माघ मेले में 6 साल का बच्चा भगवान राम की वेशभूषा में क्यों है? सुनिए वजह

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  • प्रकाशित: जनवरी 15, 2026

प्रयागराज के भव्य माघ मेला में इस बार एक अनोखा दृश्य देखने को मिला. मेले में आए लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना एक छह वर्षीय बालक, जिसे लोग ‘सीरीज बाहुबली जी महाराज’ के नाम से जानते हैं. भगवान राम की पारंपरिक वेशभूषा में सजे इस बच्चे ने न सिर्फ सबका ध्यान खींचा, बल्कि अपनी मासूम वाणी में सनातन धर्म के प्रति आस्था और सीख भी साझा की.

राम की वेश-भूषा में धर्म की शिक्षा

भगवान राम के स्वरूप में सजे इस बच्चे ने बताया कि वह सनातन धर्म की शिक्षा और उसके आदर्शों को लोगों तक पहुंचाना चाहता है. बच्चा पूरे आत्मविश्वास के साथ मेले में घूमकर लोगों को संदेश दे रहा था कि “हमारा भारत श्रेष्ठ बने, और दुनिया के हर बच्चे को सनातन के आदर्श समझ में आएं.” उसने कहा कि वह चाहता है कि आने वाली पीढ़ियां धर्म, संस्कृति और नैतिकता से जुड़ी रहें.

‘दुर्जन मार्ग को छोड़कर धर्ममार्ग पर चलने का संदेश’

बच्चे ने अपनी मासूम आवाज में कुछ पंक्तियां भी सुनाईं, जिनमें अच्छाई पर चलने और बुराई से दूर रहने की प्रेरणा थी. उसने कहा कि अगर बच्चे सही रास्ते पर चलेंगे तो भारत एक बार फिर विश्वगुरु बन सकता है.

 

उसकी कही एक प्रमुख बात लोगों को विशेष रूप से प्रभावित कर गई “दुर्जन के रास्ते पर न जाकर धर्म के मार्ग पर चलूँ, ताकि मेरा भारत फिर विश्व गुरु बने.”

कई जिलों के बच्चे जोड़ रहे हैं आस्था से

बच्चे ने बताया कि भदोही, काशी, नालंदा और नवादा जैसे जिलों से भी कई बच्चे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं. उसके अनुसार, जब बच्चे धर्म और संस्कृति से जुड़े रहेंगे, तभी समाज बुराइयों से बचेगा.

उसने एक और पंक्ति सुनाई- “एक बार गरजकर बादल घरे तो देश बचेगा, घर बचेगा.” यह पंक्ति लोगों को यह संदेश देती है कि जब समाज के भीतर सत्य और धर्म की आवाज़ बुलंद होगी, तब देश भी सशक्त बनेगा और परिवार भी सुरक्षित रहेगा.

मघ मेला बना संस्कृति और आस्था का संगम

हर वर्ष की तरह इस बार भी मघ मेला सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है.लेकिन इस बार जैसे छोटे-छोटे बच्चे भी धर्म की परंपराओं को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, वह दृश्य मेले की विशेषता बन गया.

भगवान राम के स्वरूप में सजा यह 6 वर्षीय बालक इस बात का उदाहरण है कि सनातन की जड़ें कितनी गहरी हैं और नई पीढ़ी उसे कितनी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही है.

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