लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाली इकाइयों ने अत्याधुनिक तकनीक से लैस अपने उपकरणों का प्रदर्शन किया।

थर्मल कैमरों सहित वे सिस्टम भी दिखाए गए, जिनकी मदद से सीमाओं पर दुश्मन की गतिविधियाँ नाकाम की जाती हैं।

 

इसके बाद मंच के सामने से गुज़रे सेना के रोबोटिकल यूनिट्स, जिन्हें देखकर दर्शकों में भारी उत्साह दिखा।

 

ऑपरेशन सिंदूर की झलक भी परेड में शामिल

एनडीटीवी के रिपोर्टर आदित्य राज की जानकारी के अनुसार—

 

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर के हीरो जवान भी मौजूद रहे।

केवल 8–9 महीने पहले पाकिस्तान की ओर से हुए ड्रोन और मिसाइल खतरों के जवाब में सेना और वायुसेना ने जो कामयाबी हासिल की थी, उसी से जुड़े उपकरणों का प्रदर्शन भी किया गया।

इनमें शामिल थे—

 

आकाश एंटी‑मिसाइल सिस्टम

पनाका रॉकेट लॉन्चर

अन्य अत्याधुनिक हथियार और ड्रोन सिस्टम

मुख्य अतिथियों में शामिल रहे—

आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी

राजस्थान और मिज़ोरम के राज्यपाल

वीरता पदक प्राप्त अधिकारी और पूर्व सैनिक

जिस समय परेड की शुरुआत हुई, इन शूरवीरों ने ही इसका नेतृत्व किया।

 

जनभागीदारी ने आयोजन को बनाया अनोखा

इस बार परेड जनता के बीच कराए जाने से लोगों में भारी उत्साह दिखा।

हज़ारों लोग सुबह से ही एकत्र हो गए थे, ताकि वे सेना की ताकत, अनुशासन और परंपरा को करीब से देख सकें।

 

गणतंत्र दिवस परेड जैसा ही दृश्य जयपुर में पहली बार बना — और पहली ही बार में यह आयोजन ऐतिहासिक माना जा रहा है।

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