डिजिटल युग में मोबाइल और इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. जानकारी, मनोरंजन और सोशल कनेक्शन सब कुछ अब एक क्लिक पर उपलब्ध है. इसी आसान पहुंच ने एक और चीज को आम बना दिया है, पॉर्न देखना. इसी पर सिकंजा कसते हुए सरकार समय-समय पर OTT प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती से कार्रवाही करती है. हाल ही में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अश्लील कंटेंट स्ट्रीम करने के आरोप में 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया है. सरकार के मुताबिक इन ऐप्स पर दिखाए जा रहे कुछ कंटेंट को लेकर लंबे समय से आपत्ति जताई जा रही थी. ये फैसला आईटी एक्ट और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड के नियमों के अनुसार लिया गया है.
लेकिन, बड़ा सवाल अब भी कायम है आखिर लोग पॉर्न देखते क्यों हैं? क्या यह केवल जिज्ञासा है? क्या यह सिर्फ मनोरंजन है? या इसके पीछे गहरी मनोवैज्ञानिक और सामाजिक वजहें काम करती हैं?
इन्हीं सवालों का जवाब खोजने के लिए इंटरनेशनल रिसर्चर्स की एक टीम ने एक अध्ययन किया. यह रिसर्च व्लाद बर्टावेर्डे और उनके सहयोगियों द्वारा की गई, जिसे जर्नल इवोल्यूशनरी साइकोलॉजी में प्रकाशित किया गया. इस अध्ययन ने पॉर्न देखने के कारणों को कई नए नजरिए से समझने की कोशिश की.
रिसर्च में क्या पाया गया?
रिसर्च की पहली स्टेज में 276 कॉलेज छात्रों से खुला सवाल पूछा गया "आप पॉर्न क्यों देखते हैं?" उनके जवाबों के विश्लेषण से कुल 78 अलग-अलग कारण सामने आए. यानी यह साफ हो गया कि पॉर्न देखने के पीछे एक ही वजह नहीं, बल्कि कई मानसिक और सामाजिक कारण होते हैं. स्टडी के दूसरी स्टेज में 322 पार्टिसिपेंट्स के डेटा को स्टेटिस्टिक्स तरीके से जांचा गया और इन 78 कारणों को चार बड़े ग्रुप्स में बांटा गया.

सरकार ने अश्लील कंटेंट स्ट्रीम करने के आरोप में 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को ब्लॉक किया है.
बढ़ी हुई सेक्स ड्राइव, सबसे बड़ा कारण
सबसे प्रमुख कारण निकला बढ़ी हुई सेक्स ड्राइव. कई लोगों ने स्वीकार किया कि वे एक्साइटमेंट, फैंटेसी, जल्दी संतुष्टि, बोरियत दूर करने या सिर्फ मनोरंजन के लिए पॉर्न देखते हैं. कुछ लोगों ने इसे आदत भी बताया. रिसर्च में यह फैक्टर सबसे ज्यादा प्रभावी पाया गया.
सीखने और परफॉर्मेंस सुधारने का नजरिया
दूसरा बड़ा कारण था सेक्सुअल परफॉर्मेंस में सुधार. काफी पार्टिपेंट्स ने कहा कि वे पॉर्न को एक अनौपचारिक लर्निंग टूल की तरह देखते हैं. उनके अनुसार, इससे वे नई चीजें समझते हैं, तकनीक सीखते हैं और अपने पार्टनर के साथ बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश करते हैं. यानी कुछ लोगों के लिए यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रिलेशनशिप को बेहतर बनाने की कोशिश भी हो सकती है.
सोशल प्रभाव और मनोरंजन
तीसरा कारण सामाजिक प्रभाव से जुड़ा मिला. दोस्तों की चर्चा, साथ में देखना, कंटेंट की क्वालिटी या किसी खास एक्टर की लोकप्रियता भी वजह बन सकती है. कुछ मामलों में यह सिर्फ टाइम पास या मनोरंजन का जरिया होता है.
भावनात्मक खालीपन और तनाव
चौथा और अहम कारण भावनात्मक स्थिति से जुड़ा पाया गया. अकेलापन, रिश्तों की कमी, पार्टनर से दूरी, तनाव या उदासी इन कंडीशन में भी लोग पॉर्न की ओर रुख करते हैं. कई पार्टिपेंट्स ने माना कि इससे उन्हें अस्थायी राहत या ध्यान भटकाने में मदद मिलती है.

पॉर्न देखने के पीछे एक ही वजह नहीं, बल्कि कई मानसिक और सामाजिक कारण होते हैं.
पर्सनैलिटी और रिश्तों से जुड़ा कनेक्शन
रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन लोगों का झुकाव लंबे कमिटेड रिश्तों की बजाय कैजुअल रिश्तों की तरफ ज्यादा था, वे अक्सर एक्साइटमेंट और सेक्स ड्राइव जैसी वजहों से पॉर्न देखते थे. जेंडर के लेवल पर भी अंतर दिखा. ज्यादातर कैटेगरी में पुरुषों के स्कोर महिलाओं से ज्यादा थे. हालांकि सीखने और परफॉर्मेंस सुधारने के मामले में दोनों लगभग बराबर पाए गए.
रिसर्च का कन्क्लूजन है कि पॉर्न देखने की आदत को एक ही नजरिए से नहीं समझा जा सकता. यह केवल जिज्ञासा या मनोरंजन नहीं, बल्कि कई बार मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और व्यक्तिगत जरूरतों से जुड़ा व्यवहार होता है.
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