पार्टी, परिवार और राजनीति... जानें दिग्गज नेता शरद पवार ने किस मुद्दे पर क्या कुछ कहा

शरद पवार ने चुनाव, पार्टी नेतृत्व, संभावित विलय, अशोक खरात मामले और इजरायल दौरे को लेकर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने लोकतंत्र, महाराष्ट्र की विचारधारा और राजनीति में परिपक्वता पर भी टिप्पणी की.

विज्ञापन
Read Time: 5 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • शरद पवार ने कहा कि राजनीति का मकसद लोगों के लिए काम करना होना चाहिए, चुनाव को निर्विरोध कराना लोकतांत्रिक नहीं
  • राज्यसभा जाने का फैसला कांग्रेस के समर्थन से हुआ, पार्टी विलय पर कई दौर की बातचीत हुई लेकिन अंतिम निर्णय नहीं
  • परिवार में मुखिया ही आगे की भूमिका तय करता है, शरद पवार ने चुनाव न लड़ने और उम्मीदवार न उतारने का फैसला लिया
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने चुनाव, पार्टी नेतृत्व, पारिवारिक फैसलों, संभावित पार्टी विलय और महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने साफ किया कि राजनीति में आने का मकसद लोगों के लिए काम करना होना चाहिए और चुनाव को निर्विरोध कराए जाने की मांग लोकतांत्रिक नहीं है. पवार ने राज्यसभा जाने के फैसले, कांग्रेस के समर्थन और पार्टी विलय को लेकर हुई बातचीत का भी जिक्र किया. इसके साथ ही उन्होंने अशोक खरात मामले में ढोंगी बाबाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे महाराष्ट्र की विचारधारा के खिलाफ बताया. शरद पवार ने अपने इजरायल दौरे से जुड़ा अनुभव साझा करते हुए खेती और तकनीक को लेकर अपनी प्राथमिकता भी स्पष्ट की.

सेहत पर दिया अपडेट, जल्द करेंगे राज्य का दौरा

स्वास्थ्य को लेकर बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि अब तक वे हमेशा अपने पैरों पर चलते हुए आए हैं, लेकिन निमोनिया की वजह से एक महीना अस्पताल में भर्ती रहने और डेढ़‑दो महीने बाद दिल्ली आने की वजह से उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा. उन्होंने कहा कि वे जल्द ही पूरे राज्य का दौरा शुरू करेंगे.

किसी भी नेता से बात करने की जरूरत नहीं

चुनावी प्रक्रिया पर शरद पवार ने कहा कि राष्ट्रीय दलों द्वारा उम्मीदवार उतारना बिल्कुल भी गलत नहीं है. यह पार्टी का निर्णय और उनका अधिकार है, इसलिए इस पर अधिक चर्चा करने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि चुनाव को “निर्विरोध” होने देने की मांग करना गलत है और लोकतंत्र में चुनाव लड़ना है तो मुकाबला होना चाहिए, जैसे पहले सुनेत्रा पवार और सुप्रिया सुले के बीच चुनाव हुआ था. पारिवारिक और राजनीतिक फैसलों को लेकर शरद पवार ने कहा कि किसी भी नेता से बात करने की जरूरत नहीं है.

ये भी पढ़ें ; बारामती उपचुनावः नामांकन से एक दिन पहले सुनेत्रा पवार को विरोधी कांग्रेस से क्यों मांगनी पड़ी मदद?

Advertisement

परिवार और चुनाव को लेकर शरद पवार का रुख

राजनीति में लोगों के काम करने के लिए आना होता है. उन्होंने कहा कि अजित पवार लोगों के लिए सक्रिय थे और उनके प्रति सम्मान है, लेकिन दुर्भाग्यवश एक दुर्घटना में उनका निधन हो गया. पवार ने कहा कि परिवार में परंपरा रही है कि परिवार का मुखिया ही आगे की भूमिका तय करता है. आज परिवार के मुखिया के नाते यह जिम्मेदारी उनके पास है और उन्होंने तय किया था कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही कोई उम्मीदवार उतारेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि वहां अगर उनका फोटो इस्तेमाल किया जाता है तो वह गलत है.

