Mental And Physical Balance: यूनानी सिद्धांतों में 'हरकत-ओ-सुकून नफसानी' यानी मानसिक गतिविधि और मानसिक विश्राम को स्वस्थ जीवन का अहम आधार माना गया है. जिस तरह हमारा शरीर (Body) लगातार काम करता रहे और उसे आराम न मिले तो वह थककर बीमार पड़ जाता है, ठीक उसी तरह हमारा मन (Mind) भी अगर लगातार तनाव (Stress), चिंता (Worry), डर (Fear) या गुस्से (Anger) में उलझा रहे तो उसका संतुलन बिगड़ जाता है. यूनानी चिकित्सा (Unani Medicine) सिद्धांतों के अनुसार, हमारे भीतर एक जीवन शक्ति होती है जिसे रूह कहा जाता है. यही रूह हमारे मानसिक और शारीरिक संतुलन (Mental And Physical Balance) को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है. जब हमारी भावनाएं संतुलित रहती हैं, सोच सकारात्मक होती है और हम जरूरत के मुताबिक मानसिक आराम लेते हैं, तो रूह भी संतुलन में रहती है और सेहत बेहतर बनी रहती है.
भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक थकान का बढ़ता खतरा
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर शरीर की थकान को तो समझ लेते हैं, लेकिन मन की थकान को नजरअंदाज कर देते हैं. देर रात तक काम करना, मोबाइल और स्क्रीन पर लगातार समय बिताना, हर समय किसी न किसी चिंता में डूबे रहना या भविष्य की फिक्र में घुले रहना, ये सब मानसिक बोझ को बढ़ाते हैं.
मानसिक गतिविधि और विश्राम में संतुलन आवश्यक
यूनानी चिकित्सा कहती है कि मानसिक गतिविधि जरूरी है, क्योंकि सोच-विचार, सीखना और काम करना, ये सब जीवन का हिस्सा हैं. लेकिन हर चीज की तरह इसमें भी संतुलन होना चाहिए. अगर हरकत ज्यादा होगी और सुकून कम, तो बेचैनी, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और मानसिक थकान जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं. वहीं, अगर व्यक्ति बिल्कुल निष्क्रिय हो जाए और कोई मानसिक गतिविधि न करे, तो भी उदासी और सुस्ती बढ़ सकती है. इसलिए संतुलन ही असली कुंजी है.
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मन को सुकून देने वाले छोटे-छोटे कदम
मानसिक सुकून पाने के लिए बहुत बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती. दिन में थोड़ा समय खुद के लिए निकालना, गहरी सांस लेना, प्रकृति के बीच कुछ पल बिताना, नमाज, ध्यान या प्रार्थना करना और सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना, ये छोटे-छोटे कदम मन को राहत देते हैं. साथ ही, अपनी सीमाओं को समझना भी जरूरी है. हर काम अपने ऊपर ले लेना और हर समय परफेक्ट बनने की कोशिश करना भी मानसिक दबाव बढ़ाता है.
यूनानी सिद्धांत हमें सिखाता है कि संयम अपनाएं, सकारात्मक सोच रखें और जरूरत पड़ने पर मन को विश्राम दें. जब मन शांत और संतुलित रहता है, तो उसका असर पूरे शरीर पर दिखाई देता है.
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