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टिश्यू पेपर का रंग हमेशा सफेद क्यों होता है? क्या है इसके पीछे की दिलचस्प वजह

टिश्यू पेपर ज्यादातर सफेद रंग के ही क्यों होते हैं? इसके पीछे सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि एलर्जी का कम खतरा, स्किन सेफ्टी, कम केमिकल, पर्यावरण की सुरक्षा और कम लागत जैसे कई अहम कारण छिपे हैं. जानिए इससे जुड़ी दिलचस्प बातें.

टिश्यू पेपर का रंग हमेशा सफेद क्यों होता है? क्या है इसके पीछे की दिलचस्प वजह
सफेद ही क्यों होते हैं ज्यादातर टिश्यू पेपर?
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घर हो, ऑफिस हो या फिर कोई होटल-रेस्टोरेंट, टिश्यू पेपर का इस्तेमाल आज हर जगह होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ज्यादातर टिश्यू पेपर सफेद रंग के ही क्यों होते हैं? यह सिर्फ दिखने की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे सेहत, सफाई और पर्यावरण से जुड़े कई कारण हैं. यही वजह है कि दुनिया भर में सबसे ज्यादा सफेद टिश्यू पेपर का ही इस्तेमाल किया जाता है.

सफेद रंग ही क्यों?

सफेद रंग को आमतौर पर स्वच्छता और साफ-सफाई से जोड़कर देखा जाता है. टिश्यू पेपर का इस्तेमाल चेहरे, हाथ या खाने-पीने की चीजों से जुड़ा होता है, इसलिए सफेद रंग लोगों में साफ और सुरक्षित होने का भरोसा पैदा करता है. 

एलर्जी का खतरा कम रहता है

रंगीन टिश्यू पेपर बनाने के लिए डाई और केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ लोगों की स्किन सेन्सिटिव होती है, ऐसे में रंगों में मौजूद तत्व एलर्जी या जलन का कारण बन सकते हैं. वहीं सफेद टिश्यू में ऐसे रंग नहीं होते, इसलिए यह स्किन के लिए ज्यादा सेफ माने जाते हैं. 

स्किन इन्फेक्शन का खतरा कम

चेहरे और त्वचा पर इस्तेमाल होने वाली चीजों में जितने कम केमिकल हों, उतना बेहतर माना जाता है. सफेद टिश्यू पेपर में रंग मिलाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे त्वचा पर रिएक्शन या इन्फेक्शन का खतरा कम हो सकता है. 

जल्दी गल जाता है

टिश्यू पेपर को इस तरह बनाया जाता है कि वह पानी के संपर्क में आने पर आसानी से टूट जाए और जल्दी गल जाए. सफेद टिश्यू में आमतौर पर रंग और भारी केमिकल नहीं मिलाए जाते, इसलिए यह आसानी से डिस्पोज हो जाता है.

प्रदूषण से बचाव में मदद

रंगीन टिश्यू बनाने के लिए कई तरह के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं,  सफेद टिश्यू में कम केमिकल इस्तेमाल होते हैं, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान होता है साथ ही कचरा फेंकना या नष्ट करना भी आसान हो जाता है.

सफेद टिश्यू बनाना पड़ता है सस्ता

टिश्यू पेपर बड़े पैमाने पर बनाया जाता है. उसमें अलग-अलग रंग और डिजाइन जोड़ने से उत्पादन की लागत बढ़ सकती है. ऐसे में सफेद टिश्यू बनाने में कम खर्च आता है, इसलिए कंपनियां और ग्राहक दोनों इसे ज्यादा पसंद करते हैं.

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