ट्रेनों से सफर करना दिलचस्प होता है. जहां देश के हर कोने, प्रांत के लोग मिलते हैं और अनजाने सफर को अपना बना लेते हैं. फिल्मों में भी ट्रेन की झलक देखने को मिली, जिसमें शाहरुख खान की डीडीएलजे, जिसमें राज-सिमरन का ट्रेन पकड़ने वाला आइकॉनिक सीन हो या सनी देओल की गदर में दिखने वाला बंटवारे का वो दर्द वाला सीन. ट्रेन में शूट हुआ हर सीन फैंस के दिलों में एक अलग याद को बयां करता है. लेकिन क्या आप दूरदर्शन की उस 40 साल पुरानी सीरीज के बारे में जानते हैं, जिसे खुद रेलवे ने स्पॉन्सर किया था. वहीं 15 एपिसोड की सीरीज में ओम पुरी और नीना गुप्ता जैसे सितारे नजर आए थे.
नीना गुप्ता और ओम पुरी का दूरदर्शन शो
हम बात कर रहे हैं श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनीं यात्रा की, जो 40 साल पहले ट्रेन के सफर के दौरान लोगों की जिंदगी के खास पलों की कहानियों को बयां करती थी. 1986 में आई 15 एपिसोड की सीरीज में नीना गुप्ता, ओम पुरी, ईला अरूण, मोहन गोखले, रवि झंकल, राजेंद्र गुप्ता, निखिल भगत, इशिता अरुण और हरीश पटेल जैसे एक्टर्स नजर आए. 1986 में आई यात्रा सीरीज के 15 एपिसोड पूरी तरह से हिमसागर एक्सप्रेस और त्रिपुरा एक्सप्रेस में शूट हुई थे. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, कन्याकुमारी से जम्मू तवी और जैसलमेर से डूम डूमा तक. इसे दो हिस्सों में बांटा गया था और ओम पुरी ने दोनों में लीड रोल निभाया था.
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इंडियन रेलवे ने किया स्पॉन्सर
बेनेगल ने कहा था, “इस यात्रा को इंडियन रेलवे ने स्पॉन्सर किया था. मैंने शो के लिए ट्रेन से की जा सकने वाली दो सबसे लंबी यात्राओं को चुना. यह एक बहुत ही खास एक्सपीरियंस था, क्योंकि इस सीरीज में कई टैलेंटेड एक्टर्स और टेक्नीशियंस काम कर रहे थे. हमारे पास एक पूरी ट्रेन थी. शो ने न सिर्फ दर्शकों को, बल्कि हमें भी भारत के अलग-अलग हिस्सों से रूबरू कराया. यह बहुत ही शानदार था और एक बेहतरीन एडवेंचर था. रेलवे डिपार्टमेंट का बहुत सहयोग मिला. कई स्टॉप पर वे हमारी ट्रेन के लिए रास्ता बना देते थे, जबकि कुछ स्टेशनों पर हमें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था, क्योंकि हम एक स्पेशल ट्रेन में थे.”
राजस्थान की चांदनी रात में किया शूट
उन्होंने आगे कहा, “एक बार हमने राजस्थान के जैसलमेर में चांदनी रात में एक शानदार सीन शूट किया, जहां कालबेलिया (लोक नृत्य) ग्रुप ने न सिर्फ शो के लिए, बल्कि शूटिंग के बाद यूनिट के लिए भी परफॉर्मेंस दी. बाद में, मध्य प्रदेश में हम जंगलों में रुके और पूर्णिमा की रात को वहां घूमे. हमें बताया गया था कि अचानक कोई हाथी हमें घूरता हुआ मिल सकता है. शुक्र है, ऐसा कुछ नहीं हुआ. मुझे नहीं लगता कि आज कोई ऐसा शो बना पाएगा.”
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