सनातन भारती परंपरा के अनुसार मकर संक्रांति प्रतिवर्ष सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाई जाती है और प्रायः यह 14 जनवरी को पड़ती है. लेकिन इस वर्ष खगोलीय गणना के अनुसार सूर्य का मकर राशि में गोचर 14 जनवरी की देर रात होने के कारण मकर संक्रांति का पर्व 14 और 15 जनवरी—दो दिन तक प्रभावी रहेगा। इसी विषय पर एनडीटीवी में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य रोहित गुरु से विस्तृत चर्चा की गई.
आचार्य रोहित गुरु ने बताया कि संक्रांति का पुण्यकाल सूर्य के राशि परिवर्तन से जुड़ा होता है। जब गोचर रात में होता है, तो अगले दिन का सूर्योदय संक्रांति का मुख्य पुण्यकाल माना जाता है। इसी कारण इस वर्ष 14 जनवरी को संक्रांति का आरंभिक प्रभाव और 15 जनवरी को मुख्य पर्व व दान-पुण्य का श्रेष्ठ समय रहेगा.
राशियों पर प्रभाव
विशेष शुभ प्रभाव: मेष, वृषभ, सिंह, वृश्चिक और मकर राशि—करियर, धन और स्वास्थ्य में सकारात्मक संकेत.
माध्यम प्रभाव: मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, धनु और मीन—सामान्य फल, संयम और परिश्रम से लाभ.
कुंभ राशि: सूर्य की स्थिति के कारण आत्मचिंतन और योजनाबद्ध कार्यों में सफलता.
शुभ मुहूर्त व स्नान-विधि
15 जनवरी को सूर्योदय से पूर्व से दोपहर तक का समय स्नान, दान और जप के लिए श्रेष्ठ बताया गया है. प्रातःकाल तीर्थ/नदी या स्वच्छ जल में तिल मिलाकर स्नान, सूर्य को अर्घ्य, तिल-गुड़ का दान, खिचड़ी व तिल से बने पदार्थों का सेवन विशेष पुण्यदायी माना गया है.
आचार्य रोहित गुरु के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति आत्मशुद्धि, नए संकल्प और सकारात्मक परिवर्तन का अवसर लेकर आ रही है. आप भी जानिए कि इस मकर संक्रांति आपके जीवन में कौन-से नए प्रभाव और अवसर दस्तक देंगे.