शाबान का महीना मुसलमानों के लिए बेहद खास माना जाता है. इसी महीने की 15वीं रात को शब-ए-बारात (Shab E Barat) मनाई जाती है. जिसे रहमत और मगफिरत की रात कहा जाता है. इस्लाम में माना जाता है कि इस मुबारक रात में अल्लाह अपने बंदों की दुआएं (Dua) सुनते हैं और सच्चे दिल से तौबा (Tauba) करने वालों को माफ फरमाते हैं. लोग इस रात नफिल नमाज अदा करते हैं. कुरआन की तिलावत करते हैं और खास दुआएं पढ़ते हैं. अगर आप भी इस रात इबादत कर सवाब कमाना चाहते हैं, तो यहां आसान भाषा में नमाज और दुआ का तरीका (Dua Ka Tareeka) जान लीजिए.
शब-ए-बारात की नमाज का तरीका
शब-ए-बारात की इबादत इशा की फर्ज और सुन्नत नमाज के बाद शुरू की जाती है. इस रात खास तौर पर नफिल नमाज पढ़ी जाती है. आप अपनी सहूलियत के हिसाब से 2 रकात से लेकर 24 रकात तक नफिल नमाज अदा कर सकते हैं.
नमाज पढ़ने का तरीका वही है जो आम नमाज का होता है. फर्क सिर्फ इतना है कि नियत करते समय नफिल नमाज की नियत करें. उदाहरण के लिए आप दिल में कह सकते हैं –
‘मैं दो रकात नफिल नमाज शब-ए-बारात की नियत से अल्लाह के लिए पढ़ रहा/रही हूं, मेरा रुख काबा शरीफ की तरफ है.'
फिर ‘अल्लाहु अकबर' कहकर नमाज शुरू करें.
मगफिरत की दुआ
नमाज के बाद अपने गुनाहों की माफी मांगना बहुत अफजल माना गया है. एक खास दुआ है:
‘अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लम्तु नफ्सी ज़ुल्मन कसीरन… फगफिर ली मगफिरतन मिन इंदिका, वरहम्नी, इन्नका अंतल गफूरुर रहीम.'
इसका मतलब है – ऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान पर बहुत जुल्म किया है. मेरे गुनाह सिर्फ तू ही माफ कर सकता है. मुझे माफ कर दे और मुझ पर रहमत फरमा.
शब-ए-बारात की खास दुआ
इस रात एक और दुआ बहुत पढ़ी जाती है:
‘अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ्वा फअ्फु अन्नी.'
मतलब – ऐ अल्लाह! तू बहुत माफ करने वाला है और माफी को पसंद करता है, मुझे भी माफ कर दे.
लैलतुल कद्र की दुआ
एक छोटी लेकिन असरदार दुआ है:
‘अल्लाहुम्मगफिर ली वरहम्नी वअफु अन्नी वतकब्बल मिन्नी.'
यानि – ऐ अल्लाह! मुझे माफ कर, मुझ पर रहमत कर, मेरे गुनाहों को माफ कर और मेरी इबादत कबूल कर.
इस मुबारक रात में सच्चे दिल से की गई इबादत और दुआ इंसान के दिल को सुकून देती है और अल्लाह की रहमत पाने का जरिया बनती है.
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