मौजूदा समय में हॉलीवुड और बॉलीवुड की की हॉरर फिल्में और वेब सीरीज दर्शकों को डराने का काम बखूबी कर रही हैं. लेकिन इससे पहले भारत में लंबे समय तक हॉरर की बागडोर रैमसे ब्रदर्स ने संभाली थी. असल में एक समय पर भारतीय मनोरंजन इंडस्ट्री में हॉरर का दूसरा नाम ही रैमसे ब्रदर्स था. उन्होंने कई भूतिया फिल्में और टीवी शोज बनाएं हैं. इन्हीं में से एक है 'जी हॉरर शो', जो 90 के दशक में भारतीय दर्शकों के लिए डर का सबसे बड़ा नाम था. यह लोकप्रिय हॉरर एंथोलॉजी टेलीविजन सीरीज 9 अगस्त 1993 से 1 अगस्त 2001 तक जी टीवी चैनल प्रसारित हुई थी. रैमसे ब्रदर्स के इस शो ने भारतीय टेलीविजन पर हॉरर मनोरंजन की नई परिभाषा गढ़ते हुए दर्शकों के बीच डर और रहस्य से भरे कार्यक्रमों की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
रोमांच और रहस्य से भरपूर
‘जी हॉरर शो' के कुल 2 सीजन में 364 एपिसोड प्रसारित हुए. हर एक एपिसोड लगभग 22 मिनट का होता था. शो की खासियत यह थी कि इसकी कहानियां आमतौर पर 4 से 5 एपिसोड में पूरी होती थीं, जिससे दर्शकों का रोमांच लगातार बना रहता था. इस सीरीज की पहली कहानी ‘दस्तक' थी, जिसमें एक्टर पंकज धीर और अर्चना पूरन सिंह मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. शो के लेखक एम. सलीम थे, जबकि तुलसी रैमसे और श्याम रैमसे ने इसे प्रोड्यूस किया था.
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हॉलीवुड से प्रेरित थीं कई कहानियां
‘जी हॉरर शो' की कई कहानियां हॉलीवुड की पॉपुलर हॉरर फिल्मों से प्रेरित थीं. इस दौरान ‘तहखाना' में ‘ईविल डेड' और ‘दहशत' में ‘फ्राइट नाइट' की झलक देखने को मिलती है. वहीं ‘गुड़िया' कहानी को हॉलीवुड फिल्म ‘चाइल्ड्स प्ले' से प्रेरित बताया जाता है. हालांकि, इन कहानियों को भारतीय दर्शकों के अनुसार ढाला गया था, जिससे दर्शकों को एक अलग और देसी अनुभव मिला.
90s के बच्चों के लिए डर का दूसरा नाम

उस दौर में जब मनोरंजन के साधन सीमित थे और डिजिटल प्लेटफॉर्म मौजूद नहीं थे, तब शुक्रवार या शनिवार की रात ‘जी हॉरर शो' का इंतजार लाखों दर्शक करते थे. कई परिवार लाइटें बंद कर टीवी के सामने बैठते थे और रैमसे ब्रदर्स की रहस्यमयी दुनिया में खो जाते थे. शो के भूत, हवेलियां, डरावना बैकग्राउंड म्यूजिक और अचानक आने वाले खौफनाक दृश्य बच्चों और बड़ों दोनों को रोमांचित कर देते थे. यही वजह है कि यह कार्यक्रम भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे यादगार हॉरर शोज में गिना जाता है. भले ही आज हॉरर मनोरंजन के कई नए ऑप्शंस मौजूद हैं, लेकिन ‘जी हॉरर शो' का नाम सुनते ही 90 के दशक के दर्शकों की यादें ताजा हो जाती हैं. यह केवल एक टीवी शो नहीं था, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के लिए घर बैठे मिलने वाला पहला देसी हॉरर अनुभव था, जिसे समय बीतने के बावजूद भुलाया नहीं जा सका है.
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