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क्यों अलग-अलग सोने लगे हैं भारतीय पति-पत्नी, क्या है स्लीप डिवोर्स बढ़ने के पीछे की वजह

Sleep Divorce: क्या अलग-अलग सोना आपके रिश्ते को बनाता है मजबूत. जानें क्या है स्लीप डिवोर्स, जिसे सबसे ज्यादा इस उम्र के लोग कर रहे फॉलो.

क्यों अलग-अलग सोने लगे हैं भारतीय पति-पत्नी, क्या है स्लीप डिवोर्स बढ़ने के पीछे की वजह
Sleep Divorce: क्या अलग सोना आपके रिश्ते को और मजबूत बना सकता है?

आज के समय में कपल्स के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर झगड़ा देखा जाता है. कई बार छोटी-छोटी बातें इतनी बढ़ जाती हैं कि बात तलाक यानि डिवोर्स तक पहुंच जाती है. आज हम स्लीप डिवोर्स के बारे में बात कर रहे हैं, जो सुनने में तो थोड़ा डरावना लग सकता है. मगर एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'स्लीप डिवोर्स' रिश्ते को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे बचाने और रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए किया जा रहा है. तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है स्लीप डिवोर्स.

क्या है स्लीप डिवोर्स? (What is Sleep Divorce)

आसान शब्दों में कहें तो, स्लीप डिवोर्स का मतलब है पति-पत्नी का जानबूझकर अलग बेड या अलग कमरे में सोने का फैसला लेना. यह कोई अलगाव नहीं, बल्कि आपसी सहमति से लिया गया एक स्मार्ट फैसला है ताकि दोनों पार्टनर अपनी नींद पूरी कर सकें और सुबह चिड़चिड़े न उठें. 

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क्या कहते हैं नए आंकड़े?

हाल ही में अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन (AASM) के सर्वे के अनुसार, लगभग 31% अमेरिकी वयस्क अब स्लीप डिवोर्स अपना रहे हैं. इसका मतलब है कि कपल्स एक ही कमरे में अलग बेड पर सो रहे हैं या फिर अलग-अलग कमरों में, ताकि दोनों को अपनी मर्जी की और गहरी नींद मिल सके.

कौन कर रहा इसे सबसे ज्यादा फॉलो- (Who is following it the most)

आपको बता दें कि 35 से 44 साल की उम्र के लोग इस ट्रेंड को सबसे ज्यादा अपना रहे हैं (39%), जबकि 65 साल से अधिक उम्र के लोग इसमें सबसे पीछे हैं (18%).

AASM की एक्सपर्ट सीमा खोसला का कहना है कि नींद पूरी न होने का सीधा असर हमारे व्यवहार पर पड़ता है. जब आपकी नींद किसी पार्टनर की वजह से खराब होती है, तो मन में धीरे-धीरे कड़वाहट पनपने लगती है. नींद की कमी से हम कम सहनशील हो जाते हैं और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है. 

सर्वे के अनुसार लोग नींद के लिए अपनी आदतों में और भी छोटे-छोटे बदलाव कर रहे हैं, जैसे सोने का अलग समय, साइलेंट अलार्म आदि. 

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आखिर लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं?

खर्राटे- खर्राटों की आवाज पार्टनर की रातों की नींद हराम कर सकती है. इसलिए वो एक दूसरे की नींद में बाधा न डालते हुए इसे बेहतर मान रहे हैं.

स्लीप एपनिया- बहुत से लोगों को सोते समय पैर हिलाने की आदत होती है या उन्हें स्लीप एपनिया (सोते समय सांस में रुकावट) जैसी समस्या होती है. इससे भी कई बार उनकी नींद खराब हो सकती है.

बार-बार करवटें बदलना- अगर पार्टनर बहुत ज्यादा हलचल करता है, तो पार्टनर की नींद में बाधा आ सकती है. 

स्लीप डिवोर्स के साथ रोमांस कैसे बचाएं? 

1. रात का रूटीन- सोने से पहले साथ बैठकर कोई टीवी शो देखें या दिन भर की बातें करें.

2. क्वालिटी टाइम- दिन भर में या सोने से पहले का समय एक-दूसरे के लिए रखें.

3. तालमेल बैठाएं- अगर आपको लगता है कि आप साथ सो सकते हैं, तो अपने स्लीपिंग पैटर्न को थोड़ा एडजस्ट करने की कोशिश कर सकते हैं.

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