सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संविधान की धज्जियां उड़ाई गई हैं. उनका दावा है कि संबंधित मस्जिद 1911 से भी पहले की है, लेकिन उसके समर्थन में मौजूद सबूतों को नजरअंदाज किया गया. इमरान मसूद का कहना है कि प्रशासन ने ऐतिहासिक तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों को उचित महत्व नहीं दिया.