राज्यसभा, कांग्रेस समर्थन और पार्टी विलय पर बयान

राज्यसभा जाने के फैसले पर शरद पवार ने कहा कि जब उन्होंने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया था, तब कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया. पार्टी विलय को लेकर उन्होंने बताया कि उनकी ओर से जयंत पाटिल और अजित पवार इस विषय पर चर्चा कर रहे थे. अजित पवार की आकस्मिक मृत्यु के बाद यह चर्चा रुक गई.  उन्होंने कहा कि अब तक 5‑6 दौर की बातचीत हो चुकी थी और इसकी पूरी जानकारी उन्हें दी गई थी. भविष्य में विलय होगा या नहीं, इस पर उन्होंने कहा कि यह आज नहीं कहा जा सकता.

Advertisement

ये भी पढ़ें ; बारामती में सुनेत्रा पवार की गुहार के बावजूद कांग्रेस ने उतारा उम्मीदवार, आकाश मोरे होंगे मैदान में

पार्टी नेतृत्व और पार्थ पवार पर शरद पवार की टिप्पणी

पार्टी नेतृत्व पर शरद पवार ने कहा कि पार्टी का नेतृत्व जिसके पास होता है, अधिकार भी उन्हीं के पास होते हैं. पार्टी किसके हाथों में सौंपनी है या किसके साथ चलानी है, यह निर्णय लेना नेतृत्व का अधिकार है. पार्थ पवार के बयान पर उन्होंने कहा कि राजनीति में एक प्रकार की परिपक्वता की आवश्यकता होती है और उनमें वह कितनी है, यह वे आज नहीं बता सकते.

अशोक खरात मामला: ढोंगी बाबाओं पर पवार का हमला

अशोक खरात मामले पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में इन दिनों ढोंगी बाबाओं की भीड़ बढ़ती जा रही है. एक तरफ शाहू‑फुले‑आंबेडकर के प्रगतिशील विचारों की बात की जाती है और दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि ऐसे बाबाओं के पास जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र की विचारधारा के बिल्कुल विपरीत है. पवार ने कहा कि आज महाराष्ट्र में खरात बाबा के साथ‑साथ एक और नया बाबा सामने आया है. उन्होंने कहा कि किसने कितने फोन किए, इसमें कई बड़े नाम शामिल हैं और राजनीति व समाज में ऊंचे पदों पर बैठे लोग भी इसमें हैं. यह स्थिति महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा के लिए बिल्कुल भी शोभनीय नहीं है.

इजरायल दौरा: खेती‑तकनीक और मोदी से जुड़ा किस्सा

अपने इजरायल दौरे का जिक्र करते हुए शरद पवार ने कहा कि वे एक प्रतिनिधिमंडल के साथ इजरायल गए थे और वहां उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी रुचि वहां की खेती और तकनीक को समझने में है. उन्होंने बताया कि उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और उन्होंने भी इजरायल आने की इच्छा जताई थी. पवार के अनुसार, उनके प्रतिनिधिमंडल में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के मुख्यमंत्री शामिल थे और यह दौरा विशेष रूप से खेती और कृषि संरक्षण पर आधारित था. उन्होंने कहा कि उस समय मोदी ने उनसे कुछ दिन और रुकने की विनती की थी, जिसके लिए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री से अनुमति ली थी और अनुमति मिल गई थी.

Advertisement

ये भी पढ़ें : महाराष्ट्र में 96 हजार करोड़ का पेमेंट बकाया, 3 लाख ठेकेदारों का हड़ताल का ऐलान, रुक सकते हैं सारे काम

Featured Video Of The Day
Iran Israel War: ईरान-अमेरिका युद्ध में अब तक 3540 लोगों की मौत | Breaking News | Donald Trump