किसी दुकान या मॉल में जाते ही परफ्यूम की दर्जनों खुशबुओं के बीच जो महक सबसे पहले अच्छी लगती है, हम अक्सर उसी को चुन लेते हैं. लेकिन असली दिक्कत तब शुरू होती है, जब कुछ घंटों बाद वही खुशबू या तो गायब हो जाती है या पूरी तरह बदल जाती है. कई लोग इसे प्रोडक्ट की खराब क्वालिटी समझते हैं, जबकि असल में यह परफ्यूम के काम करने का नेचुरल तरीका है. एक अच्छा परफ्यूम सिर्फ एक खुशबू नहीं होता, बल्कि यह अलग-अलग लेयर्स में खुलता है और समय के साथ अपनी असली पहचान दिखाता है. यही वजह है कि परफ्यूम खरीदना सिर्फ पसंद का नहीं, बल्कि समझ का भी मामला है. अगर आप भी चाहते हैं कि आपका सेंट लंबे समय तक टिके, सूट करे और आपकी पहचान बने, तो कुछ जरूरी टेक्निकल फैक्टर्स को जानना बेहद जरूरी हो जाता है.
परफ्यूम पहचानने के लिए टेक्निकल फैक्ट्स- (Technical Facts for Identifying Perfumes)
“नोट्स” ही तय करते हैं खुशबू का पूरा सफर-
परफ्यूम में नोट्स का मतलब उसकी खुशबू की अलग-अलग लेयर्स से होता है, जो समय के साथ खुलती हैं. शुरुआत में टॉप नोट्स आते हैं जो फ्रेश और हल्के होते हैं, लेकिन जल्दी उड़ जाते हैं. इसके बाद हार्ट नोट्स सामने आते हैं, जो खुशबू का असली कैरेक्टर बनाते हैं. अंत में बेस नोट्स होते हैं, जो सबसे ज्यादा देर टिकते हैं और परफ्यूम की गहराई तय करते हैं. अगर कोई परफ्यूम इन तीनों स्टेज में बदलाव नहीं दिखाता, तो उसकी क्वालिटी सीमित मानी जाती है.

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EDP और EDT, ये सिर्फ नाम नहीं, क्वालिटी का संकेत-
परफ्यूम की बोतल पर लिखे EDP (Eau de Parfum) और EDT (Eau de Toilette) जैसे शब्द उसके कॉन्सन्ट्रेशन को दिखाते हैं. EDP में खुशबू वाले ऑयल्स ज्यादा होते हैं, इसलिए यह आमतौर पर 6–8 घंटे तक टिक सकता है. वहीं EDT हल्का होता है और कम समय तक रहता है. इसलिए खरीदते समय इन टर्म्स को नजरअंदाज करना सही नहीं होता.
प्रोजेक्शन (Projection) और सियाज (Sillage) से समझें परफ्यूम की क्लास-
परफ्यूम की क्वालिटी सिर्फ इस बात से नहीं तय होती कि वह कितनी देर टिकता है, बल्कि इस बात से भी कि वह आसपास कैसे महसूस होता है. प्रोजेक्शन बताता है कि आपकी खुशबू कितनी दूर तक जाती है, जबकि सियाज वह ट्रेल है जो आपके गुजरने के बाद भी हल्के रूप में बनी रहती है. एक अच्छा परफ्यूम तेज नहीं चुभता, बल्कि सॉफ्ट और एलिगेंट तरीके से महसूस होता है.
अल्कोहल बनाम फ्रेगरेंस ऑयल, संतुलन है जरूरी-
जब परफ्यूम स्प्रे किया जाता है, तो उसमें हल्की अल्कोहल की स्मेल आ सकती है, लेकिन यह ज्यादा देर नहीं टिकनी चाहिए. अच्छी क्वालिटी में अल्कोहल सिर्फ खुशबू को फैलाने का काम करता है, जबकि असली महक फ्रेगरेंस ऑयल्स से आती है. अगर अल्कोहल ही हावी हो जाए, तो यह कमजोर फॉर्मूलेशन का संकेत हो सकता है.
लिक्विड, स्प्रे और पैकेजिंग भी देते हैं संकेत-
परफ्यूम का लिक्विड साफ और पारदर्शी होना चाहिए. धुंधलापन या तलछट दिखना खराब स्टोरेज या एक्सपायरी की ओर इशारा कर सकता है. साथ ही, स्प्रे करने पर परफ्यूम, धुंध की तरह निकलना चाहिए न की पानी के स्प्रे की तरह. इसे ही फाइन मिस्ट कहते हैं. बोतल और बॉक्स पर दिया गया बैच कोड मैच करना भी उसकी ऑथेंटिसिटी चेक करने का एक तरीका है.
स्किन टेस्ट क्यों है सबसे जरूरी स्टेप-
हर व्यक्ति की त्वचा का पीएच अलग होता है, इसलिए एक ही परफ्यूम अलग-अलग लोगों पर अलग तरह से महक सकता है. यही वजह है कि कागज की स्ट्रिप पर टेस्ट करने से ज्यादा सही तरीका है उसे अपनी कलाई पर लगाकर कुछ समय तक छोड़ना. 20–30 मिनट में उसकी असली खुशबू सामने आने लगती है.
परफ्यूम को सिर्फ एक अच्छी महक के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी पर्सनैलिटी के हिस्से के रूप में देखना चाहिए. सही जानकारी और थोड़ा धैर्य आपको ऐसी खुशबू चुनने में मदद करता है, जो न सिर्फ आपको सूट करे, बल्कि लंबे समय तक याद भी रहे. जल्दबाजी में लिया गया परफ्यूम अक्सर पछतावा देता है, जबकि समझदारी से चुनी गई खुशबू आपकी पहचान बन जाती है.
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