दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी के ड्राफ्ट में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम शामिल किया गया है. इसके तहत राजधानी में पुरानी पेट्रोल और डीज़ल कारों को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) में बदलने की अनुमति दी जा सकती है. इतना ही नहीं, इस तकनीक को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार पहली 1000 गाड़ियों पर 50,000 रुपये की सब्सिडी देने पर भी विचार कर रही है. इस कदम को दिल्ली में प्रदूषण कम करने और पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप होने से बचाने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
कैसे बदली जाएगी पेट्रोल‑डीजल की कारें EV में?
पुरानी गाड़ियों को EV में बदलने की तकनीक Folks Motor और Automotive Research Association of India (ARAI) ने मिलकर तैयार की है. यह EV रेट्रोफिटिंग तकनीक दो तरह से काम कर सकती है-
1. हाइब्रिड ड्राइविंग मोड
कार पेट्रोल/डीजल इंजन के साथ-साथ इलेक्ट्रिक ड्राइव मोड का उपयोग भी कर सकेगी.
2. पूरी तरह इलेक्ट्रिक ड्राइविंग मोड
कार केवल बैटरी पावर पर 50–100 किमी तक चलाई जा सकेगी.
Folks Motor के CEO निखिल आनंद खुराना के अनुसार- गाड़ी के मौजूदा इंजन और गियरबॉक्स में बदलाव किए बिना रेट्रोफिटिंग संभव है. इसमें एक रेट्रोफिट मोटर, गियरबॉक्स यूनिट और रेकुपरेटिव जेनरेटर लगाया जाता है.
यह जेनरेटर गाड़ी के 50–60% मैकेनिकल लॉसेस को ऊर्जा में बदलकर बैटरी को लगातार चार्ज करता रहता है.
कार की मौजूदा बैटरी स्पेस का उपयोग करते हुए नई बैटरियों को डिग्गी में शिफ्ट किया जाता है. निखिल कहते हैं कि EV पॉलिसी में इस तकनीक को शामिल करना आम लोगों तक इसे पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
क्या गाड़ी की सुरक्षा और बीमा प्रभावित होगा?
कुछ विशेषज्ञों की ओर से तकनीक की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि Folks Motor का दावा है- EV रेट्रोफिटिंग सिस्टम में 10–12 सेंसर लगाए जाते हैं, जो ब्रेकिंग सिस्टम से लेकर इंजन तक कई पैरामीटर्स की निगरानी करते हैं. इस तकनीक का पेटेंट 2012 में कराया गया था. ARAI के साथ कई वर्षों से इसके सुरक्षा परीक्षण और अपडेटेड प्रयोग किए जाते रहे हैं. रेट्रोफिटिंग के बाद कंपनी वाहन पर वारंटी भी देगी, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता काफी हद तक कम होगी.
रेट्रोफिटिंग में कितना समय लगेगा?
कंपनी का दावा है कि EV रेट्रोफिटिंग में सिर्फ 4–6 घंटे लगते हैं. यानी साधारण कार सर्विसिंग जितना ही समय.
सरकार से मंजूरी मिलने के बाद Folks Motor सोनीपत में 4 एकड़ का ऑटो पार्क तैयार करेगी, जहां बड़े स्तर पर रेट्रोफिटिंग पार्ट्स का निर्माण और वेयरहाउसिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा.
कितना आएगा खर्च?
EV रेट्रोफिटिंग की अनुमानित लागत होगी—
लगभग 2 लाख रुपये + GST
हालांकि GST किस कैटेगरी में आएगा, रेट्रोफिटिंग किट को किस टैक्स स्लैब में रखा जाएगा, इस पर फैसला दिल्ली सरकार की पॉलिसी लागू होने के बाद केंद्र सरकार लेगी. Folks Motor का कहना है कि दिल्ली में मंजूरी मिलते ही अन्य राज्य भी इस मॉडल को अपनाना शुरू कर सकते हैं.
EV रेट्रोफिटमेंट पर भारत सरकार क्या कहती है? भारत सरकार ने 23 जून 2016 को EV रेट्रोफिटमेंट को सशर्त मंजूरी दी थी। इसमें शर्तें थीं- रेट्रोफिटमेंट केवल BS‑II या उसके बाद के इंजन वाली गाड़ियों पर हो सकेगा. गाड़ी का कुल वजन 3500 किलोग्राम से ज्यादा नहीं होना चाहिए. EV रेट्रोफिटमेंट से पहले गाड़ी पर कोई दूसरा रेट्रोफिटमेंट नहीं हुआ हो.