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साथ रहना काफी नहीं, महसूस होना जरूरी, जानें Emotional Availability क्यों बन गई है आज के रिश्तों की जरूरत

Relationships Advice: इमोशनल अवेलेबिलिटी यानी भावनात्मक रूप से उपलब्ध होना. सवाल यह है कि आखिर यह आज के रिश्तों की नई जरूरत क्यों बन गई है? आइए जानते हैं.

साथ रहना काफी नहीं, महसूस होना जरूरी, जानें Emotional Availability क्यों बन गई है आज के रिश्तों की जरूरत

Emotional availability In Relationships: आज की तेज रफ्तार दौर में रिश्तों की परिभाषा बदल रही है. पहले जहां रिश्ते जिम्मेदारी, समझौते और सामाजिक ढांचे पर टिके होते थे, वहीं अब लोग रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव ढूंढ रहे हैं. इसी बदलाव से एक नया और बेहद जरूरी कॉन्सेप्ट सामने आया है, इमोशनल अवेलेबिलिटी यानी भावनात्मक रूप से उपलब्ध होना. सवाल यह है कि आखिर यह आज के रिश्तों की नई जरूरत क्यों बन गई है? और इमोशनल अवेलेबिलिटी आखिर क्या है. 

दिल से जुड़ने की तलाश

आज इंसान के पास सब कुछ है, करियर, सोशल मीडिया, डिजिटल कनेक्शन, लेकिन फिर भी अकेलापन बढ़ रहा है. रिश्ते होते हुए भी लोग खुद को सुना न जाने वाला और समझा न जाने वाला महसूस करते हैं. वजह साफ है: कई रिश्तों में शारीरिक मौजूदगी तो है, लेकिन भावनात्मक मौजूदगी नहीं. इमोशनल अवेलेबिलिटी का  मतलब सिर्फ साथ रहना नहीं, बल्कि सामने वाले की भावनाओं को समझना, स्वीकार करना और उनके साथ खड़ा होना है. यही वजह है कि आज लोग पूछने लगे हैं क्या मेरा पार्टनर मुझे इमोशनल अवेलेबल है?

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इमोशनल अवेलेबिलिटी  क्या होती है?

  • अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर पाना
  • सामने वाले की भावनाओं को बिना जज किए सुनना
  • मुश्किल समय में भावनात्मक सहारा देना
  • रिश्ते में ईमानदारी और संवेदनशीलता रखना

ऐसा व्यक्ति भावनाओं से भागता नहीं, बल्कि उन्हें समझने की कोशिश करता है.

आज के रिश्तों में इसकी जरूरत क्यों बढ़ी?

1. डिजिटल दूरी, भावनात्मक दूरी

हम दिनभर ऑनलाइन रहते हैं, लेकिन दिल से कनेक्ट कम होते जा रहे हैं. इमोशनल अवेलेबिलिटी इस दूरी को पाटने का काम करती है.

2. मेंटल हेल्थ की बढ़ती समझ

आज लोग मानसिक स्वास्थ्य को गंभीरता से लेने लगे हैं. एक इमोशनल अवेलेबल रिश्ता तनाव, चिंता और अकेलेपन को कम कर सकता है.

3. पुराने जख्म और ट्रॉमा

कई लोग पिछले रिश्तों के दर्द के साथ नए रिश्ते में आते हैं. ऐसे में इमोशनल अवेलेबिलिटी ही भरोसा और सुरक्षा देती है.

4.स्ट्रॉन्ग बनो वाली सोच का टूटना

अब यह माना जाने लगा है कि रोना, डरना या कमज़ोर महसूस करना गलत नहीं है. भावनाओं को दबाने के बजाय साझा करना जरूरी है.

रिश्तों पर इसका असर

जब दोनों पार्टनर इमोशनल अवेलेबल होते हैं:

  • गलतफहमियां कम होती हैं.
  • झगड़े जल्दी सुलझते हैं.
  • रिश्ता सुरक्षित और गहरा बनता है.
  • प्यार सिर्फ शब्दों में नहीं, एहसास में दिखता है.

रिश्ते निभाने का नया तरीका

आज के समय में रिश्तों को चलाने के लिए सिर्फ वफादारी या समय देना काफी नहीं है. जरूरी है कि आप दिल से मौजूद हों. इमोशनल अवेलेबिलिटी रिश्तों को बोझ नहीं, बल्कि सुकून बनाती है.

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